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Mahua: महुआ मोइत्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट का किया रुख, सरकारी आवास खाली करने के आदेश के खिलाफ दायर की याचिका
Mon, 18 Dec 2023 07:46 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Mon, 18 Dec 2023 07:46 PM IST
सार
टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा की लोकसभा सदस्यता रद्द होने के बाद उन्हें सात जनवरी तक मिले आवास को भी खाली करना पड़ेगा। लेकिन मोइत्रा ने इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
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महुआ मोइत्रा (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महुआ मोइत्रा पर लगे 'रिश्वत के बदले सवाल' पूछने के आरोप के चलते लोकसभा स्पीकर ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी थी। महुआ मोइत्रा को सांसद के तौर पर मिले आवास को सात जनवरी तक खाली करने के निर्देश दिए गए है। आदेश के खिलाफ टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की संभावना है। हाईकोर्ट में दायर याचिका में उन्होंने कहा कि संपदा निदेशालय का आदेश लोकसभा से उनके निष्कासन के बाद जारी किया गया है। मोइत्रा की याचिका में कहा गया है, आगामी आदेश समय से पहले दिया गया है क्योंकि याचिकाकर्ता के निष्कासन की वैधता भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समाने लंबित है।
मोइत्रा द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि सरकारी आवास पर सही तरीके से कब्जा करने के याचिकाकर्ता के दावे पर जब विधिवत फैसला सुनाया जाता है, तभी संपत्ति कार्यालय/प्रतिवादी नंबर-1 के अधिकार क्षेत्र का सवाल उठता है। मोइत्रा ने कहा कि वह 2019 के आम चुनावों में पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार लोकसभा के लिए चुनी गई और उनकी पार्टी ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भी वहां से अपना उम्मीदवार चुना है।
याचिका में उन्होंने कहा कि इसमें कहा गया है कि चूंकि लोकसभा से निष्कासन उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य नहीं ठहराता, इसलिए वह फिर से चुनाव लड़ेंगी। उन्हें अपना समय और ऊर्जा अपने मतदाताओं पर केंद्रित करने की आवश्यकता होगी। साथ ही उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि वह दिल्ली में अकेली रह रही हैं और उनके पास यहां कोई अन्य निवास स्थान या वैकल्पिक आवास नहीं है। यदि उन्हें सरकारी आवास से बेदखल किया जाता है, तो उन्हें चुनाव प्रचार के कर्तव्यों को पूरा करना होगा और साथ ही नया घर भी ढूंढना होगा।
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क्या है मामला
बता दें मोइत्रा को अनैतिक आचरण का दोषी ठहराया गया था और आठ दिसंबर, 2023 को व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी से गिफ्ट लेने और उनके साथ संसद वेबसाइट की अपनी यूजर आईडी और पासवर्ड साझा करने के लिए लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। लोकसभा द्वारा उन्हें बाहर करने की सिफारिश करने वाली आचार समिति की रिपोर्ट को अपनाने के बाद उन्होंने पहले ही अपने निष्कासन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। मामले को तीन जनवरी 2024 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
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मोइत्रा द्वारा दायर याचिका में कहा गया कि सरकारी आवास पर सही तरीके से कब्जा करने के याचिकाकर्ता के दावे पर जब विधिवत फैसला सुनाया जाता है, तभी संपत्ति कार्यालय/प्रतिवादी नंबर-1 के अधिकार क्षेत्र का सवाल उठता है। मोइत्रा ने कहा कि वह 2019 के आम चुनावों में पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार लोकसभा के लिए चुनी गई और उनकी पार्टी ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए भी वहां से अपना उम्मीदवार चुना है।
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याचिका में उन्होंने कहा कि इसमें कहा गया है कि चूंकि लोकसभा से निष्कासन उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य नहीं ठहराता, इसलिए वह फिर से चुनाव लड़ेंगी। उन्हें अपना समय और ऊर्जा अपने मतदाताओं पर केंद्रित करने की आवश्यकता होगी। साथ ही उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि वह दिल्ली में अकेली रह रही हैं और उनके पास यहां कोई अन्य निवास स्थान या वैकल्पिक आवास नहीं है। यदि उन्हें सरकारी आवास से बेदखल किया जाता है, तो उन्हें चुनाव प्रचार के कर्तव्यों को पूरा करना होगा और साथ ही नया घर भी ढूंढना होगा।
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क्या है मामला
बता दें मोइत्रा को अनैतिक आचरण का दोषी ठहराया गया था और आठ दिसंबर, 2023 को व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी से गिफ्ट लेने और उनके साथ संसद वेबसाइट की अपनी यूजर आईडी और पासवर्ड साझा करने के लिए लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। लोकसभा द्वारा उन्हें बाहर करने की सिफारिश करने वाली आचार समिति की रिपोर्ट को अपनाने के बाद उन्होंने पहले ही अपने निष्कासन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है। मामले को तीन जनवरी 2024 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।