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Demonetisation: खरगे का मोदी पर निशाना, कहा- पीएम ने अभी तक नोटबंदी की 'महा विफलता' को स्वीकार नहीं किया

Tue, 08 Nov 2022 04:39 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 08 Nov 2022 04:39 AM IST
सार

नोटबंदी की छठी वर्षगांठ से एक दिन पहले खड़गे ने कहा कि मीडिया में एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया है कि देश में जनता के बीच मौजूद नकदी 21 अक्तूबर 2022 तक 30.88 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। 

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Mallikarjun Kharge attacked PM Modi said PM yet to acknowledge epic failure of demonetisation move
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने अभी तक अपनी सरकार में 2016 के दौरान उठाए गए नोटबंदी के कदम की “महा विफलता” को स्वीकार नहीं किया है, जिसके कारण “अर्थव्यवस्था का पतन” हुआ।

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नोटबंदी के छह वर्ष बाद लोगों के पास नकदी बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची
नोटबंदी की छठी वर्षगांठ से एक दिन पहले खड़गे ने कहा कि “मीडिया में एक रिपोर्ट आई थी जिसमें कहा गया है कि देश में जनता के बीच मौजूद नकदी 21 अक्तूबर 2022 तक 30.88 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। खड़गे ने एक ट्वीट में कहा, "नोटबंदी के जरिये देश को कालेधन से मुक्त करने का वादा किया गया था। लेकिन इसने व्यवसायों को नष्ट कर दिया और नौकरियों को बर्बाद कर दिया। 'मास्टरस्ट्रोक’ के छह साल बाद सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नकदी 2016 की तुलना में 72 फीसदी अधिक है।”

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कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि "प्रधानमंत्री ने अभी तक इस 'महा विफलता' को स्वीकार नहीं किया है, जिसके कारण अर्थव्यवस्था का पतन हुआ।" इसके बाद हिंदी में एक ट्वीट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि "काला धन नहीं आया, बस गरीबी आई और अर्थव्यवस्था कैशलेस नहीं, कमजोर हुई। आतंकवाद नहीं, करोड़ों छोटे व्यापार और रोजगार खत्म हुए। 'राजा' ने नोटबंदी में, ‘50 दिन’ का झांसा दे कर अर्थव्यवस्था का DeMo-lition (नाश) कर दिया।"
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से पखवाड़े के आधार पर शुक्रवार को जारी धन आपूर्ति आंकड़ों के अनुसार, इस साल 21 अक्तूबर तक जनता के बीच चलन में मौजूद मुद्रा का स्तर बढ़कर 30.88 लाख करोड़ रुपये हो गया। यह आंकड़ा चार नवंबर, 2016 को समाप्त पखवाड़े में 17.7 लाख करोड़ रुपये था। यह आंकड़ा चार नवंबर, 2016 को समाप्त पखवाड़े में चलन में मौजूद मुद्रा के स्तर से 71.84 प्रतिशत अधिक है। इससे पता चलता है कि भुगतान के नए और सुविधाजनक डिजिटल विकल्प के लोकप्रिय होने के बावजूद अर्थव्यवस्था में नकदी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।  

बता दें कि जनता के पास मुद्रा (करेंसी) से तात्पर्य उन नोटों और सिक्कों से है जिनका उपयोग लोग लेन-देन, व्यापार करने और सामान एवं सेवाओं को खरीदने के लिए किया जाता है। प्रचलन में मुद्रा का आंकड़ा, कुल मुद्रा में से बैंकों के पास पड़ी नकदी को घटा देने के बाद निकाला जाता है। गौरतलब है कि आठ नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थव्यवस्था में भ्रष्टाचार और काले धन की समस्या को दूर करने के उद्देश्य से 500 और 1,000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर कर दिया था। इस कदम का उद्देश्य भारत को 'कम नकदी' वाली अर्थव्यवस्था बनाना था। इस कदम को खराब योजना और निष्पादन बताते हुए कई विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना की थी।

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