Manipur: जातीय हिंसा के बाद लोकसभा चुनाव के लिए सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त, 1319 में से 70 मतदान केंद्र संवेदनशील
आंतरिक मणिपुर सीट पर भाजपा के राज्य शिक्षा मंत्री थौनाओजम बसंत कुमार सिंह और कांग्रेस के अंगोमचा बिमोल अकोइजाम के बीच मुख्य मुकाबला है। हालांकि, यहां से कुल छह उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे हैं।
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जातीय हिंसा से पीड़ित मणिपुर में लोकसभा चुनाव हो रहे हैं। मणिपुर में दो लोकसभा सीटें हैं, जिसमें से एक सीट पर कल मतदान होंगे। मतदान की तैयारियों के बारे में अधिकारी ने बताया कि पहले चरण के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था कर दी गई है। सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद हैं।
गौरतलब है कि आंतरिक मणिपुर के दोनों संसदीय क्षेत्रों के अंदर 60 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। पहले चरण में आंतरिक मणिपुर की 32 तो बाहरी मणिपुर की 15 विधानसभा सीटों पर शुक्रवार को मतदान होगा। बाकी 13 विधानसभा सीटें दूसरे लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं, जहां 26 अप्रैल को मतदान होगा।
वोटिंग सुबह सात बजे शुरू होगी, 70 मतदान केंद्र संवेदनशील
आंतरिक मणिपुर सीट पर भाजपा के राज्य शिक्षा मंत्री थौनाओजम बसंत कुमार सिंह और कांग्रेस के अंगोमचा बिमोल अकोइजाम के बीच मुख्य मुकाबला है। हालांकि, यहां कुल छह उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी टीएच किरणकुमार ने कहा कि वोटिंग सुबह सात बजे शुरू होगी और शाम चार बजे तक चलेगी। इनर मणिपुर में कुल 9.91 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। उन्होंने कहा कि संघर्ष के कारण विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए 29 विशेष मतदान केंद्रों के अलावा, आंतरिक मणिपुर में 1,319 मतदान केंद्रों पर मतदान होगा। इंफाल पश्चिम जिले के 70 मतदान केंद्रों की पहचान संवेदनशील के रूप में हुई है। एहतियातन वहां केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती सहित पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
मणिपुर में हुई हिंसा का यह है कारण
राज्य में मैतेई समुदाय के लोगों की संख्या करीब 60 प्रतिशत है। ये समुदाय इंफाल घाटी और उसके आसपास के इलाकों में बसा हुआ है। समुदाय का कहना रहा है कि राज्य में म्यांमार और बांग्लादेश के अवैध घुसपैठियों की वजह से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, मौजूदा कानून के तहत उन्हें राज्य के पहाड़ी इलाकों में बसने की इजाजत नहीं है। यही वजह है कि मैतेई समुदाय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें जनजातीय वर्ग में शामिल करने की गुहार लगाई थी। अदालत में याचिकाकर्ता ने कहा कि 1949 में मणिपुर की रियासत के भारत संघ में विलय से पहले मैतेई समुदाय को एक जनजाति के रूप में मान्यता थी। इसी याचिका पर बीती 19 अप्रैल को हाईकोर्ट ने अपना फैसले सुनाया। इसमें कहा गया कि सरकार को मैतेई समुदाय को जनजातीय वर्ग में शामिल करने पर विचार करना चाहिए। साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इसके लिए चार हफ्ते का समय दिया। अब इसी फैसले के विरोध में मणिपुर में हिंसा हो रही है।