महाराष्ट्र: कुर्सी बचाने को उद्धव ठाकरे ने मांगी पीएम मोदी से मदद, राज्यपाल के निर्णय पर टिका शिवसेना प्रमुख का भविष्य
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद मांगी। सूत्रों का दावा है कि ठाकरे ने पीएम मोदी से मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। दरअसल उद्धव ठाकरे के विधान परिषद में राज्यपाल नामित सदस्य के तौर पर नियुक्ति का निर्णय फिलहाल राजभवन में लंबित है। सूत्रों का कहना है कि ठाकरे ने पीएम मोदी से इस बारे में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से बात कर अपना रास्ता साफ कराने का आग्रह किया है।
सूत्रों का कहना है कि ठाकरे ने पीएम मोदी से फोन पर वार्ता की और राज्यपाल का निर्णय लंबित होनेको राज्य में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश बताया। उन्होंने कोरोना संकट के समय महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य में राजनीतिक संकट के हालात को गलत बताया और पीएम से इसमें दखल देने की गुहार लगाई।
शिवसेना, कांग्रेस व एनसीपी के सत्ताधारी महा विकास आघाड़ी (एमवीए) के नेताओं द्वारा राज्यपाल से मुलाकात करने के एक दिन बाद उद्धव ने मोदी को फोन किया है। सूत्रों का कहना है कि उप मुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व में गए एमवीए नेताओं ने राज्यपाल को कैबिनेट के निर्णय की प्रति दोबारा सौंपते हुए उस पर जल्द से जल्द निर्णय लेने की गुहार लगाई। राज्यपाल ने एक सप्ताह का समय मांगा है।
इससे पहले 9 अप्रैल को कैबिनेट ने ठाकरे को विधान परिषद में राज्यपाल नामित सदस्य के तौर पर नियुक्त करने का निर्णय लेने के बाद राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा था। लेकिन इस पर अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है।
दरअसल ठाकरे का 6 महीने का कार्यकाल 28 मई को पूरा हो रहा है। उन्हें इससे पहले नियमानुसार विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना होगा। लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण टाल दिए गए उपचुनावों के चलते उद्धव निर्वाचन हासिल नहीं कर पाए हैं। ऐसे में 18 मई को उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है।
सरकार के समर्थन में राज्यपाल से मिले छोटे दल
महाराष्ट्र में राज्य सरकार को समर्थन दे रही चार छोटी पार्टियों के नेता बुधवार को राज्यपाल कोश्यारी से मिलने पहुंचे। इन नेताओं ने राज्यपाल से गुहार लगाई कि वे सीएम ठाकरे को विधान परिषद में नामित करने के प्रस्ताव पर जल्द निर्णय लें। राज्यपाल को सौंपे संयुक्त पत्र में पिजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी, जनता दल (एस), स्वाभिमानी शेतकारी संगठन और आरपीआई (एस) के नेताओं ने आग्रह किया है।
यदि राज्यपाल ने नामांकन अस्वीकार किया तो क्या हैं विकल्प
राज्यपाल कोश्यारी ने मंत्रिमंडल की सिफारिश पर फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया है। ऐसे में यदि वह प्रस्ताव को अस्वीकार कर देते हैं तो ठाकरे के पास केवल दो विकल्प बचेंगे। पहला, तीन मई को लॉकडाउन खत्म होने के बाद आयोग विधान परिषद की खाली सीटों के लिए चुनाव की घोषणा करे और 28 मई से पहले प्रक्रिया खत्म करके नतीजे घोषित करे।दूसरा, चुनाव न होने की स्थिति में ठाकरे को अपने पद से इस्तीफा देना होगा और दोबारा पद की शपथ लेनी होगी। इससे उन्हें दोबारा छह महीने का वक्त मिल जाएगा। हालांकि इसमें पेंच यह है कि मुख्यमंत्री के साथ पूरे मंत्रिमंडल को भी इस्तीफा देना होगा और उन्हें भी दोबारा शपथ लेनी होगी।