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कर्नाटक: 'सिद्धारमैया की छवि खराब करने की साजिश रच रहा खरगे परिवार', कुमारस्वामी ने लगाया आरोप; क्या कहा?
Wed, 28 Oct 2026 06:49 PM IST
निर्मल कांत
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 28 Oct 2026 06:49 PM IST
सार
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उनके बेटे प्रियांक खरगे ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की छवि खराब करने की साजिश रची। उन्होंने पुलिस पर जेडीएस कार्यकर्ताओं को परेशान करने और जांच में गड़बड़ी के आरोप भी लगाए। कुमारस्वामी ने क्या कुछ कहा? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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एचडी कुमारस्वामी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
विस्तार
केंद्रीय मंत्री और जनता दल (सेक्युलर) की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी ने बुधवार को कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उनके बेटे प्रियांक खरगे ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की छवि खराब करने की साजिश रची है। उन्होंने कहा कि यह साजिश सिद्धारमैया के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन के नाम पर रची गई है।
कुमारस्वामी ने क्या आरोप लगाए?
कुमारस्वामी ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, 'खरगे परिवार पुरानी पारिवारिक नाराजगी का बदला ले रहा है'। उन्होंने आरोप लगाया कि खरगे परिवार मानता है कि अतीत में सिद्धारमैया की वजह से मल्लिकार्जुन खरगे मुख्यमंत्री नहीं बन पाए थे।
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, 'मंत्री प्रियांक खरगे का असली इरादा कुमारस्वामी को खत्म करना नहीं, बल्कि सिद्धारमैया की छवि खराब करना है। इस मामले को कुमारस्वामी के नाम से जोड़ना और आखिर में सिद्धारमैया को ही फंसाना, मौजूदा मुख्यमंत्री के साथ मिलकर खरगे परिवार की रची गई अंदरूनी साजिश है'।
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उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया। इन रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) के अधिकारी स्टिंग ऑपरेशन के बारे में स्पष्टीकरण लेने पूर्व मुख्यमंत्री के पास गए, तो उन्हें फटकार लगाई गई। कुमारस्वामी ने कहा कि जांच किस दिशा में जा रही है, इसे लेकर सिद्धारमैया खुद नाराज हैं।
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया, स्टिंग ऑपरेशन की पूरी साजिश की मुख्य सूत्रधार कांग्रेस की एक महिला नेता हैं। उन्हें जून 2015 में सिद्धारमैया की ही सरकार के दौरान महिला एवं बाल अधिकार संरक्षण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
उन्होंने सवाल उठाया कि 2023 में हुई उस घटना की जांच क्यों नहीं की जा रही है, जिसमें एक युवती की जगह दूसरी महिला को बैठाया गया था। आरोप है कि उस महिला के जरिये एक निजी चैनल के व्यक्ति को फंसाया गया और उसका वीडियो रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि वीडियो बनाने की बात स्वीकार करने वाला व्यक्ति अब भी सरकारी सुरक्षा में खुलेआम क्यों घूम रहा है और एक अवैध चैनल के जरिये फर्जी खबरें क्यों फैला रहा है।
जेडीएस कार्यकर्ताओं से क्या बोले कुमारस्वामी?
कुमारस्वामी ने कहा, जेडीएस कार्यकर्ताओं को डरने की जरूरत नहीं है। परेशान करने वाले पुलिस अधिकारियों से मत डरिए। राजनीतिक दबाव में झुककर आपके घरों में गैरकानूनी तरीके से कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के नाम लिख लीजिए। समय उन्हें जवाब देगा।
ये भी पढ़ें: एमएलसी चुनाव: 'ईवीएम हो या मतपत्र, नतीजा एक जैसा': कांग्रेस के प्रदर्शन पर प्रह्लाद जोशी का तंज; क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा, मौजूदा मुख्यमंत्री बार-बार कहते हैं कि समय हर बात का जवाब देगा। हमारा समय भी आएगा। वह समय ऐसे अधिकारियों और नेताओं को जवाब देगा। वे नौकरी में हों या घर पर सेवानिवृत्त जीवन बिता रहे हों, कानून से बाहर जाकर काम करने की कीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी।
कुमारस्वामी ने कहा, जांच दल से दो-तीन ईमानदार अधिकारी पहले ही हट चुके हैं। इन अधिकारियों ने यह कहते हुए जांच में शामिल होने से इनकार कर दिया कि वे इस अन्यायपूर्ण और पहले से तय जांच का हिस्सा नहीं बन सकते।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब केवल अधिकारियों के एक खास समूह का इस्तेमाल जांच का नाटक करने के लिए किया जा रहा है। ये अधिकारी उन लोगों की बात सुनते हैं। उन्होंने कहा कि विधान परिषद की चारों सीटों पर कांग्रेस की हार गृह मंत्री प्रियांक खरगे के कुशासन और पुलिस विभाग को कठपुतली बनाने का जवाब है।
पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
कुमारस्वामी ने जेडीएस के वॉर रूम कार्यकर्ता मोहन गौड़ा के परिवार के साथ पुलिस की कथित ज्यादती को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, पुलिस तलाशी वारंट का बहाना बनाकर मोहन गौड़ा की गैरमौजूदगी में उनके घर में घुसी। पुलिस ने उनकी पत्नी के साथ मारपीट की, उन्हें धक्का दिया और जबरन उनका मोबाइल छीन लिया। महिला ने कहा था कि वह वकील से सलाह लेने के बाद मोबाइल दे देगी। मैंने घटना के दृश्य देखे हैं।
उन्होंने कहा कि इसके बाद पुलिस ने रातोंरात एक झूठी प्राथमिकी दर्ज कर दी। इसमें महिला पर पुलिस अधिकारी की चेन चुराने का आरोप लगाया गया। दावा किया गया कि हाथापाई के दौरान अधिकारी की चेन गिर गई थी।
कुमारस्वामी ने कहा कि जेडीएस कार्यकर्ताओं ने अगली सुबह ईमानदारी से वह चेन बयादराहल्ली पुलिस थाने में जमा करा दी थी। इसके बावजूद अखबारों और टीवी चैनलों में 'महिला ने चेन चुराई' जैसी खबरें चलाकर एक सम्मानित परिवार की छवि खराब की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि महिला अधिकारी को अपने इस काम पर पछताना पड़ेगा।
कुमारस्वामी ने अंत में कहा, मैंने कोई गलत काम नहीं किया है। कोई भी कुमारस्वामी की आवाज को दबा नहीं सकता। सत्य और धर्म की रक्षा करने वाली एक अदृश्य दिव्य शक्ति हमारे साथ है। विरोधियों का मुंह हमेशा के लिए बंद करने का समय जल्द आएगा।
विक्की की मौत पर क्या कहा?
कुमारस्वामी ने कहा कि उन्हें पता है कि पुलिस ने पावर टीवी के कर्मचारी विक्की (विकास) की रहस्यमय मौत को छिपाने में किस तरह मदद की। उन्होंने बताया कि विक्की करीब एक साल और तीन महीने पहले चौथी मंजिल से गिर गए थे।
उन्होंने कहा, क्या विक्की खुद चौथी मंजिल से लिफ्ट की खाली जगह में गिर गए थे या उन्हें धक्का दिया गया था? उनके साथ मौजूद दूसरे व्यक्ति को कुछ क्यों नहीं हुआ? फुटेज को संपादित किया गया और मनगढ़ंत कहानियां प्रसारित की गईं। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मैं इस मामले को ऐसे ही नहीं छोड़ूंगा।
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कुमारस्वामी ने क्या आरोप लगाए?
कुमारस्वामी ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, 'खरगे परिवार पुरानी पारिवारिक नाराजगी का बदला ले रहा है'। उन्होंने आरोप लगाया कि खरगे परिवार मानता है कि अतीत में सिद्धारमैया की वजह से मल्लिकार्जुन खरगे मुख्यमंत्री नहीं बन पाए थे।
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कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, 'मंत्री प्रियांक खरगे का असली इरादा कुमारस्वामी को खत्म करना नहीं, बल्कि सिद्धारमैया की छवि खराब करना है। इस मामले को कुमारस्वामी के नाम से जोड़ना और आखिर में सिद्धारमैया को ही फंसाना, मौजूदा मुख्यमंत्री के साथ मिलकर खरगे परिवार की रची गई अंदरूनी साजिश है'।
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उन्होंने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया। इन रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) के अधिकारी स्टिंग ऑपरेशन के बारे में स्पष्टीकरण लेने पूर्व मुख्यमंत्री के पास गए, तो उन्हें फटकार लगाई गई। कुमारस्वामी ने कहा कि जांच किस दिशा में जा रही है, इसे लेकर सिद्धारमैया खुद नाराज हैं।
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया, स्टिंग ऑपरेशन की पूरी साजिश की मुख्य सूत्रधार कांग्रेस की एक महिला नेता हैं। उन्हें जून 2015 में सिद्धारमैया की ही सरकार के दौरान महिला एवं बाल अधिकार संरक्षण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
उन्होंने सवाल उठाया कि 2023 में हुई उस घटना की जांच क्यों नहीं की जा रही है, जिसमें एक युवती की जगह दूसरी महिला को बैठाया गया था। आरोप है कि उस महिला के जरिये एक निजी चैनल के व्यक्ति को फंसाया गया और उसका वीडियो रिकॉर्ड किया गया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि वीडियो बनाने की बात स्वीकार करने वाला व्यक्ति अब भी सरकारी सुरक्षा में खुलेआम क्यों घूम रहा है और एक अवैध चैनल के जरिये फर्जी खबरें क्यों फैला रहा है।
जेडीएस कार्यकर्ताओं से क्या बोले कुमारस्वामी?
