मालाबार युद्धाभ्यास: भारतीय नौसेना का दिखेगा दम, अमेरिकी नेवी चीफ बोले- यूएस-भारत रक्षा साझेदारी को साथ चलाने के लिए प्रतिबद्ध
12-15 अक्तूबर तक चलने वाले युद्धाभ्यास में इंडियन नेवी, जापान की जापान मैरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स, ऑस्ट्रेलिया की रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी और अमेरिकी नेवी का दम भी दिखेगा।
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बंगाल की खाड़ी में नौसेना का सबसे प्रसिद्ध मालाबार युद्धाभ्यास का दूसरा चरण आज से शुरू हो गया। यह युद्धाभ्यास 12-15 अक्तूबर के बीच चलेगा। इसमें भारतीय नौसेना, जापान की जापान मैरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स, ऑस्ट्रेलिया की रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी और अमेरिकी नेवी शामिल है। इस युद्धाभ्यास में नौसेनाओं की अग्रिम पंक्तियों के कई युद्धपोत एवं अन्य पोत करतब दिखाएंगे।मालाबार नौसेना युद्धाभ्यास 1992 में हिंद महासागर में भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना के बीच द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में शुरू हुआ था। 2015 में जापान भी इसका सदस्य बना। भारत के निमंत्रण के बाद पिछले साल ऑस्ट्रेलिया भी मालाबार अभ्यास में हिस्सा लेना शुरू किया था।
भारत दौरे पर पहुंचे अमेरिकी नेवी चीफ
मालाबार युद्धाभ्यास को देखने के लिए अमेरिकी नेवी चीफ एडमिरल माइकल गिल्डे भी भारत दौरे पर आए हैं। इस दौरान गिल्डे ने कहा कि भारत यात्रा के दौरान मेरी मेजबानी करने के लिए एडमिरल सिंह और भारतीय नौसेना का आभार व्यक्त करता हूं। हम अपनी यूएस-भारत रक्षा साझेदारी को साथ चलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जिसमें बढ़ी हुई जानकारी साझा करना, क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्र में एक साथ अभ्यास करना शामिल है।
Thank you Admiral Singh & Indian Navy for hosting me during my visit to India. We're committed to operationalizing our US-India Defence partnership, incl through enhanced info-sharing, regional security & exercising at sea together: Adm Michael Gilday, Chief of Naval Ops, US Navy pic.twitter.com/gqHwGq8ZP5
— ANI (@ANI) October 12, 2021
अमेरिकी सील से कम नहीं मार्कोस
मार्कोस (MARCOS) को मरीन कमांडो फोर्स भी कहा जाता है। यह भारतीय नौसेना की विशेष फोर्स टीम है। 1980 के दशक से लेकर अभी तक मार्कोस ने सीक्रेट मिशन को अंजाम दिया है। मार्कोस अपने ऑपरेशन को इतनी तेजी और तत्परता से अंजाम देते हैं कि इन्हें किसी मायनों में अमेरिकी सील से कम नहीं आंका जा सकता है। भारतीय नौसेना की एलीट स्पेशल फोर्स आतंकी हमले के मुकाबले से लेकर पानी के भीतर ऑपरेशन, एंटी-पायरेसी ऑपरेशन समेत हर चीज में माहिर है। मार्कोस कमांडोज टीएआर-21 असॉल्ट राइफल समेत दुनिया के सर्वश्रेष्ठ हथियार से लैस होते हैं।
मार्कोस का प्रशिक्षण सबसे कठिन
मरीन कमांडो या मार्कोस भारतीय नौसेना की एक विशेष बल इकाई है, शुरुआत में इसका नाम भारतीय समुद्री विशेष बल के तौर पर हुई थी। हालांकि, दो साल बाद, उनका नाम बदलकर मरीन कमांडो फोर्स कर दिया गया। इसकी स्थापना 1987 में की गई थी। मार्कोस का प्रशिक्षण इतना व्यापक होता है कि इनको आतंकवाद से लेकर, नेवी ऑपरेशन, और एंटी पायरेसी ऑपरेशन में भी इस्तेमाल किया जाता है। मरीन कमांडो का मोटो है - द फ्यू द फियरलेस। मरीन कमांडोज की ट्रेनिंग को दुनिया की सबसे कठिन ट्रेनिंग में से एक है। 1000 सैनिकों में से एक मार्कोस तैयार हो पाता है।