{"_id":"59d5cda24f1c1ba0538b5d48","slug":"mahatma-gandhi-murder-case-pil-reopening-october-6","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"ग्वालियर से जुड़े हैं महात्मा गांधी की हत्या के तार? याचिका दायर, कल सुनवाई","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
ग्वालियर से जुड़े हैं महात्मा गांधी की हत्या के तार? याचिका दायर, कल सुनवाई
टीम डिजिटल, अमर उजाला
Updated Thu, 05 Oct 2017 01:22 PM IST
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mahatma gandhi
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महात्मा गांधी की 148वीं जयंती के साल में भी कई लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल हैं जैसे किस पिस्टल से गांधी की जान ली गई, उनको कितनी गोलियां मारी गईं और क्या कोई दूसरा भी शूटर था। अब महात्मा गांधी की हत्या से जुड़े केस को फिर से खोलने के लिए याचिका दायर की गई है जिसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में छह अक्टूबर को होगी।
यह याचिका वीर सावरकर को मानने वाले डॉ पंकज पधानी ने दायर की है। पंकज ने जनहित याचिका में सवाल उठाया है कि गांधी पर तीन नहीं बल्कि चार गोलियां चलाई गई थीं। याचिका पहले हाई कोर्ट में दायर की गई थी जिसको रद्द कर दिया गया था अब उसे सुप्रीम कोर्ट में दायर किया गया है।
पढ़ें: क्या आप जानते हैं गोडसे ने क्यों की महात्मा गांधी की हत्या?
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याचिका में कहा गया है कि एक बजे के करीब जब बापू को नहलाने के लिए लाया गया तो सब रो रहे थे। उनकी धोती, शॉल और रुमाल पूरी तरह से खून में रंगे हुए थे। तब कपड़ों से एक चौथी गोली निकल कर आई थी। यह बात पंकज ने मनुबेन की डायरी को आधार बनाकर कही है। मनुबेन उस दिन गांधी के साथ थीं।
याचिका के साथ मई 1948 का एक पत्र भी शामिल है। पत्र दिल्ली के आई जी पुलिस ने साइंटफिक लेब के डायरेक्टर को लिखा था। पूछा गया था कि क्या चौथी गोली उन बंदूकों में से किसी एक से निकली है जिनको ग्वालियर से जब्त किया गया था। पत्र के जवाब में डायरेक्टर ने इस बात से इंकार किया कि गोली जब्त की गई किसी बंदूक से चलाई गई।
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यह याचिका वीर सावरकर को मानने वाले डॉ पंकज पधानी ने दायर की है। पंकज ने जनहित याचिका में सवाल उठाया है कि गांधी पर तीन नहीं बल्कि चार गोलियां चलाई गई थीं। याचिका पहले हाई कोर्ट में दायर की गई थी जिसको रद्द कर दिया गया था अब उसे सुप्रीम कोर्ट में दायर किया गया है।
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याचिका में कहा गया है कि एक बजे के करीब जब बापू को नहलाने के लिए लाया गया तो सब रो रहे थे। उनकी धोती, शॉल और रुमाल पूरी तरह से खून में रंगे हुए थे। तब कपड़ों से एक चौथी गोली निकल कर आई थी। यह बात पंकज ने मनुबेन की डायरी को आधार बनाकर कही है। मनुबेन उस दिन गांधी के साथ थीं।
याचिका के साथ मई 1948 का एक पत्र भी शामिल है। पत्र दिल्ली के आई जी पुलिस ने साइंटफिक लेब के डायरेक्टर को लिखा था। पूछा गया था कि क्या चौथी गोली उन बंदूकों में से किसी एक से निकली है जिनको ग्वालियर से जब्त किया गया था। पत्र के जवाब में डायरेक्टर ने इस बात से इंकार किया कि गोली जब्त की गई किसी बंदूक से चलाई गई।
क्या है ग्वालियर कनेक्शन?
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी
जिस बंदूक से गांधी की हत्या हुई वह कथित रूप से ग्वालियर के डॉ दत्तात्रेय द्वारा मुहैया करवाई गई थी। दत्तात्रेय के पास दो पिस्टल थीं जिसमें से उसने एक ही गोडसे तक पहुंचाई थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, दूसरी बंदूक जो गोडसे तक नहीं पहुंची थी उसका सीरियल नंबर 719791 था और ठीक इसी सीरियल नंबर की बंदूक ग्वालियर के ही उदय चंद नाम के शख्स पर भी थी।
गांधी को जिस पिस्टल से मारा गया उसका रजिस्ट्रेशन नंबर 606824 था। दोनों पिस्टल को बाद में जब्त कर लिया था। पहली मौका ए वारदात पर और दूसरी दत्तात्रेय के घर से मिली थी।
एक सीरियल नंबर की दो बंदूक कैसे थीं और दूसरी बंदूक जब गोडसे तक पहुंची नहीं तो गोली उससे चली या नहीं यह क्यों चेक करवाया गया यह अबतक साफ नहीं है।
गांधी को जिस पिस्टल से मारा गया उसका रजिस्ट्रेशन नंबर 606824 था। दोनों पिस्टल को बाद में जब्त कर लिया था। पहली मौका ए वारदात पर और दूसरी दत्तात्रेय के घर से मिली थी।
एक सीरियल नंबर की दो बंदूक कैसे थीं और दूसरी बंदूक जब गोडसे तक पहुंची नहीं तो गोली उससे चली या नहीं यह क्यों चेक करवाया गया यह अबतक साफ नहीं है।