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आदिवासी बच्चों को मिलेगी सेक्स व स्वच्छता की शिक्षा
amarujala.com- Presented by: अभिषेक तिवारी
Updated Tue, 06 Jun 2017 09:26 AM IST
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Tribal children
- फोटो : फाइल फोटो
अब जल्द ही महाराष्ट्र सरकार जनजातीय बच्चों को सेक्स और स्वच्छता की शिक्षा मुहैया कराएंगी। इसके लिए महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में 543 सरकारी आश्रम विद्यालयों में दाखिला वाले आदिवासी बच्चों तक पहुंचने के लिए यूनिसेफ के साथ हाथ मिलाया है। माना जा रहा है कि यह देश की सबसे बड़ी सेक्स शिक्षा की पहल है।
महाराष्ट्र के आवासीय जनजातीय बोर्डिंग स्कूलों में 12 वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों को जल्द ही सेक्स और प्रजनन स्वास्थ्य के विषयों पर नियमित रूप से शिक्षा दी जाएगी। इसके साथ ही बच्चों को लिंग संवेदनशीलता, गर्भावस्था और व्यक्तिगत स्वच्छता पर भी सबक दिया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक देश में शायद यह सबसे बड़ी सरकार है जिसने यौन शिक्षा की इतनी बड़ी पहल की है। सरकार ने इसके लिए यूनिसेफ के साथ हाथ मिला लिया है।इस बात की घोषणा महाराष्ट्र के आदिवासी मंत्री विष्णु सावरा ने की है। आदिवासी विभाग सचिव मनीषा वर्मा ने कहा कि करीब 1 लाख छात्रों को इसका फायदा मिलेगा।
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मामले में एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि जब किसी बच्चे को आवासीय विद्यालय में नामांकित किया जाता है, तो तब तक वह वहां रहता है जब तक कि उनकी शिक्षा पूरी नहीं हो जाती। आगे उन्होंने कहा कि प्रजनन स्वास्थ्य और लैंगिक विज्ञान की शिक्षा पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए इसकी जानकारी उनको नहीं मिल पाती है। यह योजना युवाओं को लैंगिक शारीरिक रचना और लिंग के मुद्दों पर संवेदनशील बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।
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महाराष्ट्र के आवासीय जनजातीय बोर्डिंग स्कूलों में 12 वर्ष से कम उम्र के सभी बच्चों को जल्द ही सेक्स और प्रजनन स्वास्थ्य के विषयों पर नियमित रूप से शिक्षा दी जाएगी। इसके साथ ही बच्चों को लिंग संवेदनशीलता, गर्भावस्था और व्यक्तिगत स्वच्छता पर भी सबक दिया जाएगा।
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जानकारी के मुताबिक देश में शायद यह सबसे बड़ी सरकार है जिसने यौन शिक्षा की इतनी बड़ी पहल की है। सरकार ने इसके लिए यूनिसेफ के साथ हाथ मिला लिया है।इस बात की घोषणा महाराष्ट्र के आदिवासी मंत्री विष्णु सावरा ने की है। आदिवासी विभाग सचिव मनीषा वर्मा ने कहा कि करीब 1 लाख छात्रों को इसका फायदा मिलेगा।
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मामले में एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि जब किसी बच्चे को आवासीय विद्यालय में नामांकित किया जाता है, तो तब तक वह वहां रहता है जब तक कि उनकी शिक्षा पूरी नहीं हो जाती। आगे उन्होंने कहा कि प्रजनन स्वास्थ्य और लैंगिक विज्ञान की शिक्षा पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए इसकी जानकारी उनको नहीं मिल पाती है। यह योजना युवाओं को लैंगिक शारीरिक रचना और लिंग के मुद्दों पर संवेदनशील बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।