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West Bengal: 51 दिन की काटी सजा, कोर्ट ने शख्स को किया बरी; महिला ने गलतफहमी में दर्ज कराया था दुष्कर्म का केस
Wed, 03 Sep 2025 04:25 PM IST
दीपक कुमार शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Wed, 03 Sep 2025 04:25 PM IST
सार
कोलकाता की अदालत ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी व्यक्ति को बरी कर दिया है। शिकायतकर्ता महिला ने दावा किया कि उसने किसी गलतफहमी के कारण व्यक्ति पर केस दर्ज कराया था।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
विस्तार
पश्चिम बंगाल के एक व्यक्ति ने दुष्कर्म के मामले में महिला की गलतफहमी के कारण 51 दिन जेल में बिताए। जब शिकायतकर्ता महिला ने दावा किया कि उसने किसी गलतफहमी के कारण केस दर्ज कराया था, तो कोलकाता की अदालत ने व्यक्ति को बरी कर दिया।
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इस मामले में व्यक्ति को 24 नवंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। बाद में 14 जनवरी 2021 को अदालत से उसे जमानत मिल गई थी। जमानत मिलने तक व्यक्ति को जेल में 51 दिन बिताने पड़े।
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व्यक्ति ने खुद को बताया था निर्दोष
महिला ने अपनी शिकायत में कहा था कि वह 2017 से उस व्यक्ति के साथ रिश्ते में थी। व्यक्ति ने शादी का वादा करके साल्ट लेक के एक होटल में उसके साथ रात बिताई थी। इस दौरान उनके बीच शारीरिक संबंध बन गए। महिला ने आरोप लगाया कि अगली सुबह व्यक्ति ने शादी करने से इनकार कर दिया और वहां से भाग गया। हालांकि, व्यक्ति ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया था।
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महिला ने कहा- दोस्त ने लिखी थी शिकायत
अदालती दस्तावेजों के अनुसार, महिला ने सुनवाई के दौरान दावा किया कि उसने गलतफहमी के कारण व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इसके अलावा उसे कुछ भी याद नहीं है। महिला ने आगे कहा कि शिकायत उसके दोस्त ने लिखी थी और उसने बिना उसकी विषय-वस्तु जाने शिकायत पर हस्ताक्षर कर दिए थे।
आरोप साबित करने में विफल रहा अभियोजन पक्ष
कोलकाता के फास्ट ट्रैक द्वितीय न्यायालय के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिंद्य बनर्जी ने 28 अगस्त के अपने फैसले में कहा, 'अभियोजन पक्ष भारतीय दंड संहिता की धारा 417/376 के तहत आरोप साबित करने में बुरी तरह विफल रहा है और अभियुक्त संदेह का लाभ पाने का हकदार है।'
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दो वयस्कों के बीच सहमति से बने संबंध का था मामला
न्यायाधीश ने कहा कि महिला की गवाही से साफ है कि मामला केवल दो वयस्कों के बीच सहमति से बने शारीरिक संबंध का था। शिकायतकर्ता महिला ने अपनी गवाही के दौरान अदालत में अभियुक्त के खिलाफ दुष्कर्म (धारा 376) या धोखाधड़ी (धारा 417) का कोई आरोप नहीं लगाया। अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष के अन्य गवाहों- महिला की मां, दादी और एक पड़ोसी ने भी अभियुक्त के खिलाफ आरोपों की पुष्टि नहीं की।