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Manipur: आदिवासी संगठनों ने एक दिन के विधानसभा सत्र का किया विरोध, कहा- कुकी विधायकों के अनुकूल नहीं माहौल

Sun, 27 Aug 2023 11:04 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 27 Aug 2023 11:04 PM IST
सार

Manipur: जनजातीय एकता समिति (सीओटीयू) और स्वदेशी जनजातीय नेता मंच (आईटीएलएफ) ने 29 अगस्त को मणिपुर विधानसभा का सत्र बुलाने की निंदा की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति कुकी विधायकों के भाग लेने के अनुकूल नहीं है। 

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Manipur tribal organisations oppose one-day assembly session
Manipur Legislative Assembly

विस्तार

जनजातीय एकता समिति (सीओटीयू) और स्वदेशी जनजातीय नेता मंच (आईटीएलएफ) ने 29 अगस्त को मणिपुर विधानसभा का सत्र बुलाने की निंदा की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति कुकी विधायकों के भाग लेने के अनुकूल नहीं है। 

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दोनो संगठनों ने रविवार को एक संयुक्त बयान में कहा कि कानून और व्यवस्था के पूरी तरह से ध्वस्त होने और आम लोगों व अधिकारियों के जीवन की रक्षा करने में राज्य सरकार की विफलता को देखते हुए सत्र बुलाना तर्क और तर्कसंगतता से रहित है। 

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मणिपुर विधानसभा की कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) ने शनिवार को मंगलवार को एक दिवसीय सत्र आयोजित करने का फैसला किया था। मई में शुरू हुई जातीय हिंसा के कारण इंफाल घाटी में सौ से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और हजारों घरों को नष्ट कर दिया गया है। यहां तक कि मंत्रियों और विधायकों के जान-माल को भी नहीं बख्शा गया। 

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उन्होंने कहा, 'अगर राज्य सरकार वास्तव में सामान्य स्थिति वापस लाने के बारे में चिंतित है, तो उसे नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए और अच्छे के लिए इस्तीफा दे देना चाहिए। यह अच्छी तरह से जानते हुए भी कि राज्य की एक बड़ी आबादी के प्रतिनिधि भाग लेने में सक्षम नहीं होंगे, विधानसभा सत्र के लिए मजबूर करना केवल अनैतिक है, बल्कि यह प्रभावशाली समुदाय के गुप्त उद्देश्य को भी उजागर करता है।'

मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता ओकराम इबोबी सिंह ने शनिवार को कहा था कि यह सत्र छलावा है और जनहित में नहीं है। उन्होंने कहा, 'मैंने बीएसी की बैठक में भाग लिया और मुझे पता चला कि सत्र सिर्फ एक दिन के लिए होगा। चूंकि 2 सितंबर से पहले सत्र आयोजित करना संवैधानिक बाध्यता है, इसलिए मंगलवार का सत्र बुलाया गया है।' ओकराम ने कहा, 'मेरा अनुभव है कि जिस दिन श्रद्धांजलि दी जाती है, उस दिन किसी अन्य कार्य पर चर्चा नहीं की जाती।'

उन्होंने कहा, 'समिति के सदस्य के रूप में मैंने सुझाव दिया कि राज्य में अभूतपूर्व स्थिति पर चर्चा करने के लिए सत्र कम से कम पांच दिनों के लिए आयोजित किया जाना चाहिए। विपक्ष के पास सिर्फ चार या पांच सदस्य हैं। हम यहां सरकार की आलोचना करने नहीं आए हैं, बल्कि जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने आए हैं।'

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