कुमारस्वामी ने कहा, जेडीएस कार्यकर्ताओं को डरने की जरूरत नहीं है। परेशान करने वाले पुलिस अधिकारियों से मत डरिए। राजनीतिक दबाव में झुककर आपके घरों में गैरकानूनी तरीके से कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के नाम लिख लीजिए। समय उन्हें जवाब देगा।
ये भी पढ़ें: एमएलसी चुनाव: 'ईवीएम हो या मतपत्र, नतीजा एक जैसा': कांग्रेस के प्रदर्शन पर प्रह्लाद जोशी का तंज; क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा, मौजूदा मुख्यमंत्री बार-बार कहते हैं कि समय हर बात का जवाब देगा। हमारा समय भी आएगा। वह समय ऐसे अधिकारियों और नेताओं को जवाब देगा। वे नौकरी में हों या घर पर सेवानिवृत्त जीवन बिता रहे हों, कानून से बाहर जाकर काम करने की कीमत उन्हें चुकानी पड़ेगी।
कुमारस्वामी ने कहा, जांच दल से दो-तीन ईमानदार अधिकारी पहले ही हट चुके हैं। इन अधिकारियों ने यह कहते हुए जांच में शामिल होने से इनकार कर दिया कि वे इस अन्यायपूर्ण और पहले से तय जांच का हिस्सा नहीं बन सकते।
उन्होंने आरोप लगाया कि अब केवल अधिकारियों के एक खास समूह का इस्तेमाल जांच का नाटक करने के लिए किया जा रहा है। ये अधिकारी उन लोगों की बात सुनते हैं। उन्होंने कहा कि विधान परिषद की चारों सीटों पर कांग्रेस की हार गृह मंत्री प्रियांक खरगे के कुशासन और पुलिस विभाग को कठपुतली बनाने का जवाब है।
पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
कुमारस्वामी ने जेडीएस के वॉर रूम कार्यकर्ता मोहन गौड़ा के परिवार के साथ पुलिस की कथित ज्यादती को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, पुलिस तलाशी वारंट का बहाना बनाकर मोहन गौड़ा की गैरमौजूदगी में उनके घर में घुसी। पुलिस ने उनकी पत्नी के साथ मारपीट की, उन्हें धक्का दिया और जबरन उनका मोबाइल छीन लिया। महिला ने कहा था कि वह वकील से सलाह लेने के बाद मोबाइल दे देगी। मैंने घटना के दृश्य देखे हैं।
उन्होंने कहा कि इसके बाद पुलिस ने रातोंरात एक झूठी प्राथमिकी दर्ज कर दी। इसमें महिला पर पुलिस अधिकारी की चेन चुराने का आरोप लगाया गया। दावा किया गया कि हाथापाई के दौरान अधिकारी की चेन गिर गई थी।
कुमारस्वामी ने कहा कि जेडीएस कार्यकर्ताओं ने अगली सुबह ईमानदारी से वह चेन बयादराहल्ली पुलिस थाने में जमा करा दी थी। इसके बावजूद अखबारों और टीवी चैनलों में 'महिला ने चेन चुराई' जैसी खबरें चलाकर एक सम्मानित परिवार की छवि खराब की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि महिला अधिकारी को अपने इस काम पर पछताना पड़ेगा।
कुमारस्वामी ने अंत में कहा, मैंने कोई गलत काम नहीं किया है। कोई भी कुमारस्वामी की आवाज को दबा नहीं सकता। सत्य और धर्म की रक्षा करने वाली एक अदृश्य दिव्य शक्ति हमारे साथ है। विरोधियों का मुंह हमेशा के लिए बंद करने का समय जल्द आएगा।
विक्की की मौत पर क्या कहा?
कुमारस्वामी ने कहा कि उन्हें पता है कि पुलिस ने पावर टीवी के कर्मचारी विक्की (विकास) की रहस्यमय मौत को छिपाने में किस तरह मदद की। उन्होंने बताया कि विक्की करीब एक साल और तीन महीने पहले चौथी मंजिल से गिर गए थे।
उन्होंने कहा, क्या विक्की खुद चौथी मंजिल से लिफ्ट की खाली जगह में गिर गए थे या उन्हें धक्का दिया गया था? उनके साथ मौजूद दूसरे व्यक्ति को कुछ क्यों नहीं हुआ? फुटेज को संपादित किया गया और मनगढ़ंत कहानियां प्रसारित की गईं। इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मैं इस मामले को ऐसे ही नहीं छोड़ूंगा।