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Bengal: बंगाल को मिलीं बड़ी रेलवे योजनाओं में ममता बनीं स्पीड ब्रेकर, रेल मंत्री ने बताया ऐसे दूर करेंगे बाधा

Wed, 04 Feb 2026 10:17 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Wed, 04 Feb 2026 10:17 PM IST
सार

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पश्चिम बंगाल को 14,205 करोड़ रुपए आवंटित किए है। राज्य के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है कि पहली बुलेट ट्रेन सिलीगुड़ी तक आएगी। यह नया हाई स्पीड ट्रेन कॉरिडोर वाराणसी से सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित है। भविष्य में इस असम के गुवाहाटी तक बढ़ाया जाएगा।

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Mamata government has become a speed breaker for major railway projects in Bengal
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI Photos

विस्तार

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में पश्चिम बंगाल को रेल परियोजनाओं की बड़ी सौगातें दी हैं। लेकिन इन घोषणाओं के साथ ही बंगाल में विकास बनाम राजनीति की बहस भी तेज हो गई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है राज्य को बुलेट ट्रेन हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और फ्रेट कॉरिडोर जैसे बड़े प्रोजेक्ट मिले हैं, लेकिन ममता बनर्जी सरकार कई योजनाओं में बाधा डाल रही है। मंत्री ने दावा किया कि रुकावटों के बावजूद केंद्र सरकार कोलकाता मेट्रो समेत सभी परियोजनाओं को तय समय पर पूरा करेगी।
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रेल मंत्री ने कहा, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पश्चिम बंगाल को 14,205 करोड़ रुपए आवंटित किए है। राज्य के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है कि पहली बुलेट ट्रेन सिलीगुड़ी तक आएगी। यह नया हाई स्पीड ट्रेन कॉरिडोर वाराणसी से सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित है। भविष्य में इस असम के गुवाहाटी तक बढ़ाया जाएगा। इससे पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल दोनों को बड़ा लाभ होगा। इस ट्रेन के शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय कम होगा। अभी यह सफर 14 से 18 घंटे में पूरा होता है, लेकिन बुलेट ट्रेन से यह दूरी 3 घंटे से भी कम समय में तय होने की संभावना है। प्रस्तावित ट्रेन की रफ्तार 300 से 350 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है। इससे बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बीच कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार आने की उम्मीद है।
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रेल मंत्री ने कहा,राज्य को एक नया फ्रेट कॉरिडोर भी पश्चिम बंगाल को मिलेगा, जो दानकुनी से शुरू होकर गुजरात के सूरत तक जाएगा। यह कॉरिडोर ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के शहरों को भी जोड़ेगा। कोर्ट के आदेश के बावजूद पश्चिम बंगाल की सरकार ने कोलकाता के चिंगड़ीघाटा में मेट्रो रेल परियोजना के लिए जमीन नहीं दी है। पिछले 40 वर्षों में कोलकाता  में 27 किलोमीटर मेट्रो लाइन बिछाई गई। जबकि एनडीए सरकार के पिछले 11 वर्षों 45 किलोमीटर लाइन बिछाई गई। मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पश्चिम बंगाल सरकार पर विकास कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए कहा, राज्य सरकार रेलवे हर छोटे बड़े रेलवे प्रोजेक्टस का बिना किसी वजह विरोध करती है। मंत्री ने कोलकाता मेट्रो का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले 40 वर्षों में सिर्फ 25 किलोमीटर मेट्रो लाइन बनी थी, जबकि पिछले 11 बर्षों में 45 किलोमीटर नई मेट्रो लाइन तैयार की गई हैं। राज्य सरकार के लगातार असहयोग के चलते शहर के बीचों-बीच चिंगड़ीघाटा जैसी अहम जगह पर पिछले दो साल से मेट्रो का काम ठप पड़ा है। रेल मंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा, प्रोजेक्ट की जरूरी अनुमति जानबूझकर नहीं दी गई, ताकि प्रोजेक्ट आगे न बढ़ सके। उन्होंने कहा कि इन बाधाओं के बावजूद रेलवे पीछे नहीं हटेगा और पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए काम जारी रहेगा।
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मंत्री ने कहा कि, मेट्रो प्रोजेक्ट पूरा होने पर कोलकाता के लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। यह शहर और पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय होगा। इससे आम लोगों को सुरक्षित, तेज़ और किफायती परिवहन सुविधा मिलेगी। पश्चिम बंगाल सरकार दुर्भाग्य से इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहती, लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार अपनी प्रतिबद्धता के साथ काम जारी रखेगी। मंत्री ने कहा कि यह सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि जनता की सुविधा और शहर के विकास का मुद्दा है। रेल मंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि चाहे जितनी भी बाधाएं आएं, रेलवे मंत्रालय और केंद्र सरकार कोलकाता मेट्रो समेत अन्य परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
 
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