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West Bengal: ममता ने किया अलीपुर इंडिपेंडेंस म्यूजियम का उद्घाटन, बोलीं- देश का इतिहास बदलने की कोशिशें जारी
Wed, 21 Sep 2022 10:48 PM IST
Jeet Kumar
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: Jeet Kumar
Updated Wed, 21 Sep 2022 10:48 PM IST
सार
West Bengal: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि हमारे धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन एक नेता के लिए लोगों की जाति, पंथ और धर्म के आधार पर कोई अंतर नहीं होना चाहिए। एक नेता को सभी को साथ लेकर चलना चाहिए।
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ममता बनर्जी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को कहा कि एक 'राजनीतिक उद्देश्य' के लिए देश के इतिहास को बदलने की कोशिशें की जा रही हैं। साथ ही उन्होंने कहा एक सच्चे नेता को जाति या धर्म के बावजूद सभी को साथ लेकर चलना चाहिए। अलीपुर संग्रहालय के उद्घाटन पर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने किसी का बिना नाम लिए कहा कि राजनेता भारत के स्वतंत्रता संग्राम के समृद्ध इतिहास को बदलने के लिए ठोस प्रयास कर रहे हैं। साथ ही कहा कि बदलाव का प्रयास किया जा रहा है ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता आंदोलन की सच्चाई का पता न चले।
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उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को संरक्षित करने की जरूरत है। हम बंगाल विधानसभा में वही काम कर रहे हैं जहां नेताजी से संबंधित फाइलों सहित पुरानी फाइलें जारी की गई हैं और उनका डिजिटलीकरण किया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि हमें फूट डालो और राज करो की राजनीति की एक और लड़ाई की जरूरत नहीं है।
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ममता बनर्जी ने कहा कि हमारे धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन एक नेता के लिए लोगों की जाति, पंथ और धर्म के आधार पर कोई अंतर नहीं होना चाहिए। एक नेता को सभी को साथ लेकर चलना चाहिए।
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आगे ममता बनर्जी ने कहा कि आजादी के 75वें वर्ष पर अलीपुर जेल में संग्रहालय उन अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन से देश की आजादी को सुरक्षित करने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य अपनी समृद्ध विरासत और इतिहास को संरक्षित करने के लिए इस जेल को संग्रहालय में बदलना है।
112 साल पुराने उच्च सुरक्षा वाले अलीपुर केंद्रीय सुधार गृह को 2019 में सुरक्षा उद्देश्यों के लिए बंद कर दिया गया था और इसके सभी कैदियों को अन्य सुधार गृहों में स्थानांतरित कर दिया गया था। तब मरम्मत और नवीनीकरण का काम किया गया और इसे एक संग्रहालय में बदल दिया गया है।
इस जेल में कई बार स्वतंत्रता सेनानी और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान श्री अरबिंदो, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, पंडित जवाहरलाल नेहरू, काजी नजरूल इस्लाम, शरत चंद्र बोस, बिधान चंद्र रॉय और कई अन्य दिग्गज जैसे नेता थे। अलीपुर जेल में कई स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी गई।