फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Manmohan Singh had put the government at stake for the 2008 nuclear deal

मनमोहन सिंह: ऐसी शख्सियत...जिनकी खामोशी भी बोलती थी; परमाणु समझौते के लिए सरकार को लगा दिया था दांव पर

Fri, 27 Dec 2024 05:54 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 27 Dec 2024 05:54 AM IST
सार

आधुनिक भारत में खुली अर्थव्यवस्था के सूत्रधार डॉ. मनमोहन सिंह ने 1991 में कांग्रेस की पीवी नरसिंह राव सरकार में बतौर वित्त मंत्री देश को आर्थिक संकट से निकाला था। मनमोहन लगातार दो बार प्रधानमंत्री रहे। 2004 से 2014 तक देश में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की कमान संभाली। वह प्रधानमंत्री पद संभालने वाले पहले सिख थे।

विज्ञापन
Manmohan Singh had put the government at stake for the 2008 nuclear deal
Manmohan Singh - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह...भारतीय राजनीति की ऐसी शख्सियत जो बेहद कम बोलते थे। मगर जब बोलते, तो बेहद मजबूती से। हालात कैसे भी विषम हों, हालात कितने भी विकट हों, वे चुपचाप हल निकाल लेते थे। 1991 में देश आर्थिक संकटों से घिरा तो भारत की अर्थव्यवस्था को दुनिया के निवेशकों के लिए खोलकर आर्थिक क्रांति ला दी। जिनकी खामोशी भी बोलती थी...अब वह शख्सियत हमेशा के लिए मौन हो गई। मनमोहन सिंह (92) ने दिल्ली एम्स में बृहस्पतिवार रात अंतिम सांस ली। मनमोहन सिंह ऐसे नेता थे जिन्होंने परमाणु समझौते के लिए सरकार को दांव पर लगा दिया था।

विज्ञापन

 

मनमोहन के निधन की सूचना मिलते ही कर्नाटक के बेलगावी में चल रही कांग्रेस कार्यसमिति और अगले सात दिन तक के सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत बड़े नेता दिल्ली पहुंच गए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री व भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व  सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी एम्स पहुंचे। बाद में, एम्स ने उनके निधन की सूचना देते हुए बयान जारी किया। बयान के मुताबिक, डॉ. सिंह का उम्र संबंधित समस्याओं का इलाज किया जा रहा था। बृहस्पतिवार रात वह घर पर अचेत हो गए। रात 8:06 बजे उन्हें दिल्ली एम्स की इमरजेंसी में लाया गया। उन्हें होश में लाने के तमाम प्रयास किए गए, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। रात 9:51 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। देर रात डॉ. सिंह की पार्थिव देह उनके आवास 3, मोतीलाल नेहरू मार्ग ले जाई गई।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

आधुनिक भारत में खुली अर्थव्यवस्था के सूत्रधार डॉ. मनमोहन सिंह ने 1991 में कांग्रेस की पीवी नरसिंह राव सरकार में बतौर वित्त मंत्री देश को आर्थिक संकट से निकाला था। मनमोहन लगातार दो बार प्रधानमंत्री रहे। 2004 से 2014 तक देश में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की कमान संभाली। वह प्रधानमंत्री पद संभालने वाले पहले सिख थे। जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और नरेंद्र मोदी के बाद सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद संभालने का रिकॉर्ड भी डॉ. सिंह के नाम ही है। उनके परिवार में पत्नी गुरशरण कौर और तीन बेटियां उपिंदर, दमन और अमृत सिंह हैं।  
 

विज्ञापन

मनमोहन के मायने...क्रांतिकारी बदलाव वाले कानूनाें को श्रेय
आज जिन कानूनों को देश में क्रांतिकारी बदलाव का वाहक माना जाता है, उन सभी की शुरुआत मनमोहन सरकार ने की थी। फिर चाहे वह शिक्षा या सूचना का अधिकार हो, आधार, मनरेगा या ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन हो, सभी  मनमोहन सिंह की देन हैं।
 

परमाणु समझौते के लिए सरकार को लगाया दांव पर
2008 में उन्होंने वाम दलों के कड़े विरोध के बावजूद अमेरिका के साथ ऐतिहासिक असैन्य परमाणु समझौता किया और सरकार को दांव पर लगा दिया था, लेकिन सपा के समर्थन से उनकी सरकार बच गई।
 

इसलिए याद आएंगे

  •  1990 : चंद्रशेखर की सरकार के समय गिरवी रखा गया देश का सोना 1991-96 में बतौर वित्त मंत्री रहते वापस लाए। इससे दुनिया में भारत की साख बहाल हुई।
  •  2005 : सेल्स टैक्स की जगह मूल्य वर्धित कर (वैट) लागू किया।
  •  2008 : छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कीं। इससे सरकारी कर्मचारियों को ज्यादा पैसा मिला। यही पैसा बाजार में गया। इससे देश को वैश्विक मंदी से निबटने में मदद मिली।
  •  2011 : देश की जीडीपी विकास दर 8.5 फीसदी पहुंच गई। इसने पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींचा और बड़े निवेशकों का भरोसा भारत पर बढ़ा।

 


आरबीआई गवर्नर, योजना आयोग के प्रमुख के रूप में छोड़ी छाप
पश्चिम पंजाब (अब पाकिस्तान) के गाह में जन्मे मनमोहन सिंह का परिवार 1947 में बंटवारे के समय भारत आया था। मनमोहन ने ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट किया। 1966 से 1969 तक संयुक्त राष्ट्र में काम किया।

1971 में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में सलाहकार नियुक्ति के साथ बतौर ब्यूरोक्रेट उनके कॅरिअर की शुरुआत हुई। 1970-80 के दशक में डॉ. सिंह ने मुख्य आर्थिक सलाहकार, आरबीआई गवर्नर व योजना आयोग के प्रमुख सहित कई प्रमुख पद संभाले।

इसी दौरान, पीवी नरसिंह राव की निगाह में आए, जिन्होंने 1991 में पीएम बनते ही सिंह को अपना वित्तमंत्री नियुक्त कर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का काम सौंप दिया।
 

कद्दावर प्रणब पर पड़े भारी
बतौर वित्त मंत्री दुनियाभर में प्रतिष्ठा अर्जित करने के बाद मनमोहन गांधी परिवार के भी करीबी हो गए। 2004 में यूपीए सरकार में दिवंगत प्रणब मुखर्जी के अलावा कई हस्तियां प्रधानमंत्री पद की दौड़ में थीं। तब सोनिया गांधी ने मनमोहन पर भरोसा जताया। मनमोहन इस तरह लालबहादुर शास्त्री व नरसिंह राव के बाद गांधी परिवार से इतर कांग्रेस के तीसरे प्रधानमंत्री बने। 2009 में लगातार दूसरी बार पीएम बने।


विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed