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मनमोहन का राष्ट्रपति को खत- कांग्रेस को धमका रहे हैं पीएम मोदी, पद की गरिमा के खिलाफ है उनकी भाषा

Mon, 14 May 2018 07:50 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 14 May 2018 07:50 PM IST
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Manmohan Singh writes to President asking him to caution PM from using intimidating language

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में इस्तेमाल आपत्तिजनक भाषा की शिकायत की है। पत्र में सिंह के अलावा कांग्रेस के 14 वरिष्ठ नेताओं ने भी हस्ताक्षर किए हैं। इस पत्र के साथ 6 मई को हुबली में मोदी के चुनावी भाषण का वीडियो लिंक भी भेजा गया है जिसमें प्रधानमंत्री ने कहा था कि कांग्रेस नेता कान खोलकर सुन लीजिए, अगर सीमाओं को पार करोगे तो ये मोदी है, लेने के देने पड़ जाएंगे।

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सिंह ने पत्र में लिखा है कि संविधान में देश के प्रधानमंत्री को विशेष दर्जा प्राप्त है। वे संविधान की रक्षा की शपथ लेते हैं। प्रधानमंत्री को किसी के खिलाफ  इस प्रकार की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपति से कहा कि मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेताओं के लिए मोदी की ओर से धमकी भरी और डराने वाली भाषा का इस्तेमाल प्रधानमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि प्रधानमंत्री को इस तरह की अभद्र भाषा के इस्तेमाल करने से मना करें। 
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सिंह ने लिखा है कि कार्यपालिका प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करती है उनसे आदेश लेती है। उन्होंने लिखा है सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों ने सार्वजनिक या निजी तौर पर भी मर्यादा बनाए रखी है। कल्पना भी नहीं की जा सकती कि लोकतंत्र में सरकार के प्रमुख के तौर पर एक प्रधानमंत्री धमकाने और उकसाने वाले शब्दों का इस्तेमाल करे। सिंह ने कांग्रेस नेताओं को दी गई धमकी को निंदनीय बताकर कहा कि किसी संवैधानिक और लोकतांत्रिक देश में प्रधानमंत्री की ये भाषा नहीं हो सकती है। ऐसा व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता है। धमकाने और उकसाने के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल अपमानित करने और माहौल बिगाडऩे वाला है। 
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दो पेज के पत्र में मनमोहन सिंह ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी को लेकर कही गई बातों पर लिखा है कि कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है। पार्टी ने कई चुनौतियों का सामना किया है। कांग्रेस नेतृत्व ने चुनौतियों और खतरों का सामना करने में साहस और निडरता दिखाई है। उन्होंने लिखा कि न तो हमारी पार्टी और न ही हमारे नेता ऐसी धमकियों के आगे झुकेंगे। 

पूर्व प्रधानमंत्री ने पत्र के आखिर में लिखा है कि भारत के प्रथम नागरिक और प्रमुख की हैसियत से राष्ट्रपति की बड़ी जिम्मेदारी बनती है कि वे प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट को सलाह और मार्गदर्शन दें। साथ ही अपेक्षा की है कि पीएम को बताएं कि चुनाव प्रचार में ही सही प्रधानमंत्री से ऐसी धमकी भरी भाषा की उम्मीद नहीं की जाती है।

मोदी ने ये कहा था
कांग्रेस के नेता कान खोलकर सुन लीजिए, अगर सीमाओं को पार करोगे तो ये मोदी है, लेने के देने पड़ जाएंगे।



 

मनमोहन सिंह की चिट्ठी की खास बातें

Manmohan Singh writes to President asking him to caution PM from using intimidating language
मनमोहन सिंह की चिट्ठी की खास बातें

- संविधान में प्रधानमंत्री को एक खास दर्जा हासिल है। वे कैबिनेट का नेतृत्व करते हैं और कार्यपालिका उन्हें रिपोर्ट करती है और उनसे आदेश लेती है। 
- यह अकल्पनीय है कि पीएम धमकाने और डराने वाले शब्दों का प्रयोग करेंगे और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेताओं को खुलेआम चेतावनी देंगे।
- प्रधानमंत्री की यह धमकी निंदनीय है। 1.3 अरब की आबादी वाले लोकतांत्रिक देश में यह पीएम की भाषा नहीं हो सकती है। ऐसा बर्ताव अस्वीकार्य है।
- इसमें जो शब्द इस्तेमाल किए गए हैं, उनका मकसद अपमानित करना और माहौल बिगाडऩे के लिए उकसाना है।
- कांग्रेस ने सवा सौ साल के इतिहास में कई चुनौतियों का सामना किया है। न तो पार्टी और न ही उसके नेता ऐसी धमकियों के सामने झुकेंगे।
- राष्ट्रपति की यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वे पीएम और उनकी कैबिनेट का मार्गदर्शन करें। चुनाव प्रचार में ही सही, पीएम से ऐसी धमकी भरी भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती है।

इन नेताओं ने किए पत्र पर हस्ताक्षर
मनमोहन सिंह के अलावा इस पत्र पर कांग्रेस नेता एके एंटनी, गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, पी चिदंबरम, अशोक गहलोत, मल्लिकार्जुन खडग़े, करण सिंह, अंबिका सोनी, कमलनाथ, आनंद शर्मा, मोतीलाल वोरा, दिग्विजय सिंह और मुकुल वासनिक ने भी हस्ताक्षर किए हैं।
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