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अब पानी में दुश्मनों के दांत खट्टे करेगी नौसेना की कलवरी
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
Updated Fri, 22 Sep 2017 05:53 PM IST
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अमेरिका, चीन, रूस और फ्रांस के बाद अब भारतीय नौसेना भी पानी में अपनी मारक क्षमता बढ़ाते हुए एक कदम और आगे बढ़ गई है। नौसेना स्कॉर्पीन पनडुब्बी कलवरी के साथ अब दुश्मनों के दांत पानी में भी खट्टे कर देगी। कलवरी को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वह दुश्मन की नजरों से बचकर उनपर सटीक निशाना लगाएगी।
ये टॉरपीडो और एंटीशिप मिसाइलों से हमले कर सकती है। स्कॉर्पीन में लो रेडिएटिट नॉयस लेवल युक्त बनाया गया है जिससे इसका शोर कम होता है और यह समुद्र के अंदर तैरते हुए दुश्मनों पर घात लगाकर वार कर सकती है।
पढ़ें: भारतीय नौसेना को मिली स्कॉर्पीन सीरीज की पहली पनडुब्बी कलवरी, 5 और होंगी तैयार
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कलवरी यानी खतरनाक 'टाइगर शार्क' जो हिंद महासागर की गहराई में बैठकर शिकार करती है। पनडुब्बी को फ्रेंच नेवल डिफेंस और ऊर्जा कंपनी डीसीएनएस ने डिजायन किया है। इसे बनाने की लागत लगभग 350 करोड़ है। जबकि भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट-75 के तहत इसका निर्माण मुंबई में एमडीएल ने किया है। मेक इन इंडिया के तहत यह बनाई जा रही ये देश की पहली पनडुब्बी है।
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ये टॉरपीडो और एंटीशिप मिसाइलों से हमले कर सकती है। स्कॉर्पीन में लो रेडिएटिट नॉयस लेवल युक्त बनाया गया है जिससे इसका शोर कम होता है और यह समुद्र के अंदर तैरते हुए दुश्मनों पर घात लगाकर वार कर सकती है।
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कलवरी यानी खतरनाक 'टाइगर शार्क' जो हिंद महासागर की गहराई में बैठकर शिकार करती है। पनडुब्बी को फ्रेंच नेवल डिफेंस और ऊर्जा कंपनी डीसीएनएस ने डिजायन किया है। इसे बनाने की लागत लगभग 350 करोड़ है। जबकि भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट-75 के तहत इसका निर्माण मुंबई में एमडीएल ने किया है। मेक इन इंडिया के तहत यह बनाई जा रही ये देश की पहली पनडुब्बी है।
पानी के भीतर 1020 किलोमीटर की तेजी से चल सकती है कलवरी
Government Inquiry Concludes, Scorpene Submarine Leak Not From India
कलवरी एक समय में 18 टॉरपीडो के साथ पानी के भीतर 1020 किलोमीटर तक चल सकती है। दुश्मनों का पता लगाने के लिए ये 66 मीटर की पनडुब्बी 300 मीटर गहराई तक जा सकती है।
इस पनडुब्बी की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह दुश्मन के सटीक और निर्देशित हथियारों पर सटीक हमला कर सकती है। यही नहीं पानी के भीतर और सतह पर से टॉरपीडो के साथ-साथ ट्यूब लांच किए गए एंटी शिप मिसाइलों के साथ इसकी मारक क्षमता बढ़ जाती है।
इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह हर तरह के युद्ध में अपनी मारक क्षमता को बराबर से बनाए रखता है। कलवरी एंटी सरफेस यानी सतही जहाजों के साथ साथ एंटी सबमरीन और इंटेलीजेंस गैदरिंग में भी मारक क्षमता रखती है।
इस पनडुब्बी की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यह दुश्मन के सटीक और निर्देशित हथियारों पर सटीक हमला कर सकती है। यही नहीं पानी के भीतर और सतह पर से टॉरपीडो के साथ-साथ ट्यूब लांच किए गए एंटी शिप मिसाइलों के साथ इसकी मारक क्षमता बढ़ जाती है।
इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह हर तरह के युद्ध में अपनी मारक क्षमता को बराबर से बनाए रखता है। कलवरी एंटी सरफेस यानी सतही जहाजों के साथ साथ एंटी सबमरीन और इंटेलीजेंस गैदरिंग में भी मारक क्षमता रखती है।