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RTI: 'मनमोहन सिंह के निधन पर आरटीआई कार्यकर्ता दुखी, कहा- वे जवाबदेही-पारदर्शिता के लिए रहे प्रतिबद्ध
Fri, 27 Dec 2024 04:43 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Fri, 27 Dec 2024 04:43 PM IST
सार
पूर्व सूचना आयुक्त और आरटीआई कार्यकर्ता शैलेश गांधी ने कहा कि मनमोहन सिंह ने आरटीआई कानून लाकर बहुत अच्छा काम किया। हम इसके लिए हमेशे उनके आभारी रहेंगे।"
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पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन
- फोटो : PTI
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विस्तार
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सूचना का अधिकार अधिनियम के कार्यान्वयन के साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण के युग की शुरुआत की। उन्होंने 2005 में आरटीआई अधिनियम लागू किया था। दो बार प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह का गुरुवार 26 दिसंबर को 92 वर्ष की आयु में नई दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। उनके निधन से आरटीआई कार्यकर्ता दुखी हैं। बता दें कि आरटीआई अधिनियम ने नागरिकों को 10 रुपये के भुगतान पर सरकार से जानकारी मांगने की शक्ति दी। इससे सरकारी कामकाज में गोपनीयता समाप्त हो गई।
देश के पहले मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह ने मनमोहन सिंह के निधन पर कहा, "उन्होंने मुझे बताया कि वह सरकारी कामकाग आरटीआई के प्रभाव के बारे में थोड़ा अनिश्चित थे। वे एक सच्चे नौकरशाह थे। वे सरकार की गोपनीयता को समझते थे, इसलिए वह थोड़ा आशंकित थे।" उन्होंने आगे कहा कि मनमोहन सिंह को यकीन था कि केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) का नेतृत्व सिविल सेवा के एक व्यक्ति द्वारा किया जाना चाहिए, क्योंकि वह सरकार की कार्यप्रणाली को समझता है। उसे मालूम है कि जानकारी का खुलासा कैसे करना है और किस तरह की जानकारी को छिपाना है। हबीबुल्लाह ने बताया कि इससे सहमति और असहमति दोनो थी, लेकिन मनमोहन सिंह जवाबदेही और पारदर्शिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर अटल थे।
आरटीआई के कारण राज्य के साथ नागरिकों के संबंधों में मौलिक बदलाव आया
आरटीआई अधिनियम को आकार देने वाले प्रमुख लोगों में नौकरशाह से कार्यकर्ता बनीं अरुणा रॉय का भी नाम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून को सबसे महत्वपूर्ण में से एक गिना जाएगा, क्योंकि इससे राज्य के साथ नागरिकों के संबंधों में मौलिक बदलाव आया है। अरुणा रॉय ने बताया कि आरटीआई समेत कई कानूनों पर मनमोहन सिंह के साथ उनकी बातचीत हुई। मनमोहन सिंह हमेशा भारत में पारदर्शिता का युग लाने के लिए प्रतिबद्ध थे।
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आरटीआई कार्यकर्ताओं ने दी प्रतिक्रिया
पूर्व सूचना आयुक्त और आरटीआई कार्यकर्ता शैलेश गांधी ने कहा, "मनमोहन सिंह ने आरटीआई कानून लाकर बहुत अच्छा काम किया। हम इसके लिए हमेशे उनके आभारी रहेंगे।" आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक ने कहा कि यह अधिनियम मनमोहन सिंह के पहले कार्यकाल के दौरान पारित किया गया था। आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने कहा कि इस अधिनियम ने लोकतांत्रिक ढांचे में सत्ता के पुनर्वितरण के महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत की।
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देश के पहले मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह ने मनमोहन सिंह के निधन पर कहा, "उन्होंने मुझे बताया कि वह सरकारी कामकाग आरटीआई के प्रभाव के बारे में थोड़ा अनिश्चित थे। वे एक सच्चे नौकरशाह थे। वे सरकार की गोपनीयता को समझते थे, इसलिए वह थोड़ा आशंकित थे।" उन्होंने आगे कहा कि मनमोहन सिंह को यकीन था कि केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) का नेतृत्व सिविल सेवा के एक व्यक्ति द्वारा किया जाना चाहिए, क्योंकि वह सरकार की कार्यप्रणाली को समझता है। उसे मालूम है कि जानकारी का खुलासा कैसे करना है और किस तरह की जानकारी को छिपाना है। हबीबुल्लाह ने बताया कि इससे सहमति और असहमति दोनो थी, लेकिन मनमोहन सिंह जवाबदेही और पारदर्शिता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर अटल थे।
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आरटीआई के कारण राज्य के साथ नागरिकों के संबंधों में मौलिक बदलाव आया
आरटीआई अधिनियम को आकार देने वाले प्रमुख लोगों में नौकरशाह से कार्यकर्ता बनीं अरुणा रॉय का भी नाम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून को सबसे महत्वपूर्ण में से एक गिना जाएगा, क्योंकि इससे राज्य के साथ नागरिकों के संबंधों में मौलिक बदलाव आया है। अरुणा रॉय ने बताया कि आरटीआई समेत कई कानूनों पर मनमोहन सिंह के साथ उनकी बातचीत हुई। मनमोहन सिंह हमेशा भारत में पारदर्शिता का युग लाने के लिए प्रतिबद्ध थे।
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आरटीआई कार्यकर्ताओं ने दी प्रतिक्रिया
पूर्व सूचना आयुक्त और आरटीआई कार्यकर्ता शैलेश गांधी ने कहा, "मनमोहन सिंह ने आरटीआई कानून लाकर बहुत अच्छा काम किया। हम इसके लिए हमेशे उनके आभारी रहेंगे।" आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक ने कहा कि यह अधिनियम मनमोहन सिंह के पहले कार्यकाल के दौरान पारित किया गया था। आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने कहा कि इस अधिनियम ने लोकतांत्रिक ढांचे में सत्ता के पुनर्वितरण के महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत की।
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