दावा: उपद्रवियों के पास लूट के 3000 हथियार, 19 पुलिस थानों को AFSPA से छूट बढ़ाएगी दो समुदायों के बीच दूरी
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विस्तार
मणिपुर में तीन मई से शुरू हुई हिंसा थमने का नाम ही नहीं ले रही है। सोशल मीडिया पर कई तरह की तस्वीरें/वीडियो देखने को मिल रहे हैं। कहीं पर तो सुरक्षा बलों का रास्ता रोकती हुई महिलाएं नजर आती हैं, तो दूसरी ओर किसी स्टूडेंट की सुरक्षा कर्मियों द्वारा की गई पिटाई का वीडियो वायरल हो रहा है। किसी जगह पर दो बच्चों को मार दिया जाता है। इन सबके बीच मणिपुर में फिर से आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट 'आफस्पा' लगा दिया गया है। हालांकि 19 पुलिस थानों के तहत आने वाले क्षेत्रों को 'आफस्पा' से बाहर रखा गया है।
सुरक्षा विशेषज्ञ एवं बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद कहते हैं, ये ठीक नहीं है। अगर सरकार, मणिपुर में ठोस इच्छाशक्ति से शांति और कानून का शासन स्थापित करना चाहती है, तो उसे वहां पर राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए। इससे बेहतर विकल्प कुछ नहीं है। 19 पुलिस थानों के क्षेत्रों में 'आफस्पा' न लगाने का मतलब, सरकार कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर गंभीर नहीं है। अभी तो राज्य में तीन हजार से ज्यादा घातक हथियार, उपद्रवियों के हाथ में हैं। इनमें से अधिकांश हथियार, घाटी के इलाकों में बताए जाते हैं। अब घाटी के ही ज्यादातर क्षेत्रों को 'आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर एक्ट' से बाहर कर दिया है।
केंद्रीय बलों को फ्री हैंड देना बहुत जरूरी
एसके सूद बताते हैं, इसका मतलब तो यही हुआ कि घाटी में कानून व्यवस्था पटरी पर लाने के प्रति सरकार गंभीर नहीं है। घाटी में मैतेई समुदाय के लोगों की बहुलता है। उस इलाके को 'आफस्पा' से बाहर क्यों रखा गया है। मणिपुर में लूटे गए करीब सत्तर फीसदी हथियार, घाटी में बताए जाते हैं। तीस फीसदी हथियार, पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों के पास हैं। अभी तक दोनों ही जगहों से वे हथियार बरामद नहीं हो सके हैं। राज्य सरकार, लोगों से अपील कर रही है कि वे लूट गए हथियार जमा करा दें। यह अपील मई-जून से ही की जा रही है, लेकिन हथियार जमा नहीं हो सके हैं। अब 19 पुलिस थानों को आफस्पा से छूट देने का मतलब, वहां पर दोनों समुदायों के बीच की दूरी को और ज्यादा बढ़ाना है। घाटी में सुरक्षा बल अपने तरीके से काम नहीं कर सकेंगे। मणिपुर की मौजूदा परिस्थितियों का एक ही समाधान है कि वहां पर अनुच्छेद 356 के तहत राज्य सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाए। जब तक केंद्रीय बलों को फ्री हैंड नहीं दिया जाता, वहां पर शांति व्यवस्था कायम होना बहुत मुश्किल है।
सुरक्षा बलों जैसी वर्दी और वाहन, बड़ी चुनौती
उपद्रवी अब एक नए 'छल' के साथ सामने आ रहे हैं। सुरक्षा बलों की आपस में टकराहट, ये नई बात नहीं है। पहले भी ऐसे मामले आ चुके हैं। मणिपुर पुलिस ने तो असम राइफल के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज कर दी। अब वहां पर एक नया खेल शुरू हुआ है। सुरक्षा बलों के आपसी विश्वास में दरार डालने की कोशिश हो रही है। उपद्रवियों ने अब सुरक्षा बलों जैसी वर्दी पहनना शुरू कर दिया है। असम राइफल्स जैसे ट्रक इस्तेमाल में ला रहे हैं। खासतौर पर दूरवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षा बलों और उपद्रवियों के बीच पहचान करने में दिक्कत आ सकती है। अपराध की वारदातों को अंजाम देने वाले उपद्रवी, उसे सुरक्षा बलों के गले में डाल सकते हैं। इस काम में विभिन्न समूहों से जुड़े, 'विलेज बेस्ड इन्सर्जेंट ग्रुप' लगे हुए हैं। असम राइफल के सामने जब ऐसे कई उदाहरण सामने आए, तो उसके बड़े अधिकारियों ने इस बाबत मणिपुर पुलिस को अवगत कराया है। राज्य में तैनात सुरक्षा बलों के बीच पहले भी टकराव के आसार बनते रहे हैं। कई दफा सुरक्षा बल, एक दूसरे के आमने-सामने आ चुके हैं।
सेना व अर्धसैनिक बलों के जवान मारे गए
पिछले दिनों उपद्रवियों ने भारतीय सेना में सिपाही सर्टो थांगथांग कोम का अपहरण कर लिया था। 16 सितंबर को उनकी हत्या कर दी गई। वह सैनिक छुट्टी पर अपने घर आया हुआ था। सिपाही सर्टो का दस वर्षीय बेटा, आपराधिक वारदात का प्रत्यक्षदर्शी है। 13 सितंबर को मणिपुर पुलिस के एसआई की हत्या कर दी गई। ओंखोमांग हाओकिप, चुराचांदपुर जिले में तैनात था। उपद्रवी स्नाइपर ने उसके सिर में गोली मारी थी। इससे पहले 9 जून को कांगपोकपी जिले के खोकेन गांव में उपद्रवियों ने सेना की वर्दी पहनकर लोगों पर फायर कर दिया। उस वारदात में दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे। जून के पहले सप्ताह में बीएसएफ के जवान रंजीत यादव भी उपद्रवियों की गोली का निशाना बने थे। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के कोबरा कमांडो चोंखोलेन हाओकिप को भी गोली मार दी गई थी।
पांच महीनों से मणिपुर जल रहा है
कांग्रेस पार्टी के सांसद गौरव गोगोई कहते हैं कि पिछले पांच महीनों से मणिपुर जल रहा है। मणिपुर में मासूम युवाओं का अपहरण कर उनकी हत्या की जा रही है। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी अपनी वाहवाही में मस्त हैं। प्रधानमंत्री मोदी, मणिपुर हिंसा को लेकर सर्वदलीय बैठक बुलाएं। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह को अपने पद से इस्तीफा देने का आदेश दें। वहां पर किस तरह से बच्चों और दूसरे लोगों को मारा जा रहा है, सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें और वीडियो बहुत भयावह हैं। इंसाफ के लिए प्रदर्शन कर रहे मणिपुर के छात्रों की आवाज दबाने के लिए उन्हें लाठियों से पीटा जा रहा है। कांग्रेस की मांग है कि मासूम युवाओं की हत्या करने वाले अपराधियों को जल्द से जल्द पकड़ा जाए। गोगोई ने कहा, मणिपुर का दर्द आज पूरा देश महसूस कर रहा है। मणिपुर में लोगों की हत्याएं हो रही हैं। महिलाओं के साथ बर्बरता हो रही है। आर्मी के जवान और पुलिस इंस्पेक्टर की भी हत्या कर दी गई। प्रधानमंत्री ने मणिपुर की जनता के आंसुओं और जनता पर हो रहे अत्याचार को नजरअंदाज कर दिया है।