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पासपोर्ट से भारतीय नागरिकता साबित नहीं!: MEA सूत्र क्या बोले; सेवाएं अब कितनी सुलभ, विदेश यात्रा कितनी आसान?
Wed, 24 Jun 2026 06:42 PM IST
Pavan
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Wed, 24 Jun 2026 06:42 PM IST
सार
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत का पासपोर्ट कभी भी नागरिकता प्रमाण दस्तावेज की तरह इस्तेमाल नहीं किया गया। सरकारी सूत्रों के हवाले से विदेश मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का प्रमाण नहीं रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नीत सरकार ने पिछले 12 वर्षों में इस पर कोई नया निर्णय भी नहीं लिया है। जानिए क्या है पूरा मामला
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पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारतीय पासपोर्ट की कानूनी स्थिति और दस्तावेज की वैधता को लेकर आई खबरों में सरकारी सूत्रों के हवाले से अहम जानकारी दी गई। इसके मुताबिक सरकार ने कहा है कि पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का प्रमाण नहीं रहा है। रिपोर्ट्स में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले 12 वर्षों में इस पर कोई नया निर्णय भी नहीं लिया है।
नागरिकता और पासपोर्ट के रिश्ते पर सरकार क्या बोली?
पासपोर्ट का इस्तेमाल नागरिकता के दस्तावेज की तरह और विदेश मंत्रालय से जुड़ी इस आशय की मीडिया रिपोर्ट्स पर सूत्रों ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट का नागरिकता का प्रमाण नहीं होना कोई नया निर्णय नहीं है। ये भी दिलचस्प है कि पासपोर्ट अधिनियम 1967 के अनुसार, गैर-नागरिकों (भारत के बाहर के लोग) को भी पासपोर्ट मिल सकते हैं। मुंबई उच्च न्यायालय ने 2013 में एक अहम आदेश में इसे स्पष्ट भी किया था। साल 2019 में प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) पर जारी एक बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा था कि नागरिकता जन्मतिथि और जन्मस्थान के दस्तावेज से सिद्ध हो सकती है। हालांकि, स्वीकार्य दस्तावेज पर निर्णय अभी बाकी है। ये भी रोचक है कि देश के लोगों को भारत की नागरिकता 2009 में तय किए गए नियमों के तहत पांच तरीकों से मिलती है।
पुलिस सत्यापन को छोड़कर पासपोर्ट बनने में कितने दिन लगते हैं?
नागरिकता से जुड़े मुद्दे से इतर विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट को लेकर कई और भी सूचनाएं साझा कीं। सरकार के मुताबिक साल 2025 में 1.5 करोड़ पासपोर्ट और संबंधित सेवाएं प्रदान की गईं, जिनमें 1.39 करोड़ पासपोर्ट शामिल हैं। पुलिस सत्यापन को छोड़कर पासपोर्ट छह दिन में जारी हो रहा है। वहीं, पिछले 10 वर्षों में देश में पासपोर्ट केंद्रों की संख्या 77 से बढ़कर 545 हो गई है। जबकि भारतीयों के लिए 27 देशों में वीजा-फ्री, 47 में वीजा ऑन अराइवल और 66 देशों में ई-वीजा की सुविधा उपलब्ध है।
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2025 में कितने पासपोर्ट जारी किए गए?
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा है कि भारत में पासपोर्ट सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है और लोगों को पहले की तुलना में अधिक तेज और सुविधाजनक सेवाएं मिल रही हैं। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में देशभर में 1.5 करोड़ पासपोर्ट और उससे जुड़ी सेवाएं प्रदान की गईं। इनमें केवल पासपोर्ट जारी करने की संख्या 1.39 करोड़ रही।
यह भी पढ़ें- Jairam Ramesh: 'नेहरू देश के बेस्ट PM थे, पटेल वो सबसे अच्छे पीएम जो बन नहीं सके', जयराम रमेश का बड़ा बयान
आवेदकों को सरकार की तरफ से कितनी सुविधाएं?
