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Tripura CM Manik Saha: माणिक साहा ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, क्या बाकी राज्यों की तरह त्रिपुरा में भी सफल होगी भाजपा की नीति
Sun, 15 May 2022 01:04 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अगरतला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 15 May 2022 01:04 PM IST
सार
बिप्लब कुमार देब ने शनिवार को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके कुछ घंट के भीतर ही पार्टी की राज्य विधायक दल ने माणिक साहा को नए नेता के तौर पर चुना था।
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माणिक साहा ने त्रिपुरा के सीएम पद की शपथ ली।
- फोटो : ANI
विस्तार
त्रिपुरा के नए मुख्यमंत्री के तौर पर माणिक साहा ने रविवार को शपथ ले ली। उन्हें राजभवन में राज्यपाल सत्यदेव नारायण राय ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसी के साथ राज्य में करीब साढ़े तीन साल तक चले बिप्लब कुमार देब के शासन का अंत हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब समारोह में भाजपा के विधायकों और राज्य के अन्य मंत्रियों के साथ उपस्थित थे।
विरोध करने वाले नेता भी शपथग्रहण में पहुंचे
देब के शनिवार शाम अचानक इस्तीफे के बाद साहा शीर्ष पद पर पहुंचे हैं। शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक भी शामिल हुईं। उपमुख्यमंत्री जिष्णु देव वर्मा और मंत्री राम प्रसाद पॉल ने शनिवार को भाजपा विधायक दल की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के रूप में साहा की नियुक्ति का विरोध किया था। दोनों शपथ ग्रहण समारोह समाप्त होने के कुछ समय बाद राजभवन पहुंचे। विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के विधायकों ने राज्य में भाजपा के शासन में 'फासीवादी शैली में हिंसा' होने का आरोप लगाते हुए समारोह का बहिष्कार किया।
क्या है भाजपा की नीति?
माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने त्रिपुरा में परोक्ष तौर पर सत्ता विरोधी लहर से पार पाने और पार्टी पदाधिकारियों के बीच किसी भी तरह के असंतोष को दूर करने के एक प्रयास के तहत सीएम बदलने का यह कदम उठाया है। पार्टी ने पहले भी कई राज्यों में यह रणनीति अपनायी थी, जो कि सफल रही। उत्तराखंड में चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री बदलने का दांव सफल रहने के मद्देनजर भाजपा के शीर्ष नेताओं ने त्रिपुरा में भी इसी तरह के बदलाव का विकल्प चुना, जहां अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं।
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भाजपा ने 2019 के बाद से गुजरात और कर्नाटक सहित पांच मुख्यमंत्रियों को बदला है। साहा पूर्वोत्तर से कांग्रेस के ऐसे चौथे पूर्व नेता हैं जो भाजपा में शामिल होने के बाद क्षेत्र में मुख्यमंत्री बनेंगे। यह इसका स्पष्ट संकेत है कि किसी भी नेता का चुनाव-संबंधी मूल्य पार्टी के लिए सर्वोपरि है।
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विरोध करने वाले नेता भी शपथग्रहण में पहुंचे
देब के शनिवार शाम अचानक इस्तीफे के बाद साहा शीर्ष पद पर पहुंचे हैं। शपथ ग्रहण समारोह में केंद्रीय मंत्री प्रतिमा भौमिक भी शामिल हुईं। उपमुख्यमंत्री जिष्णु देव वर्मा और मंत्री राम प्रसाद पॉल ने शनिवार को भाजपा विधायक दल की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के रूप में साहा की नियुक्ति का विरोध किया था। दोनों शपथ ग्रहण समारोह समाप्त होने के कुछ समय बाद राजभवन पहुंचे। विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के विधायकों ने राज्य में भाजपा के शासन में 'फासीवादी शैली में हिंसा' होने का आरोप लगाते हुए समारोह का बहिष्कार किया।
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क्या है भाजपा की नीति?
माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने त्रिपुरा में परोक्ष तौर पर सत्ता विरोधी लहर से पार पाने और पार्टी पदाधिकारियों के बीच किसी भी तरह के असंतोष को दूर करने के एक प्रयास के तहत सीएम बदलने का यह कदम उठाया है। पार्टी ने पहले भी कई राज्यों में यह रणनीति अपनायी थी, जो कि सफल रही। उत्तराखंड में चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री बदलने का दांव सफल रहने के मद्देनजर भाजपा के शीर्ष नेताओं ने त्रिपुरा में भी इसी तरह के बदलाव का विकल्प चुना, जहां अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं।
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भाजपा ने 2019 के बाद से गुजरात और कर्नाटक सहित पांच मुख्यमंत्रियों को बदला है। साहा पूर्वोत्तर से कांग्रेस के ऐसे चौथे पूर्व नेता हैं जो भाजपा में शामिल होने के बाद क्षेत्र में मुख्यमंत्री बनेंगे। यह इसका स्पष्ट संकेत है कि किसी भी नेता का चुनाव-संबंधी मूल्य पार्टी के लिए सर्वोपरि है।