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Malegaon Blast: एनआईए कोर्ट में कर्नल पुरोहित की याचिका खारिज, अदालत ने कहा- मुकदमा लंबा 'खींचने' का प्रयास

Fri, 13 Oct 2023 09:46 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 13 Oct 2023 09:46 PM IST
सार

मालेगांव विस्फोट मामले में लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने गवाह को वापस बुलाने की पुरोहित की याचिका खारिज कर दी। एनआईए अदालत ने कहा, मुकदमे को लंबा 'खींचने' के लिए आवेदन दायर किया गया है।

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Malegaon blast NIA Court Prasad Purohit plea to recall witness rejected
NIA - फोटो : Social Media

विस्तार

मालेगांव धमाका मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित की याचिका खारिज कर दी है। एनआईए की विशेष अदालत ने 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में कहा कि पुरोहित ने याचिका "मुकदमे को लंबा खींचने" के लिए दायर किया है। पुरोहित ने एक गवाह को वापस बुलाने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज कर कहा कि आवेदन में कोई दम नहीं है।
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11 महीने पहले हुई गवाही
विशेष न्यायाधीश एके लाहोटी ने 7 अक्टूबर को आवेदन खारिज किया। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, यह दूसरा मामला है जब अदालत ने उस गवाह को वापस बुलाने की पुरोहित की याचिका खारिज की है। इसकी गवाही 11 महीने से अधिक समय पहले पूरी हो चुकी थी।
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पुरोहित के वकील ने क्या कहा?
पुरोहित की ओर से पेश वकील अमित घाग ने कहा था कि पिछला आवेदन अदालत ने मुख्य रूप से इस आधार पर खारिज कर दिया था कि रिकॉर्ड पर कोई दस्तावेज दाखिल नहीं किया गया था। अदालत में मौजूद गवाह जिनकी गवाही चल रही है, उन्हें लंबे समय तक नहीं रखा जा सकता है। इसके अलावा, वकील ने तर्क दिया कि वे दस्तावेज आरटीआई के तहत प्राप्त हुए हैं और यह रिकॉर्ड में दर्ज हैं। इसलिए, उन्होंने गवाह को वापस बुलाने की प्रार्थना की।
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दस्तावेजों को पेश करने की अनुमति नहीं
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक अविनाश रसल ने इस आधार पर याचिका का विरोध किया कि आरोपी की अपील पहले ही यह अदालत खारिज कर चुकी है। इसलिए, देर से दस्तावेजों को पेश करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि उसे सरकारी वकील की दलील में दम नजर आया। अदालत ने कहा, आरोपी आरोप तय होने और गवाह से पूछताछ के बीच सूचना के अधिकार कानून के तहत प्राप्त दस्तावेज गवाह को दिखा सकता था लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।

आरोपी ने देरी की, आवेदन की अनुमति नहीं
अदालत ने कहा, आरोपी ने देरी की और काफी समय बीत जाने के बाद, "गवाह को उसकी उपयुक्तता के अनुसार वापस बुलाने की कोशिश करना उचित नहीं होगा। ऐसा करना कानून के दायरे में नहीं होगा।" विशेष न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा, "एक ही कारण से लगातार आवेदन की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यदि इसकी अनुमति दी जाती है तो यह इसी अदालत के आदेश को वापस लेने के समान होगा।"


313 आरोपियों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया
उन्होंने कहा, "आवेदन में कोई दम नहीं है और यह मुकदमे को लंबा खींचने के लिए दायर किया गया है।" बता दें कि अदालत फिलहाल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत आरोपियों के बयान दर्ज कर रही है। इसके तहत आरोपी व्यक्ति को अपने खिलाफ सबूतों में सामने आने वाली परिस्थितियों को समझाने का मौका मिलता है।
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