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महाराष्ट्र : राज्य सरकार ने कोर्ट से कहा- परमबीर सिंह को 15 जून तक गिरफ्तार नहीं करेंगे

Thu, 10 Jun 2021 08:10 PM IST
योगेश साहू पीटीआई, मुंबई।
पीटीआई, मुंबई। Published by: योगेश साहू Updated Thu, 10 Jun 2021 08:10 PM IST
सार

जांच संबंधी पहला आदेश एक अप्रैल को राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख ने अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर पारित किया गया था।

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Maharashtra: State government told the court will not arrest Parambir Singh till June 15
Parambir Singh - फोटो : ANI

विस्तार

महाराष्ट्र सरकार ने बृहस्पतिवार को बंबई उच्च न्यायालय से कहा कि वह मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ एससी/एसटी (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज मामले में 15 जून तक उन्हें गिरफ्तार नहीं करेगी। राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील डेरियस खंबाटा ने अपने शुरुआती बयान में कहा कि पुलिस सिंह को 15 जून तक गिरफ्तार नहीं करेगी।

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न्यायमूर्ति एस एस शिंदे और न्यायमूर्ति एनजे जमादार ने पुलिस निरीक्षक भीमराव घाडगे की शिकायत पर सिंह के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी खारिज करने का अनुरोध करने वाली मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त की याचिका पर सुनवाई 14 जून तक के लिए स्थगित कर दी। सिंह ने राज्य सरकार द्वारा उनके खिलाफ शुरू की गई दो अन्य जांच को चुनौती देते हुए एक अन्य याचिका दायर की है। अदालत 14 जून को इस याचिका पर भी सुनवाई करेगी।
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जांच संबंधी पहला आदेश एक अप्रैल को राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख ने अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर पारित किया गया था। दूसरा आदेश 20 अप्रैल को वर्तमान गृह मंत्री (दिलीप वालसे पाटिल) ने सिंह के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पारित किया गया था।
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सिंह के खिलाफ अत्याचार अधिनियम के तहत दर्ज प्राथमिकी पुलिस निरीक्षक घाडगे द्वारा दायर एक शिकायत पर आधारित है। घाडगे वर्तमान में महाराष्ट्र के अकोला में तैनात है। घाडगे ने सिंह और अन्य अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए हैं।


घाडगे ने प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि जब सिंह ठाणे में तैनात थे, उस समय उन्होंने एक मामले से कुछ लोगों के नाम हटाने को लेकर उन पर दबाव डाला और जब उन्होंने इनकार कर दिया, तो आईपीएस अधिकारी ने उन्हें झूठे मामलों में फंसा दिया। प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) कानून के प्रावधानों के तहत दर्ज की गई है।

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