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Malegaon Blast Case: एनआईए ने बॉम्बे हाईकोर्ट को दी गवाहों की जानकारी, कहा- अबतक 256 से हो चुकी पूछताछ
Wed, 13 Jul 2022 02:25 PM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Wed, 13 Jul 2022 02:25 PM IST
सार
साल 2008 में 29 सितंबर की रात नौ बजकर 35 मिनट पर मालेगांव में शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट कंपनी के ठीक सामने एक बम धमाका हुआ था। यह धमाका एलएमएल मोटरसाइकिल में हुआ था। इस धमाके में छह लोगों की मौत हो गई थी और 101 लोग घायल हो गए थे।
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एनआईए।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
मालेगांव ब्लास्ट मामले में एनआईए ने बॉम्बे हाईकोर्ट को अब तक की स्टेटस रिपोर्ट सौंप दी है। अपनी स्टेटस रिपोर्ट में जांच एजेंसी ने हाईकोर्ट से बताया है कि कि 12 जुलाई तक कुल 495 गवाहों में से 256 गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है और 218 और गवाहों से पूछताछ बाकी है।
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कब और कैसे हुआ था मालेगांव ब्लास्ट?
साल 2008 में 29 सितंबर की रात नौ बजकर 35 मिनट पर मालेगांव में शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट कंपनी के ठीक सामने एक बम धमाका हुआ था। यह धमाका एलएमएल मोटरसाइकिल में हुआ था। इस धमाके में छह लोगों की मौत हो गई थी और 101 लोग घायल हो गए थे। इस मामले में कर्नल पुरोहित और भाजपा सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर समेत चार अन्य लोगों पर आरोप लगाए गए थे।
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अब तक 19 गवाह गवाही देने से पलटे
वहीं इस मामले में गवाही से मुकरने वाले गवाहों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में एक और गवाह अदालत में मुकर गया। अपने पहले दिए गए बयान से पलटते हुए बुधवार को गवाह ने आरोपी प्रसाद पुरोहित की पहचान करने से मना कर दिया। इस मामले की अगली सुनवाई अब 31 मार्च को होगी। इस मामले में अब तक सुनवाई के दौरान 19 गवाह ने अपने बयान से पलट चुके हैं और आरोपियों की पहचान से इंकार कर चुके हैं। इस मामले की सुनवाई एनआईए के जज पीआर कर रहे हैं।
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ले. कर्नल पुरोहित ने की थी बंद कमरे में सुनवाई की मांग
इससे पहले मालेगांव धमाका मामले में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित ने विशेष अदालत में आवेदन दायर कर मामले की सुनवाई बंद कमरे में करने की अपील की थी। पुरोहित ने कहा कि न्याय के हित में मामला अदालत के कक्ष तक ही सीमित रहना चाहिए। अपने आवेदन में पुरोहित ने कहा कि अदालत के 2019 के आदेश का मीडिया उल्लंघन कर रहा है। इसलिए मुकदमे को कवर करने की अनुमति को पूरी तरह से वापस लिया जाए। आवेदन में कहा गया है कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने 2019 में अदालत के समक्ष दिए गए ऐसे ही एक आवेदन में मुकदमे की सुनवाई बंद कमरे में आयोजित करने और मीडिया को रिपोर्टिंग की इजाजत नहीं देने का अनुरोध किया था।