अधिकारी ने बताया कि पुलिस सत्यापन (पुलिस वेरिफिकेशन) की प्रक्रिया को छोड़कर पासपोर्ट जारी करने में औसतन छह कार्य दिवस का समय लग रहा है। वहीं, पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीएसके) और पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीओपीएसके) में लोगों का औसत समय 45 मिनट से भी कम रह गया है, जिससे आवेदकों को काफी सुविधा मिल रही है।
10 वर्ष पहले देश में कितने पासपोर्ट केंद्र थे?
पासपोर्ट सेवा नेटवर्क के विस्तार पर उन्होंने कहा कि 10 वर्ष पहले देश में केवल 77 पासपोर्ट केंद्र थे, जबकि अब उनकी संख्या बढ़कर 545 हो गई है। यानी पिछले एक दशक में केंद्रों की संख्या में लगभग छह गुना वृद्धि हुई है। मंत्रालय ने पिछले वर्ष 10 नए पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले थे और इस वर्ष भी 10 नए केंद्र शुरू किए जाएंगे।
क्या भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए विदेश यात्राएं आसान हुईं?
विदेश यात्रा के लिहाज से भी भारतीय नागरिकों के लिए स्थिति बेहतर हुई है। अधिकारी के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट धारकों को अब 27 देशों में वीजा-फ्री (बिना वीजा) प्रवेश की सुविधा मिलती है। वर्ष 2019 में यह संख्या 16 थी। इसके अलावा 47 देश भारतीयों को वीजा ऑन अराइवल (पहुंचने पर वीजा) की सुविधा देते हैं, जबकि 66 देश ई-वीजा उपलब्ध कराते हैं।
यह भी पढ़ें- Ketan Murder Case: मां ने दोषियों को फांसी देने की मांग की, पिता ने कहा- सिया ने बेटे की मौत की सच्चाई छिपाई
यूरोपीय देशों के साथ मोबिलिटी एग्रीमेंट से क्या फायदा?
अधिकारी ने बताया कि भारत ने खासकर यूरोपीय देशों के साथ कई मोबिलिटी एग्रीमेंट किए हैं। इन समझौतों का लाभ छात्रों, शिक्षाविदों, प्रशिक्षुओं, पर्यटकों और कारोबारियों को मिलेगा। साथ ही, अवैध रूप से विदेशों में रह रहे प्रवासियों की वापसी को आसान बनाने के लिए भी एक व्यवस्थित तंत्र तैयार किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि इन कदमों से भारतीय नागरिकों की वैश्विक आवाजाही और विदेश यात्रा पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक बन रही है।
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नागरिकता और पासपोर्ट के रिश्ते पर सरकार क्या बोली?
पासपोर्ट का इस्तेमाल नागरिकता के दस्तावेज की तरह और विदेश मंत्रालय से जुड़ी इस आशय की मीडिया रिपोर्ट्स पर सूत्रों ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट का नागरिकता का प्रमाण नहीं होना कोई नया निर्णय नहीं है। ये भी दिलचस्प है कि पासपोर्ट अधिनियम 1967 के अनुसार, गैर-नागरिकों (भारत के बाहर के लोग) को भी पासपोर्ट मिल सकते हैं। मुंबई उच्च न्यायालय ने 2013 में एक अहम आदेश में इसे स्पष्ट भी किया था। साल 2019 में प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) पर जारी एक बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा था कि नागरिकता जन्मतिथि और जन्मस्थान के दस्तावेज से सिद्ध हो सकती है। हालांकि, स्वीकार्य दस्तावेज पर निर्णय अभी बाकी है। ये भी रोचक है कि देश के लोगों को भारत की नागरिकता 2009 में तय किए गए नियमों के तहत पांच तरीकों से मिलती है।
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पुलिस सत्यापन को छोड़कर पासपोर्ट बनने में कितने दिन लगते हैं?
