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मलेशियाई पीएम की टिप्पणी पर भारत ने जताया कड़ा विरोध, दूतावास प्रभारी को किया तलब
Sat, 21 Dec 2019 05:38 PM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Sat, 21 Dec 2019 05:38 PM IST
सार
- विदेश मंत्रालय ने कहा, ऐसी टिप्पणी किसी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने जैसा, यह राजनयिक चलन के अनुरूप नहीं है
- मलेशियाई दूतावास के प्रभारी को विदेश मंत्रालय ने किया तलब
- ऐसी टिप्पणियां न तो स्वीकार्य कूटनीतिक व्यवहार के अनुरूप हैं न ही दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के मुताबिक
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Malaysia pm Mahathir Bin Mohamad & MEA India
- फोटो : Twitter
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विस्तार
नागरिकता संशोधन कानून पर मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद की टिप्पणियों पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसी टिप्पणी किसी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने जैसा है, जो राजनयिक चलन के अनुरूप नहीं है ।
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आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मलेशियाई दूतावास के प्रभारी (चार्ज द अफेयर्स) को विदेश मंत्रालय द्वारा तलब किया गया और उन्हें महातिर मोहम्मद की टिप्पणी को लेकर भारत की नाराजगी से अवगत कराया गया।
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आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मलेशिया को कहा गया कि ऐसी टिप्पणियां न तो स्वीकार्य कूटनीतिक व्यवहार के अनुरूप हैं न ही दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के मुताबिक। मलेशिया से कहा गया कि वह भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर दीर्घकालीन एवं कूटनीतिक रूख अपनाए।
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Government Sources: It was also conveyed that such remarks are both ill-informed and insensitive. Malaysia was asked to take a long-term and strategic view of the bilateral relations. (3/3)
— ANI (@ANI) December 21, 2019
मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने संशोधित नागरिकता कानून पर कहा था कि कुछ मुसलमानों को नागरिकता से वंचित रखने के लिए भारत यह कदम उठा रहा है। विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि मलेशिया को भारत के अंदरूनी मामलों पर, खास तौर से तथ्यों की समझ के बगैर टिप्पणी करने से बचना चाहिए ।
मोहम्मद ने शुक्रवार को कहा था, स्वयं को धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करने वाले भारत को देख कर मुझे दुख होता है कि अब वह कुछ मुसलमानों को नागरिकता से वंचित करने के लिए कदम उठा रहा है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा, मीडिया की खबर के मुताबिक मलेशिया के प्रधानमंत्री ने एक बार फिर भारत के आंतरिक मामले पर टिप्पणी की है। सीएए उन लोगों को नागरिकता देने की प्रक्रिया को तेज करता है जो धार्मिक कारणों से सताए जाने की वजह से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से देश में आए हैं।
मंत्रालय ने कहा, ‘इस कानून से किसी भी भारतीय नागरिक की स्थिति प्रभावित नहीं होती या किसी भी भारतीय या धर्मावलंबी नागरिकता से वंचित नहीं होता। इस प्रकार मलेशियाई प्रधानमंत्री की टिप्पणी तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।