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मनमोहन ने दिखाया 56 इंच का सीना, स्थाई समिति में घबराए उर्जित पटेल का किया बचाव
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
Updated Thu, 19 Jan 2017 10:54 AM IST
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- फोटो : file photo
नोट बंदी के फैसले को संगठित लूट करार दे कर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोल चुके पूर्व प्रधानमंत्री ने बुधवार को संसद की वित्त मामलों की समिति की बैठक में अपने नरम रुख से सबको चौंकने पर मजबूर हो गया। मनमोहन ने समिति के समक्ष पेश हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर उर्जित पटेल को कई ऐसे कड़े और चुनिंदा सवालों का जवाब देने से बचने की सलाह दे डाली, जिससे विपक्ष सरकार को घेर सकता था। हालांकि इनमें से कुछ सवाल ऐसे भी थे जिसके जवाब आने से आरबीआई के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती थीं।
गौरतलब है कि मनमोहन सिंह पहले खुद आरबीआई गवर्नर रह चुके हैं और उस पद की गरिमा के साथ ही उससे जुड़ी जिम्मेदारियों को बखूबी समझते हैं। कमेटी के एक सदस्य के मुताबिक मनमोहन सिंह ने उर्जित पटेल की मानसिक स्थिति को समझते हुए उनके बचाव में उतरे।
दरअसल कमेटी के समक्ष पेश हुए पटेल से एक सांसद ने जब यह पूछा कि क्या अगर रकम निकालने की मौजूदा सीमा हटा ली जाती है तो इससे अव्यवस्था खत्म हो जाएगी? इस पर पटेल कुछ बोलते इससे पहले ही पूर्व पीएम ने उन्हें इस सवाल को टाल देने की सलाह दी। मनमोहन ने पटेल से कहा कि उन्हें ऐसे सवाल का जवाब देने से बचना चाहिए जो भविष्य में परेशानी का कारण बन जाए।
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इसके बाद पटेल ने इन सवालों का सीधा जवाब न देते हुए बीच का रास्ता अपनाया। उन्होंने समिति को बताया कि नोट बंदी की घोषणा के बाद 9.2 लाख करोड़ की नई करेंसी आ चुकी है। इस दौरान पटेल ने इस सवाल का भी कोई जवाब नहीं दिया कि अब तक बैंकों में कितनी नई करेंसी जमा हुई है।
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गौरतलब है कि मनमोहन सिंह पहले खुद आरबीआई गवर्नर रह चुके हैं और उस पद की गरिमा के साथ ही उससे जुड़ी जिम्मेदारियों को बखूबी समझते हैं। कमेटी के एक सदस्य के मुताबिक मनमोहन सिंह ने उर्जित पटेल की मानसिक स्थिति को समझते हुए उनके बचाव में उतरे।
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दरअसल कमेटी के समक्ष पेश हुए पटेल से एक सांसद ने जब यह पूछा कि क्या अगर रकम निकालने की मौजूदा सीमा हटा ली जाती है तो इससे अव्यवस्था खत्म हो जाएगी? इस पर पटेल कुछ बोलते इससे पहले ही पूर्व पीएम ने उन्हें इस सवाल को टाल देने की सलाह दी। मनमोहन ने पटेल से कहा कि उन्हें ऐसे सवाल का जवाब देने से बचना चाहिए जो भविष्य में परेशानी का कारण बन जाए।
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इसके बाद पटेल ने इन सवालों का सीधा जवाब न देते हुए बीच का रास्ता अपनाया। उन्होंने समिति को बताया कि नोट बंदी की घोषणा के बाद 9.2 लाख करोड़ की नई करेंसी आ चुकी है। इस दौरान पटेल ने इस सवाल का भी कोई जवाब नहीं दिया कि अब तक बैंकों में कितनी नई करेंसी जमा हुई है।
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आरबीआई ने नहीं बताया बैंको में कितने पुराने नोट जमा हुए
उर्जित पटेल
पटेल ने बैंकों में जमा किए गए 500 के पुराने नोट और 1000 के नोटों की मात्रा का भी कोई जवाब नहीं दिया। समिति के सदस्य के मुताबिक पूरी बैठक के दौरान मनमोहन ने तीन बार पटेल को सवालों का जवाब देने से बचने की सलाह दी। मनमोहन के इस रुख से हैरानी स्वाभाविक है।
क्योंकि खुद उन्होंने नोट बंदी के फैसले को न सिर्फ संगठित लूट बताया था, बल्कि यह भी कहा था कि इस फैसले के कारण विकास दर में दो फीसदी तक की कमी आ सकती है। समिति के मुख्य सदस्यों में कांग्रेस की ओर से मनमोहन सिंह और दिग्विजय सिंह राज्यसभा की तरफ से शामिल हैं।
गौरतलब है कि उर्जित को वित्त संबंधी स्थाई समिति के बाद अब शुक्रवार को संसद की लोकलेखा समिति के समक्ष पेश होना है। पीएसी के मुखिया थॉमस पहले ही यह कह कर विवाद खड़ा कर चुके हैं कि अगर उर्जित पीएसी के समक्ष संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए तो पीएसी के पास प्रधानमंत्री को भी तलब करने का अधिकार है। हालांकि सच्चाई यह है कि इसके लिए जब तक पीएसी के सभी सदस्य राजी नहीं होते तब तक पीएम को तलब नहीं किया जा सकता।
क्योंकि खुद उन्होंने नोट बंदी के फैसले को न सिर्फ संगठित लूट बताया था, बल्कि यह भी कहा था कि इस फैसले के कारण विकास दर में दो फीसदी तक की कमी आ सकती है। समिति के मुख्य सदस्यों में कांग्रेस की ओर से मनमोहन सिंह और दिग्विजय सिंह राज्यसभा की तरफ से शामिल हैं।
गौरतलब है कि उर्जित को वित्त संबंधी स्थाई समिति के बाद अब शुक्रवार को संसद की लोकलेखा समिति के समक्ष पेश होना है। पीएसी के मुखिया थॉमस पहले ही यह कह कर विवाद खड़ा कर चुके हैं कि अगर उर्जित पीएसी के समक्ष संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए तो पीएसी के पास प्रधानमंत्री को भी तलब करने का अधिकार है। हालांकि सच्चाई यह है कि इसके लिए जब तक पीएसी के सभी सदस्य राजी नहीं होते तब तक पीएम को तलब नहीं किया जा सकता।