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Manipur: शाह बोले- मणिपुर में जल्द से जल्द शांति बहाल करने, पीड़ितों के पुनर्वास का काम कर रही है सरकार

Thu, 03 Apr 2025 10:33 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 03 Apr 2025 10:33 PM IST
सार

Amit Shah:  केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि कहा कि हिंसा होनी ही नहीं चाहिए और जातीय हिंसा को किसी पार्टी के साथ नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा इस प्रकार की तस्वीर पेश करने का प्रयास किया गया कि हमारे शासन में ही जातीय हिंसा हुई है।

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Manipur: Shah says government is working to restore peace in Manipur as soon as possible rehabilitate victims
गृह मंत्री अमित शाह - फोटो : संसद टीवी

विस्तार

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोक सभा में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के अनुमोदन के लिए प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए अमित शाह ने कहा, उच्च न्यायालय के एक फैसले के कारण मणिपुर के दो समुदायों के बीच आरक्षण संबंधी विवाद के कारण जातीय हिंसा शुरू हुई थी। उन्होंने कहा कि न तो यह दंगे हैं और न ही आतंकवाद है, बल्कि हाई कोर्ट के एक फैसले की व्याख्या के कारण दो समुदायों के बीच जातीय हिंसा है। शाह ने कहा कि दिसंबर 2024 से लेकर अबतक पिछले 4 महीनों से मणिपुर में हिंसा नहीं हुई है। शिविरों में पहले से ही खाने-पीने, दवाइयों, चिकित्सा सुविधाओं आदि को सुनिश्चित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि तकनीकी और मेडिकल शिक्षा की ऑनलाइन व्यवस्था हो चुकी है और प्राइमरी एजुकेशन के लिए कैंपों के अंदर ही वर्ग लगाए गए हैं, जहाँ उनकी पढ़ने की व्यवस्था की गई है।
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अमित शाह ने कहा कि कहा कि हिंसा होनी ही नहीं चाहिए और जातीय हिंसा को किसी पार्टी के साथ नहीं जोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा इस प्रकार की तस्वीर पेश करने का प्रयास किया गया कि हमारे शासन में ही जातीय हिंसा हुई है। उन्होंने सदन को बताया कि मणिपुर में 1993 में जातीय हिंसा हुई, 1993 से 1998 तक नागा-कुकी संघर्ष हुआ, जिसमें 750 मौतें हुईं और छिटपुट घटनाएं एक दशक तक चलती रहीं। श्री शाह ने कहा कि हम मानते हे कि हमारे समय में ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए, लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण फैसला आया, जिसके कारण हिंसा हुई और उसे तत्काल नियंत्रण में लाया गया। 
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शाह ने कहा कि हिंसा में जो 260 मौतें हुई हैं उनमें से 80 प्रतिशत पहले एक महीने के अंदर हुईं जबकि बाकी मौतें बाद के महीनों में हुईं। उन्होंने कहा कि 1997-98 में कुकी-पाइते संघर्ष हुआ, जिसमें 50 से अधिक गांव नष्ट हुए, 40 हज़ार लोग विस्थापित हुए, 352 लोग मारे गए, सैकड़ों घायल हुए और 5 हज़ार घर जलाए गए। उन्होंने कहा कि 1993 में 6 माह तक चले मैतेई-पंगल संघर्ष में 100 से अधिक मृत्यु हुईं थीं। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष इस प्रकार की तस्वीर पेश कर रहा है जैसे मणिपुर में ये पहली हिंसा हो और हमारा शासन विफल हो गया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के शासन में 1993 के बाद मणिपुर में हुईं तीन बड़ी जातीय हिंसाएं हुई जो 10 साल, 3 साल और 6 माह तक चलीं और इनमें सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा कि इन हिंसाओं के बाद तत्कालीन सरकार से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री समेत वहां कोई नहीं गया।
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केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 2017 में हमारी सरकार आई और उससे पहले पिछली सरकार के शासन में जातीय हिंसा के बिना भी 5 साल में औसतन एक साल में 212 दिन मणिपुर बंद रहा। उन्होंने कहा कि लगभग 1 हजार से अधिक एनकाउंटर हुए, जिनका संज्ञान सुप्रीम कोर्ट को लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश से पहले, हमारे 6 साल के शासन में मणिपुर में एक भी दिन बंद और ब्लॉकेड नहीं रहा और न ही हिंसा हुई। श्री शाह ने कहा कि एक विशिष्ट परिस्थिति में जब हाई कोर्ट के एक फैसले की व्याख्या को दोनों समुदायों ने अपने खिलाफ समझा तो दो ही दिन में हिंसा भड़क गई।

विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि मणिपुर की हिंसा को नज़रअंदाज़ किया गया। शाह ने सदन को बताया कि जिस दिन हाई कोर्ट का आदेश आया था, उसी दिन सुरक्षाबलों की कंपनियां वायु सेना के विमान से वहां रवाना कर दी गईं थीं। श्री शाह ने कहा कि इस विषय पर हम सबकी संवेदनाएं बराबर हैं। गृह मंत्री ने सभी सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि सरकार मणिपुर में शांति स्थापित के लिए हरसंभव उच्चतम प्रयास कर रही है और इसका राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मणिपुर हिंसा में जिनकी भी मृत्यु हुई है, इस सदन को उनके प्रति सम्मान, संवेदना और मन में दर्द रखना चाहिए।

अमित शाह ने कहा कि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन आने के बाद दोनों समुदायों से चर्चा हुई और दोनों समुदायों के सभी संगठनों के साथ अलग-अलग दो बैठकें भी हुई हैं और जल्द ही गृह मंत्रालय द्वारा एक संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार हिंसा का रास्ता ढूंढने का प्रयास कर रही है लेकिन पहली प्राथमिकता शांति स्थापित करने की है। श्री शाह ने कहा कि 4 माह से मणिपुर में एक भी मौत नहीं हुई है, सिर्फ 2 लोग घायल हुए हैं और कुल मिलकर परिस्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि स्थिति संतोषजनक तब तक नहीं होगी जब तक विस्थापित लोग शिविरों में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि विस्थापितों के लिए एक पुनर्वास पैकेज पर भी चर्चा चल रही है ।


केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और फिर राज्यपाल ने भाजपा के 37, एनपीपी के 6, एनपीएफ के 5, जद (यू) के 1 और कांग्रेस के 5 सदस्यों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जब अधिकतर सदस्यों ने कहा कि हम सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हैं, तब कैबिनेट ने राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा की, जिसे राष्ट्रपति महोदया ने स्वीकार किया। श्री शाह ने कहा कि सरकार चाहती है कि मणिपुर में जल्द से जल्द शांति बहाल हो, पुनर्वास हो और जख्मों पर मरहम भी लगाया जाए। गृह मंत्री ने सभी सदस्यों से मणिपुर में राष्ट्रपति शासन का अनुमोदन करने का अनुरोध किया।
 
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