CBI को बड़ी सफलता: थाईलैंड से भारत लाया गया साइबर ठगी का आरोपी गणेश बालासो काले, जानें क्या था लुटने का तरीका
सीबीआई ने साइबर ठगी के आरोपी को थाईलैंड से भारत प्रत्यर्पित कराया है। आरोपी ऑनलाइन पार्ट-टाइम नौकरी का लालच देकर लोगों से निवेश करवाता था। वह बैंक खातों, फर्जी सिम और मोबाइल फोन के जरिए ठगी नेटवर्क चलाता था।
सीबीआई ने साइबर ठगी के आरोपी को थाईलैंड से भारत प्रत्यर्पित कराया है। आरोपी ऑनलाइन पार्ट-टाइम नौकरी का लालच देकर लोगों से निवेश करवाता था। वह बैंक खातों, फर्जी सिम और मोबाइल फोन के जरिए ठगी नेटवर्क चलाता था।
विस्तार
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने साइबर ठगी के एक मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। विदेश मंत्रालय (एमईए), गृह मंत्रालय (एमएचए) और थाईलैंड में भारतीय दूतावास से फरार आरोपी गणेश बालासो काले को थाईलैंड से भारत प्रत्यर्पित कर लिया गया है। यह जानकारी एक अधिकारी ने गुरुवार को दी।
सीबीआई के अनुसार, काले साइबर अपराध धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी था। उसने पीड़ितों को कथित तौर पर ऑनलाइन अंशकालिक नौकरियों के लालच दिया। इसके साथ ही धोखाधड़ी करने से पहले निवेश के रूप में मौद्रिक जमा करने के लिए राजी किया।
क्या था ठगने का तरीका?
जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपी साइबर वित्तीय अपराधियों का एक नेटवर्क चलाता था। वह अवैध धन के हस्तांतरण को सुविधाजनक बनाने के लिए अलग-अलग भोले-व्यक्तियों का इस्तेमाल करता था। आरोप है कि उसने लोगों को अपराध की आय को स्थानांतरित करने के लिए उनके बैंक खातों का उपयोग करने की अनुमति देने के बदले में ब्याज और कमीशन का वादा किया था। एजेंसी ने आगे बताया कि काले ने इन बैंक खातों का इस्तेमाल कई पीड़ितों को धोखा देने के लिए किया। धोखाधड़ी की गतिविधियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस पर साइबर अपराधों को अंजाम देने में मदद के लिए सह-साजिशकर्ताओं को मोबाइल फोन की व्यवस्था करने और नकली सिम कार्ड प्राप्त करने का निर्देश देने का भी आरोप है।
इंटरपोल की ओर से जारी रेड नोटिस के आधार पर आरोपी को थाईलैंड में खोजा गया। थाई अधिकारियों ने उसे 24 मई, 2026 को बैंकॉक में हिरासत में ले लिया। सीबीआई ने बताया कि कानूनी कार्यवाही और भारतीय और थाई अधिकारियों के बीच समन्वय के बाद, भगोड़े को 10 जून, 2026 को भारत प्रत्यर्पित कर दिया गया।
20 दिन में ढूंढ कर किया गिरफ्तार
एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, अधिकारियों ने बताया कि काले के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस मई 2026 में जारी किया गया था। नोटिस जारी होने के लगभग 20 दिनों के भीतर ही उसे ढूंढकर गिरफ्तार कर भारत वापस लाया गया। एजेंसी ने कहा कि इस त्वरित कार्रवाई से दोनों देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अधिकारियों के बीच प्रभावी अंतरराष्ट्रीय सहयोग झलकता है। काले 11 जून को मुंबई पहुंचे, जहां महाराष्ट्र पुलिस की साइबर सेल के अधिकारियों ने उन्हें आगे की जांच और कानूनी कार्यवाही के लिए हिरासत में ले लिया।
सीबीआई ने कहा कि यह सफल प्रत्यर्पण भारतीय एजेंसियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय अपराधों, विशेष रूप से भोले-भाले नागरिकों को निशाना बनाने वाले साइबर धोखाधड़ी में शामिल भगोड़ों का पता लगाने और उन्हें वापस लाने के निरंतर प्रयासों को दिखाता है।