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मणिपुर विशेष : गहरा सकता है राजनीतिक संकट, शांति बहाली को धक्का, कुकी विधायकों पर समुदाय का बढ़ रहा है दबाव
Sat, 13 May 2023 02:39 AM IST
Jeet Kumar
एन. अर्जुन, गुवाहाटी
एन. अर्जुन, गुवाहाटी
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 13 May 2023 02:39 AM IST
सार
मांग पत्र में अपने ही सरकार पर जिस तरह के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, वह वर्तमान स्थिति को और गंभीर बना देता है। आने वाले दिनों में राज्य में राजनीतिक संकट सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : social media
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विस्तार
हिंसाग्रस्त मणिपुर में शुक्रवार को उस समय राजनीतिक उबाल आ गया जब प्रदेश के 10 कुकी विधायकों ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए अलग राज्य से अलग होेने की मांग कर दी। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें आठ भाजपा के विधायक हैं। मांग पत्र में अपने ही सरकार पर जिस तरह के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, वह वर्तमान स्थिति को और गंभीर बना देता है। आने वाले दिनों में राज्य में राजनीतिक संकट सकता है।
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इससे राज्य में शांति बहाली की जो कोशिशें को धक्का लगा है और उसका समय अब और लंबा होगा। सेना और सुरक्षाबलों को अब और सतर्क होना होगा। क्योंकि कुकी विधायकों ने मामले को शांत करने की दिशा में कदम उठाने की बजाए उसमें घी ही डालने का काम किया है। पहले से ही नाराज पहाड़ी जिलों के ट्राइबल अब और उग्र हो सकते हैं। इस बारे में सरकार का पक्ष जानने की कोशिश की लेकिन किसी से बात नहीं हो पाई।
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इस बारे में गुवाहाटी हाइकोर्ट के वरिष्ठ वकील राम प्रसाद कहते हैं, उनकी यह मांग न ही राज्य सरकार स्वीकार करेगी और न ही केंद्र सरकार। यह बहुत ही छोटा राज्य है और इसे और कितने टुकड़ों में बांटा जाएगा। यह असंभव सी बात लगती है। लेकिन इस समय इस तरह का मामला उठाना केवल आग में घी डालने जैसा है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि सबको यह सोचना होगा कि आखिर ऐसे समय में विधायकों ने ऐसी मांग क्यों रखी। कौन लोग हैं इसके पीछे जो मणिपुर को बंटते हुए देखना चाहते हैं।
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इस तरह की मांग केवल लोगों के सामने एक तरह से खुद को महान बनाने की एक पोलिटिक्स मात्र है। हां, यह बिल्कुल सही है कि शांति प्रक्रिया को धक्का लगा है। अब शांति बहाली में समय लगेगा। आने वाले दिनों में हिंसाग्रस्त मणिपुर में काफी राजनीतिक उथल-पुथल होने की संभावना है।
इस बीच, जानकारी मिली है कि दिल्ली में भाजपा हाईकमान मणिपुर की पूरी घटना क्रम पर नजर बनाए हुए है। इसी तरह से एक वरिष्ठ समाजसेवी जो मणिपुर में पिछले करीब 30 वर्षों से काम कर रहे हैं ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, हम पिछले दिनों से देख रहे हैं। मणिपुर जल रहा है। इस आग को शांत करने की जगह कुछ लोग उसे भड़का रहे हैं। खुद भाजपा के विधायक अपनी ही सरकार के विरोध में आ गए। एक तो सरकार में मंत्री भी हैं। इससे क्या संदेश जाएगा प्रदेश के लोगों में। यह वक्त एकजुट होकर शांति बहाली की दिशा में काम करने की है ना कि राजनीति चमकाने की।
एक खास समुदाय में हीरो बनने की। मैं कहना चाहता हूं, केंद्र सरकार इस बात को गौर से देखे कि मांग करने वालों के पीछे कौन है। कौन है जो पर्दे के पीछे से इसे अंजाम दे रहे हैं। यह बहुत ही गंभीर मामला है। ये ड्रग्स पैडलर, ये बॉर्डर के उस पार और इस ओर बैठे विद्रोही और उनके कुछ खास समर्थक। कुछ धर्मिक संगठन के लोग। इतना पैसा, हथियार कहां से आ रहा है। मणिपुर के खिलाफ षड़यंत्र रचा जा रहा है। इसे समय रहते केंद्र और राज्य सरकार को हैंडल करना होगा। अब और भड़क सकती है पहाड़ी जिलों में आग जानकार मान रहे हैं कि क्योंकि कुकी समुदाय के दस विधायकों ने यह मांग रखी है, तो निश्चित ही इसका असर पहाड़ी जिलों, जहां ट्राइबल लोग रहते हैं पर पड़ेगा। उनका साहस बढ़ेगा।
भले ही सरकार शांति बहाली की कोशश कर रही है लेकिन इसमें वक्त लगेगा। उन इलाकों में जो मैतेई लोगों रहते आए हैं, अभी उनकी घर वापसी मुश्किल होगी। मंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, विधायक पद छोड़ सकते हैं बताया जा रहा है कि जिन दस विधायकों अलग राज्य की मांग की है विधायक और मंत्री पद छोड़ सकते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उन पर दवाब है कि अगर सरकार तुरंत कोई फैसला नहीं लेती तो जो सरकार में कुकी समुदाय से मंत्री हैं, वे मंत्री पद छोड़ सकते हैं।
सभी कुकी समुदाय के विधायक भाजपा को भी अलविदा कह सकते हैं। आने वाले दिनों मणिपुर की राजनीति में काफी उथल-पुथल होने की संभावना है। विधायकों ने क्यों की ऐसी मांग बताया जा रहा है कि भाजपा के आठ और दो अन्य विधायकों पर हिंसा शुरू होेने से पहले ही स्थानीय ट्राइबल नेताओं का दवाब था। उन पर ट्राइबल मामलों को सही ढंग से नहीं देख्रने का भी आरोप लगा है। आगजनी भड़कने के बाद कुकी विधायकों पर दवाब और बढ़ गया।
इसलिए उनको आखिर सामने आना पड़ा और ट्राइबल के हक में यह मांग रखनी पड़ी। दवाब साफ दिखाई दे रहा था। शुक्रवार को कुकी विधायकों ने कहा, यह नेतृत्व परिवर्तन की बात नहीं है। हमारे लोगों को मारा गया, घरों को जलाया गया। .हमारे लोग अब मणिपुर के तहत मौजूद नहीं रह सकते हैं। कहा, 'मैतेई के बीच रहना मौत के बराबर है।
मणिपुर की वर्तमान स्थिति
मणिपुर में राजनीतिक संकट गहरा गया है। मणिपुर में इस समय भाजपा के पास 41 विधायकों का समर्थन है। इसमें भाजपा के 32 विधायक, इसके अलावा एक निर्दलीय, जद (यू) के छह विधायक और केपीए के दो विधायकों का समर्थन भाजपा को मिला था। अभी कहा जा रहा है कि कुछ और विधायक भी इस गुट में शामिल हो सकते हैं।
भाजपा 32
एनपीपी 7
जद (यू) 6
कांग्रेस 5
नगा पीपुल्स फ्रंट 5
केपीए 2
निर्दलीय 3