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Mangaluru Plane Crash: मंगलूरू विमान हादसे में बचे लोगों ने याद किए भयावह मंजर, साझा किया 15 साल पुराना दर्द
Sat, 14 Jun 2025 03:32 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मंगलूरू
Published by: पवन पांडेय
Updated Sat, 14 Jun 2025 03:32 PM IST
सार
अहमदाबाद विमान हादसे से पहले देश में तमाम विमान हादसों में जिंदा बचे लोग अभी भी उस भयावह मंजर को याद करके सिहर उठते हैं। मंगलूरू विमान हादसे के 15 साल बाद जिंदा बचे लोगों ने अपना दर्द साझा किया है। 22 मई 2010 को दुबई से आ रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट आईएक्स 812 रनवे से फिसलकर खाई में गिर गई थी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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विस्तार
मंगलूरू एयरपोर्ट पर हुए भीषण विमान हादसे को 15 साल हो चुके हैं, लेकिन इस हादसे में बचे लोग अब भी उस दिन को याद कर सिहर उठते हैं। 22 मई 2010 को दुबई से आ रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट आईएक्स 812 रनवे से फिसलकर खाई में गिर गई थी। इस हादसे में 158 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सिर्फ 8 लोग बच पाए थे।
बचाव को मानते चमत्कार हैं जिंदा बचे लोग
हादसे में बचे लोगों में से एक, के. प्रदीप, जो अब एक सिविल कॉन्ट्रैक्टर हैं, हर साल 22 मई को कुलूर पर मौजूद स्मारक पर जाकर मृतकों को श्रद्धांजलि देते हैं। वे फूल चढ़ाते हैं, मौन रखते हैं और मंदिर जाकर भगवान का धन्यवाद करते हैं। उन्होंने बताया, 'ये मेरे माता-पिता के किए गए दान-पुण्य और उनकी दुआओं का असर था कि मैं बच पाया।' एक और जीवित बचे यात्री, उस्मान फारूक, अब एंबुलेंस सेवा में काम करते हैं। उनका मानना है कि खुदा की मेहरबानी से उनकी जान बची। उन्होंने बताया कि जिस हिस्से में वे बैठे थे, वह टूटकर अलग हो गया और वहीं से उन्हें बाहर निकलने का मौका मिला। वे अब अपनी सेवा को लोगों की मदद का जरिया मानते हैं।
यह भी पढ़ें - Plane Crash: 1993 के एयर इंडिया विमान हादसे में बचे व्यक्ति ने सुनाई आपबीती, बोले- भाग्य से बची जान
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जांच में सामने आई बड़ी चूक
इस हादसे की जांच करने वाली डीजीसीए (नागर विमानन महानिदेशालय) ने रिपोर्ट में बताया कि यह हादसा मुख्य रूप से पायलट की गलती से हुआ था। विमान रनवे के करीब 5,200 फीट आगे जाकर उतरा, जबकि रनवे की कुल लंबाई 8,000 फीट थी, जो विमान को रोकने के लिए काफी नहीं थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि लैंडिंग से पहले पायलट कुछ देर के लिए सो रहे थे और लैंडिंग के समय वह पूरी तरह सचेत नहीं थे। सह-पायलट की चेतावनियों और अलार्म सिस्टम को भी नजरअंदाज किया गया।
सिस्टम की भी रही खामियां
जांच में यह भी पाया गया कि एयरपोर्ट पर लगे कुछ ढांचे, जैसे कि लोकलाइजर एंटीना का ढांचा, अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ था और इस वजह से विमान के टकराने पर वह पूरी तरह टूट नहीं पाया, जिससे नुकसान और बढ़ा।
यह भी पढ़ें - Air India Plane Crash: उड्डयन मंत्रालय ने बताई एअर इंडिया विमान हादसे की पूरी कहानी; ब्लैक बॉक्स पर कही यह बात
हादसे के बाद क्या किए गए सुधार?
इस हादसे के बाद डीजीसीए ने कई बड़े एयरपोर्ट्स का सुरक्षा ऑडिट किया और सिविल एविएशन सेफ्टी एडवाइजरी काउंसिल बनाई। टेबलटॉप एयरपोर्ट्स (जैसे कि मंगलूरू) पर सुरक्षा के विशेष उपाय और पायलट ट्रेनिंग सुधारने के निर्देश दिए गए। कुछ सुधार हुए, लेकिन अब भी कई एयरपोर्ट्स में बुनियादी सुविधाओं की कमी चिंता का विषय है।
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बचाव को मानते चमत्कार हैं जिंदा बचे लोग
हादसे में बचे लोगों में से एक, के. प्रदीप, जो अब एक सिविल कॉन्ट्रैक्टर हैं, हर साल 22 मई को कुलूर पर मौजूद स्मारक पर जाकर मृतकों को श्रद्धांजलि देते हैं। वे फूल चढ़ाते हैं, मौन रखते हैं और मंदिर जाकर भगवान का धन्यवाद करते हैं। उन्होंने बताया, 'ये मेरे माता-पिता के किए गए दान-पुण्य और उनकी दुआओं का असर था कि मैं बच पाया।' एक और जीवित बचे यात्री, उस्मान फारूक, अब एंबुलेंस सेवा में काम करते हैं। उनका मानना है कि खुदा की मेहरबानी से उनकी जान बची। उन्होंने बताया कि जिस हिस्से में वे बैठे थे, वह टूटकर अलग हो गया और वहीं से उन्हें बाहर निकलने का मौका मिला। वे अब अपनी सेवा को लोगों की मदद का जरिया मानते हैं।
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जांच में सामने आई बड़ी चूक
इस हादसे की जांच करने वाली डीजीसीए (नागर विमानन महानिदेशालय) ने रिपोर्ट में बताया कि यह हादसा मुख्य रूप से पायलट की गलती से हुआ था। विमान रनवे के करीब 5,200 फीट आगे जाकर उतरा, जबकि रनवे की कुल लंबाई 8,000 फीट थी, जो विमान को रोकने के लिए काफी नहीं थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि लैंडिंग से पहले पायलट कुछ देर के लिए सो रहे थे और लैंडिंग के समय वह पूरी तरह सचेत नहीं थे। सह-पायलट की चेतावनियों और अलार्म सिस्टम को भी नजरअंदाज किया गया।
सिस्टम की भी रही खामियां
जांच में यह भी पाया गया कि एयरपोर्ट पर लगे कुछ ढांचे, जैसे कि लोकलाइजर एंटीना का ढांचा, अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ था और इस वजह से विमान के टकराने पर वह पूरी तरह टूट नहीं पाया, जिससे नुकसान और बढ़ा।
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हादसे के बाद क्या किए गए सुधार?
इस हादसे के बाद डीजीसीए ने कई बड़े एयरपोर्ट्स का सुरक्षा ऑडिट किया और सिविल एविएशन सेफ्टी एडवाइजरी काउंसिल बनाई। टेबलटॉप एयरपोर्ट्स (जैसे कि मंगलूरू) पर सुरक्षा के विशेष उपाय और पायलट ट्रेनिंग सुधारने के निर्देश दिए गए। कुछ सुधार हुए, लेकिन अब भी कई एयरपोर्ट्स में बुनियादी सुविधाओं की कमी चिंता का विषय है।
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