नागरिकता से जुड़े मुद्दे से इतर विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट को लेकर कई और भी सूचनाएं साझा कीं। सरकार के मुताबिक साल 2025 में 1.5 करोड़ पासपोर्ट और संबंधित सेवाएं प्रदान की गईं, जिनमें 1.39 करोड़ पासपोर्ट शामिल हैं। पुलिस सत्यापन को छोड़कर पासपोर्ट छह दिन में जारी हो रहा है। वहीं, पिछले 10 वर्षों में देश में पासपोर्ट केंद्रों की संख्या 77 से बढ़कर 545 हो गई है। जबकि भारतीयों के लिए 27 देशों में वीजा-फ्री, 47 में वीजा ऑन अराइवल और 66 देशों में ई-वीजा की सुविधा उपलब्ध है।
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2025 में कितने पासपोर्ट जारी किए गए?
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा है कि भारत में पासपोर्ट सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है और लोगों को पहले की तुलना में अधिक तेज और सुविधाजनक सेवाएं मिल रही हैं। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में देशभर में 1.5 करोड़ पासपोर्ट और उससे जुड़ी सेवाएं प्रदान की गईं। इनमें केवल पासपोर्ट जारी करने की संख्या 1.39 करोड़ रही।
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आवेदकों को सरकार की तरफ से कितनी सुविधाएं?
अधिकारी ने बताया कि पुलिस सत्यापन (पुलिस वेरिफिकेशन) की प्रक्रिया को छोड़कर पासपोर्ट जारी करने में औसतन छह कार्य दिवस का समय लग रहा है। वहीं, पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीएसके) और पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीओपीएसके) में लोगों का औसत समय 45 मिनट से भी कम रह गया है, जिससे आवेदकों को काफी सुविधा मिल रही है।
10 वर्ष पहले देश में कितने पासपोर्ट केंद्र थे?
पासपोर्ट सेवा नेटवर्क के विस्तार पर उन्होंने कहा कि 10 वर्ष पहले देश में केवल 77 पासपोर्ट केंद्र थे, जबकि अब उनकी संख्या बढ़कर 545 हो गई है। यानी पिछले एक दशक में केंद्रों की संख्या में लगभग छह गुना वृद्धि हुई है। मंत्रालय ने पिछले वर्ष 10 नए पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले थे और इस वर्ष भी 10 नए केंद्र शुरू किए जाएंगे।
क्या भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए विदेश यात्राएं आसान हुईं?
विदेश यात्रा के लिहाज से भी भारतीय नागरिकों के लिए स्थिति बेहतर हुई है। अधिकारी के अनुसार, भारतीय पासपोर्ट धारकों को अब 27 देशों में वीजा-फ्री (बिना वीजा) प्रवेश की सुविधा मिलती है। वर्ष 2019 में यह संख्या 16 थी। इसके अलावा 47 देश भारतीयों को वीजा ऑन अराइवल (पहुंचने पर वीजा) की सुविधा देते हैं, जबकि 66 देश ई-वीजा उपलब्ध कराते हैं।
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यूरोपीय देशों के साथ मोबिलिटी एग्रीमेंट से क्या फायदा?
अधिकारी ने बताया कि भारत ने खासकर यूरोपीय देशों के साथ कई मोबिलिटी एग्रीमेंट किए हैं। इन समझौतों का लाभ छात्रों, शिक्षाविदों, प्रशिक्षुओं, पर्यटकों और कारोबारियों को मिलेगा। साथ ही, अवैध रूप से विदेशों में रह रहे प्रवासियों की वापसी को आसान बनाने के लिए भी एक व्यवस्थित तंत्र तैयार किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि इन कदमों से भारतीय नागरिकों की वैश्विक आवाजाही और विदेश यात्रा पहले की तुलना में अधिक सरल और सुविधाजनक बन रही है।