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क्या 2021 में ममता के पैर में नहीं हुआ था फ्रैक्चर?: मेडिकल रिपोर्ट हुई लीक, अब डॉक्टरों को भेजा नोटिस

Mon, 05 Oct 2026 04:36 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 05 Oct 2026 04:36 PM IST
सार

ममता बनर्जी की 2021 की पैर की चोट को लेकर पुराना विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। शुभेंदु अधिकारी ने बांगुर इंस्टीट्यूट की 11 मार्च 2021 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि उसमें पैर में फ्रैक्चर का कोई सबूत नहीं था। इसके बाद ममता के वकील ने मेडिकल रिकॉर्ड सार्वजनिक होने पर एसएसकेएम और बांगुर इंस्टीट्यूट को नोटिस भेजा। आखिर रिपोर्ट सार्वजनिक कैसे हुई और उसमें क्या लिखा था?

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Mamata Banerjee Lawyer Sends Legal Notice to Hospitals Over Medical Record Disclosure What Questions Raised
ममता बनर्जी - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की 2021 की पैर की चोट को लेकर पांच साल बाद फिर विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि ममता की चोट को लेकर सामने आई 11 मार्च 2021 की मेडिकल रिपोर्ट में पैर में फ्रैक्चर का कोई सबूत नहीं था। इसके बाद ममता बनर्जी के वकील अर्क नाग ने मेडिकल रिकॉर्ड कथित तौर पर बिना अनुमति सार्वजनिक किए जाने को लेकर एसएसकेएम अस्पताल और बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज को कानूनी नोटिस भेजा है। इस पूरे मामले में अब मेडिकल रिपोर्ट की सामग्री के साथ उसे सार्वजनिक किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।

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नोटिस में क्या सवाल उठाए गए हैं?

  • मेडिकल रिकॉर्ड कैसे पहुंचे... ममता के वकील ने पूछा है कि उनकी मुवक्किल के मेडिकल रिकॉर्ड मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी तक कैसे पहुंचे और बाद में सार्वजनिक कैसे किए गए।
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  • अदालत का आदेश था या नहीं... नोटिस में पूछा गया है कि क्या इन मेडिकल रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के लिए किसी अदालत का आदेश मौजूद था।
  • कानूनी तरीके से रिकॉर्ड मिलने पर भी सवाल... नोटिस में कहा गया है कि अगर राज्य सरकार या किसी जांच एजेंसी ने रिकॉर्ड कानूनी तरीके से हासिल किए थे, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें सार्वजनिक करने की अनुमति भी मिल गई।
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  • जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई... वकील ने पूछा है कि अगर किसी अदालत का आदेश नहीं था तो मेडिकल दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
  • रिकॉर्ड असली हैं या नहीं... नोटिस में यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि सार्वजनिक की गई रिपोर्ट ममता बनर्जी के मूल मेडिकल रिकॉर्ड हैं या नहीं।


शुभेंदु अधिकारी ने ममता की चोट को लेकर क्या दावा किया था?
शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि 2021 में नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने पैर की चोट को लेकर गलत दावा किया था। कुछ दिन पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने एक दस्तावेज दिखाया था। उनका कहना था कि यह 11 मार्च 2021 की बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के रेडियो डायग्नोसिस विभाग की रिपोर्ट है। अधिकारी के अनुसार, रिपोर्ट में पैर में फ्रैक्चर का कोई सबूत नहीं था। उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य सरकार 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ममता की पैर की चोट को लेकर किए गए दावों की नई जांच शुरू करेगी।

2021 में ममता बनर्जी के साथ क्या हुआ था?
मामला 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान का है। उस समय ममता बनर्जी मुख्यमंत्री थीं और तृणमूल कांग्रेस की ओर से नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ रही थीं। चुनाव प्रचार के दौरान बिरुलिया बाजार के पास उन्हें चोट लगी थी। इसके बाद उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर चुनाव प्रचार किया था। उनकी चोट कितनी गंभीर थी और उसकी प्रकृति क्या थी, यह चुनाव के दौरान बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था। बाद में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में लौटने के बाद ममता बनर्जी को चलते हुए देखा गया।



अब कानूनी नोटिस में क्या जवाब मांगा गया है?

  • ममता के वकील अर्क नाग ने ईमेल के जरिए एसएसकेएम अस्पताल के निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक तथा बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख को नोटिस भेजा है। इसकी एक प्रति राज्य के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को भी भेजी गई है। नोटिस में 3 अक्तूबर को शुभेंदु अधिकारी की ओर से दिए गए बयानों का भी उल्लेख किया गया है। 
  • अब अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि मेडिकल रिकॉर्ड किस प्रक्रिया के तहत बाहर आए, उन्हें सार्वजनिक करने की अनुमति थी या नहीं और सार्वजनिक किए गए दस्तावेज वास्तव में मूल मेडिकल रिकॉर्ड हैं या नहीं। इस पूरे मामले ने 2021 की चोट से जुड़े पुराने राजनीतिक विवाद को एक बार फिर सामने ला दिया है।
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