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Updates: 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर बुजुर्ग से 16.50 लाख की ठगी; पुणे में 2 करोड़ की ड्रग्स जब्त, पुलिस पर सवाल

Thu, 22 Jan 2026 02:30 AM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 22 Jan 2026 02:30 AM IST
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Maharashtra Updates of 22 Jan, Maharashtra News, Devendra Fadnavis, Mahayuti, BMC Mayor, Mumbai, Thane, Crime
महाराष्ट्र की बड़ी खबरें - फोटो : अमर उजाला
मुंबई के अंधेरी ईस्ट इलाके में रहने वाले 75 वर्षीय रिटायर्ड बीएमसी अधिकारी से साइबर ठगों ने 16.50 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को दिल्ली एटीएस और एनआईए का अधिकारी बताकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखा और डराया कि उनका नाम दिल्ली बम धमाके के मामले में आया है।
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पुलिस के अनुसार, 11 दिसंबर को बुजुर्ग को एक फोन आया। कॉल करने वाले ने बताया कि उनके मोबाइल नंबर से जुड़े एक बैंक खाते में मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए 7 करोड़ रुपये आए हैं। इसके बाद उनसे कहा गया कि वे जांच के लिए सिग्नल ऐप डाउनलोड करें। वीडियो कॉल पर एक व्यक्ति ने खुद को एनआईए अधिकारी सदानंद दाते बताया। ठगों ने कहा कि मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए किसी को बताने पर तुरंत गिरफ्तारी हो जाएगी। फिर बुजुर्ग से उनके पैसे जांच के लिए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाए गए। डर के कारण उन्होंने 16.50 लाख रुपये भेज दिए। पैसे मिलते ही ठगों ने उनका नंबर ब्लॉक कर दिया। इसके बाद पीड़ित ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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पुणे में 2 करोड़ की ड्रग्स जब्त, पुलिसकर्मी की भूमिका पर सवाल
पुणे जिले के शिरूर तहसील में पुलिस ने एक ऑटोमोबाइल गैरेज मालिक शादाब शेख को गिरफ्तार कर उसके पास से 1 किलो मेफेड्रोन ड्रग्स जब्त की है, जिसकी बाजार कीमत करीब 2 करोड़ रुपये बताई जा रही है। पुणे ग्रामीण पुलिस को 17 जनवरी को सूचना मिली थी कि एक गैरेज मालिक नशीले पदार्थ जमा करके रखता है। इसके बाद पुलिस ने जाल बिछाकर बाबूराव नगर इलाके से आरोपी को पकड़ा। पूछताछ में पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस ड्रग्स रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब एनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि इस ड्रग्स तस्करी में कुछ पुलिसकर्मी भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आरोपी ने बताया है कि उसे ड्रग्स एक पुलिसकर्मी ने सप्लाई की थी, जो अहिल्यानगर से जुड़ा है। रोहित पवार ने मांग की कि अगर पुलिस के लोग ही ड्रग माफिया का साथ दे रहे हैं, तो यह राज्य के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने पूरे मामले की गहराई से जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

टिकट न मिलने से नाराज युवक का विधायक कार्यालय के बाहर प्रदर्शन
महाराष्ट्र के लातूर जिले के उदगीर तहसील में एक अजीबो-गरीब विरोध प्रदर्शन सामने आया है। एक युवक ने अपने पिता को जिला परिषद चुनाव का टिकट न मिलने से नाराज होकर एनसीपी विधायक संजय बनसोडे के कार्यालय के बाहर पेशाब कर दिया। इस युवक का नाम नितिन एकुरकेकर है। उसके पिता माधुकर एकुरकेकर लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता हैं और वे निडेबन इलाके से जिला परिषद चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। इस फैसले से नाराज होकर नितिन ने विधायक के दफ्तर के बाहर विरोध जताया और इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर डाल दिया। वीडियो वायरल होने के बाद विवाद बढ़ा, तो उसने उसे हटा दिया।

माधुकर एकुरकेकर के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम किया, फिर भी उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। इससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। बता दें कि महाराष्ट्र में 5 फरवरी को 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनाव होने हैं, जिनके नतीजे दो दिन बाद घोषित किए जाएंगे।
 
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मुआवजे में देरी पर कोर्ट सख्त, कलेक्टर की कुर्सी जब्त करने का आदेश
छत्रपति संभाजीनगर में किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देने में देरी करना जिला प्रशासन को भारी पड़ गया। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कलेक्टर की कुर्सी जब्त करने का आदेश तक दे दिया। यह मामला एक सिंचाई परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई जमीन से जुड़ा है, जिसमें किसानों को अब तक पूरा मुआवजा नहीं मिला था। सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत ने जिला प्रशासन को आदेश दिया था कि किसानों को 2.22 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए। लेकिन प्रशासन ने तय समय पर इस आदेश का पालन नहीं किया। इसके बाद अदालत ने मंगलवार को कलेक्टर की कुर्सी जब्त करने का आदेश जारी कर दिया। यह आदेश प्रशासन के लिए बड़ी शर्मिंदगी का कारण बन सकता था।

जब याचिकाकर्ता किसानों के वकील और कोर्ट का एक अधिकारी कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, तब प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद जिला प्रशासन ने लिखित में आश्वासन दिया कि वह आठ सप्ताह के भीतर किसानों को पूरे 2.22 करोड़ रुपये का भुगतान कर देगा। इस लिखित आश्वासन के बाद फिलहाल कलेक्टर की कुर्सी जब्त करने की कार्रवाई टाल दी गई। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर तय समय में मुआवजा नहीं दिया गया, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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