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महाराष्ट्र: ठाणे कोर्ट ने पांच लोगों को किया बरी, 2016 में हत्या, डकैती के मामले में थे आरोपी
Sat, 18 May 2024 02:52 PM IST
मेघा झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा झा
Updated Sat, 18 May 2024 02:52 PM IST
सार
2016 में हुई एक हत्या और डकैती के मामले में पांच लोगों को ठाणे की एक अदालत ने बरी कर दिया है। इनमें से एक आरोपी महिला भी थी। अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश करने में विफल रहा था।
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अदालत(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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2016 में हुई एक हत्या और डकैती के मामले शनिवार को पांच लोगों को ठाणे की एक अदालत ने बरी कर दिया है। इनमें से एक आरोपी महिला भी थी। अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ सबूत पेश करने में विफल रहा था।
विशेष लोक अभियोजक संजय मोरे ने बताया कि 18, 19 जुलाई 2016 में मुंब्रा इलाके में सब्बर खान पर हमला किया गया था। उनका कीमती सामान लूटा गया और जानलेवा हमला किया गया। जिसके बाद सब्बर खान को जख्मी हालत में अस्पताल ले जाया गया। जहां उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत हत्या, डकैती, हत्या के साथ डकैती समेत कई आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था।
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मामले की सुनवाई के दौरान एक अन्य आरोपी मोसिन रफीक शेख की मृत्यु हो गई थी। वहीं नासिर सगीर शाह, रिजवान रियासाद सैय्यद, जावेद उर्फ मामू हबीब शेख, अस्मा कुरैशी, अब्दुल रहीम रहमान बिहारी भी आरोपी थे। विशेष न्यायाधीश अमित एम शेटे ने मामले की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष की कहानी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित थी। परिस्थितियों की श्रृंखला में आरोपियों की सक्रिय भागीदारी गायब थी।
उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी आरोपियों के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए सामग्री रिकॉर्ड पर लाने में विफल रहे। उन्होंने यह भी कहा कि पुख्ता सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी किया जाता है।
विशेष लोक अभियोजक संजय मोरे ने बताया कि 18, 19 जुलाई 2016 में मुंब्रा इलाके में सब्बर खान पर हमला किया गया था। उनका कीमती सामान लूटा गया और जानलेवा हमला किया गया। जिसके बाद सब्बर खान को जख्मी हालत में अस्पताल ले जाया गया। जहां उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
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आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत हत्या, डकैती, हत्या के साथ डकैती समेत कई आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था।
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मामले की सुनवाई के दौरान एक अन्य आरोपी मोसिन रफीक शेख की मृत्यु हो गई थी। वहीं नासिर सगीर शाह, रिजवान रियासाद सैय्यद, जावेद उर्फ मामू हबीब शेख, अस्मा कुरैशी, अब्दुल रहीम रहमान बिहारी भी आरोपी थे। विशेष न्यायाधीश अमित एम शेटे ने मामले की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष की कहानी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित थी। परिस्थितियों की श्रृंखला में आरोपियों की सक्रिय भागीदारी गायब थी।
उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी आरोपियों के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए सामग्री रिकॉर्ड पर लाने में विफल रहे। उन्होंने यह भी कहा कि पुख्ता सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी किया जाता है।