छह महीने के लिए बने मंगलयान मिशन ने पूरे किए पांच साल, अभी और काम करेगा
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मंगलयान मिशन के मंगलवार को पांच साल पूरे हो गए। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के सिवन ने कहा कि शुरुआत में जो मिशन केवल छह महीने के लिए था, उसने मंगल की परिक्रमा के पांच साल पूरे कर लिए। यह कुछ और समय तक जारी रह सकता है।
बीते पांच सालों में मार्स ऑबिर्टर मिशन (एमओएम) ने इसरो को ऑबिर्टर से मिली तस्वीरों से मार्शियन एटलस तैयार करने में मदद की। यह अब भी काम कर रहा है और लगातार तस्वीरें भेज रहा है। इसरो के अधिकारी के मुताबिक, मार्स ऑर्बिटर अब तक दो टेराबाइट की हजारों तस्वीरें भेज चुका है।
बेहद कम लागत थी मंगलयान की
मंगलयान 2 के बारे में पूछे जाने पर सिवन ने कहा कि इस दिशा में काम चल रहा है, लेकिन फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है। गौरतलब है कि मंगलयान की सफलता इसलिए भी अहम है क्योंकि इसकी लागत बेहद कम थी। इसका बजट हॉलीवुड फिल्म ‘ग्रैविटी’ और नासा के मावेन ऑर्बिटर से काफी कम था। मंगलयान के लॉन्च व्हीकल, स्पेसक्राफ्ट और ग्राउंड सेगमेंट की कीमत 450 करोड़ रुपये थी।
मंगलयान मिशन ने रचा था इतिहास
इस मिशन को पांच नवंबर, 2013 को मंगल यात्रा पर भेजा गया था। इसके बाद मंगलयान ने 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुंचकर इतिहास रच दिया था। मंगलयान की सफलता इसलिए भी ऐतिहासिक थी क्योंकि भारत अपने पहले प्रयास में ही मंगल पर पहुंच जाने वाला दुनिया का पहला देश बन गया था। मंगल पर पहुंचने वाले अमेरिका और पूर्व सोवियत संघ जैसे देशों को कई प्रयासों के बाद ये सफलता मिली थी।