Maharashtra: शिंदे बोले- मराठी भाषा लोगों को एकजुट करने वाली ताकत; लाभ समर्पण योजना का किया शुभारंभ
Maharashtra: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि मराठी भाषा मराठा समुदाय की संस्कृति, परंपरा और इतिहास का प्रतीक है। इसने दुनियाभर के लोगों के बीच एकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को कहा कि मराठी भाषा समुदाय की संस्कृति, परंपरा और इतिहास का प्रतीक है और इसने दुनियाभर के लोगों के बीच एकजुटता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। यह बात उन्होंने 'विश्व मराठी सम्मेलन-2024' के शुभारंभ के मौके पर कही। उन्होंने राज्य सरकार के मराठी भाषा विभाग के कामों की भी सराहना की।
उन्होंने कहा, मराठी भाषा समुदाय की संस्कृति, परंपरा और इतिहास का प्रतीक है। इसने दुनिया भर के लोगों के बीच एकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, विश्व मराठी सम्मेलन-2024 दुनियाभर में मराठी समुदाय को अपनी भाषा और विरासत का जश्न मनाने के लिए एक मंच प्रदान करता है। शिंदे ने आगे कहा, आज की पीढ़ी की प्राथमिकताओं के साथ मराठी साहित्य को जोड़ने की जरूरत है। मराठी लेखकों को युवाओं की भाषा समझनी चाहिए और उनके मुताबिक साहित्य तैयार करना चाहिए।
उन्होंने दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर महाराष्ट्र के 3.53 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर की भी जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा, राज्य देश के विकास का इंजन है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को पांच हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के सपने को पूरा करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने विदेश से मराठी उद्यमियों को राज्य में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया और अपनी सरकार से हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
शिंदे ने लाभ समर्पण योजना का किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री ने आज 'धर्मवीर श्री आनंद दिघे लाभ समर्पण योजना' का भी शुभारंभ किया। इस योजना का मकसद आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाले लाभों को छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। योजना का नाम शिंदे के मार्गदर्शक दिवंगत आनंद दिघे के नाम पर रखा गया है, जो ठाणे के बेहद लोकप्रिय शिवसेना नेता थे।
इस दौरान शिंदे ने कहा कि उनकी सरकार समाज के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और पूरे राज्य के लोगों को एक परिवार मानती है। उन्होंने मराठाओं के मुद्दे पर सरकार द्वारा उठाए कदम के बारे में भी बात की। उन्होंने आनंद आश्रम में अपने मार्गदर्शक की जयंती पर श्रद्धांजलि दी। आनंद आश्रम से आनंद दिघे शिवसेना का संचालन किया करते थे।