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Maharashtra: शरद पवार की इस "मोहब्बत" पर कांग्रेस और उद्धव का बना "प्लान बी " ! सियासत पर होगा बड़ा असर
सार
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे ने भी उसी सियासी आग को और प्रचंड कर दिया है। दरअसल मनसे के नेता राज ठाकरे ने खुलकर कहा कि शरद पवार भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलने वाले हैं।
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अजित पवार,पीएम मोदी, शरद पवार।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शरद पवार और अजित पवार के बीच हुई मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर से बड़ी हलचल शुरू हो गई है। कहने को तो इस मुलाकात के बाद एनसीपी के नेता शरद पवार ने भारतीय जनता पार्टी से लेकर प्रधानमंत्री पर बड़ा हमला बोला। लेकिन अंदरखाने की खबर के मुताबिक शिवसेना और कांग्रेस ने बगैर शरद पवार के भी अपनी सियासी रणनीति बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। महाराष्ट्र की सियासत को समझने वालों का कहना है कि शरद पवार जिस तरीके से अपनी पार्टी को तोड़ने वाले भतीजे अजित पवार के प्रति नरम रवैया अपना रहे हैं और उनसे मुलाकातों का सिलसिला चल रहा है उससे कांग्रेस और शिवसेना न सिर्फ अलर्ट हुई है बल्कि बड़ी रणनीति के तहत "प्लान बी" पर भी काम शुरू कर दिया है। वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले का कहना है कि दोनों पवार नेताओं की मुलाकात के बाद जनता के मन में भ्रम है।
शरद पवार की सधी चाल पर कांग्रेस और उद्धव का प्लान बी...
महाराष्ट्र में शरद पवार और अजीत पवार की मुलाकातों के बाद सियासी सरगर्मी सिर्फ राज्य में ही नहीं बल्कि विपक्षी दलों के बड़े गठबंधन INDIA में भी देखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक पवार नेताओं की मुलाकात के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कांग्रेस ने एक नई रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इस नई सियासी रणनीति के मुताबिक दोनों पार्टियों के बड़े नेताओं के बीच में अंदरूनी तौर पर चर्चा इस बात की हुई है अगर शरद पवार किसी तरह अपने भतीजे अजीत पवार के खेमें से जुड़ जाते हैं तो उनका अगला कदम क्या होगा। राजनीतिक जानकारों और सूत्रों का मानना है कि ऐसी दशा में पार्टी अपना प्लान बी भी लेकर भी चल रही है। सियासी जानकारी और वरिष्ठ पत्रकार चितरंजन वानखेड़े कहते हैं कि महाराष्ट्र में इस वक्त जिस तरीके की उठापटक चल रही है उसकी तस्वीर अभी भी गठबंधन को बिल्कुल स्पष्ट नहीं है। चितरंजन का कहना है कि शरद पवार और अजीत पवार की मुलाकातों से कांग्रेस और शिवसेना निश्चित तौर पर अपने अगले सियासी कदम और रणनीति के बारे में विचार कर सकती है।
पार्टी तोड़ दी फिर भी भतीजे पर नरम हैं शरद पवार...
महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल इसी बात को लेकर उठ रहा है कि आखिर शरद पवार अपने भतीजे अजित पवार पर उतना हमलावर क्यों नहीं है, जबकि उनकी पार्टी को तोड़कर वह अलग हो गए। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हिमांशु शितोले कहते हैं कि यही सबसे बड़ा मुद्दा है जिसके चलते यह आकलन किया जा रहा है कि शरद पवार अभी नहीं तो देर सवेरे अपने भतीजे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकते हैं। लेकिन उनका कहना है कि जो चर्चा सियासी गलियारों में है उसकी जानकारी कद्दावर नेता शरद पवार को न हो इसकी संभावना ही नहीं है। यही वजह है कि शरद पवार एक नैरेटिव सेट करने और विपक्षी गठबंधन को संदेश देने के लिहाज से न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी पर हमलावर हुए बल्कि आने वाले चुनावों में अपनी लड़ाई विपक्ष के बने नए गठबंधन के साथ मिलकर लड़ने की बात कही।
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शरद पवार चाहते तो मानसून सत्र में तय कर लेते कौन सांसद उनके साथ कौन अजीत के साथ....
शितोले कहते हैं कि या तो चुनाव आयोग ने शरद पवार को अगले कुछ दिनों का वक्त देकर उनका पक्ष रखने की मोहलत दी है। लेकिन महाराष्ट्र की सियासत में लोगों को पहले से अंदाजा है कि वहां पर क्या होने वाला है। हालांकि शरद पवार ने भी इस बात को लेकर चर्चा की है कि जो हाल शिवसेना का हुआ है वहीं उनके साथ भी हो सकता है। हिमांशु शितोले कहते हैं कि अगर शरद पवार को इस बात का अंदाजा है कि उनकी पार्टी सिंबल और पार्टी उनके हाथ से जा सकती है तो वह अजित पवार को लेकर हमलावर क्यों नहीं हो रहे हैं। उनका कहना है कि मानसून सत्र के दौरान भी शरद पवार की पार्टी या चुनाव करा सकती थी कि कौन से सांसद उनके साथ हैं और कौन से अजीत पवार के साथ। बावजूद इसके शरद पवार ने ऐसा कुछ नहीं किया। महाराष्ट्र के राजनीतिक जानकारों का कहना है दरअसल शरद पवार बहुत ही सधी हुई सियासी पारी को आगे बढ़ा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि शरद पवार कि इसी सधी हुई सियासी पारी के चलते ही कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना अगले लोकसभा चुनावों को लेकर अपने प्लान बी की नई रणनीति को भी बना रही है।
इस तरह चल रहा है प्लान बी पर काम...
उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों मैं यह दोनों पार्टियों अपने-अपने प्रभुत्व वाले इलाकों में न सर्फ बड़ी रैलियां, जनसभाएं और जनसम्मेलन करने वाले हैं बल्कि लोगों से डोर टू डोर मुलाकात का अभियान भी शुरू करने जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि प्लान बी के मुताबिक दोनों पार्टियां उन इलाकों में भी बड़ी दस्तक देने वाली है जहां पर शरद पवार का और अजीत पवार का बड़ा आधिपत्य माना जाता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ऐसा सिर्फ उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कांग्रेस ही नहीं करने वाली है बल्कि शरद पवार और अजीत पवार भी अपने-अपने इलाकों में मजबूती के साथ डोर टू डोर कैंपेन शुरू कर चुके हैं। अब कांग्रेस और शिवसेना उसी मजबूती और तेजी के साथ समूचे महाराष्ट्र में इस तरह के अभियान को बढ़ाने वाली है।
राज ठाकरे ने ऐसा क्या कहा कि गर्म हो गई सियासत...
सियासी जानकारी का मानना है कि महाराष्ट्र की राजनीति वैसे ही पिछले एक साल से लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। ऐसे में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे ने भी उसी सियासी आग को और प्रचंड कर दिया है। दरअसल मनसे के नेता राज ठाकरे ने खुलकर कहा कि शरद पवार भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलने वाले हैं। राज ठाकरे के मुताबिक उनको इस बात की पुख्ता जानकारी मिली है कि महाराष्ट्र में जो अभी सियासत का बड़ा घटनाक्रम हुआ है वह शरद पवार की राजी और सहमति से ही हुआ है। अभी शरद पवार ने अपने भतीजे को भारतीय जनता पार्टी के खेमे में भेजा है बाद में शरद पवार और उनके साथ जुड़े नेता देर सवेर या लोकसभा चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी के साथ मिल जाएंगे।
लोकसभा चुनावों के बाद तय होगी शरद पवार की दिशा...
राज ठाकरे की बात को लेकर महाराष्ट्र के सियासी जानकार बताते हैं कि यहां के राजनीतिक गलियारों में भी कुछ इस तरह की चर्चाएं तो हो ही रही हैं। राजनीतिक विश्लेषक आरएन तांबे कहते हैं कि यह भी संभव है कि शरद पवार लगातार विपक्षी दल के साथ मौजूद रहे और अजीत पवार भारतीय जनता पार्टी के साथ में। लोकसभा के चुनाव इसी परिस्थितियों के बीच में हो जाएंगे। उसके बाद जो परिणाम होंगे उसी के मुताबिक शरद पवार का अगला कदम होगा। यानी अगर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आती है तो शरद पवार उनके साथ शामिल हो जाएंगे।
कांग्रेस ने कहा लोगों के मन में भ्रम...
वहीं महाराष्ट्र में बुधवार और गुरुवार को हुई कांग्रेस पार्टी की एक बड़ी बैठक में महाराष्ट्र कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि अजीत पवार और शरद पवार की मीटिंग को लेकर कांग्रेस के मन में तो कोई भी शंका नहीं है। लेकिन पटोले कहते हैं कि लोगों के मन नहीं इसको लेकर जरूर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हालांकि कांग्रेस की इस बैठक में महाराष्ट्र में होने वाली विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA की तैयारियों को लेकर की गई थी।
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शरद पवार की सधी चाल पर कांग्रेस और उद्धव का प्लान बी...
महाराष्ट्र में शरद पवार और अजीत पवार की मुलाकातों के बाद सियासी सरगर्मी सिर्फ राज्य में ही नहीं बल्कि विपक्षी दलों के बड़े गठबंधन INDIA में भी देखी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक पवार नेताओं की मुलाकात के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कांग्रेस ने एक नई रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इस नई सियासी रणनीति के मुताबिक दोनों पार्टियों के बड़े नेताओं के बीच में अंदरूनी तौर पर चर्चा इस बात की हुई है अगर शरद पवार किसी तरह अपने भतीजे अजीत पवार के खेमें से जुड़ जाते हैं तो उनका अगला कदम क्या होगा। राजनीतिक जानकारों और सूत्रों का मानना है कि ऐसी दशा में पार्टी अपना प्लान बी भी लेकर भी चल रही है। सियासी जानकारी और वरिष्ठ पत्रकार चितरंजन वानखेड़े कहते हैं कि महाराष्ट्र में इस वक्त जिस तरीके की उठापटक चल रही है उसकी तस्वीर अभी भी गठबंधन को बिल्कुल स्पष्ट नहीं है। चितरंजन का कहना है कि शरद पवार और अजीत पवार की मुलाकातों से कांग्रेस और शिवसेना निश्चित तौर पर अपने अगले सियासी कदम और रणनीति के बारे में विचार कर सकती है।
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पार्टी तोड़ दी फिर भी भतीजे पर नरम हैं शरद पवार...
महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल इसी बात को लेकर उठ रहा है कि आखिर शरद पवार अपने भतीजे अजित पवार पर उतना हमलावर क्यों नहीं है, जबकि उनकी पार्टी को तोड़कर वह अलग हो गए। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हिमांशु शितोले कहते हैं कि यही सबसे बड़ा मुद्दा है जिसके चलते यह आकलन किया जा रहा है कि शरद पवार अभी नहीं तो देर सवेरे अपने भतीजे के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल सकते हैं। लेकिन उनका कहना है कि जो चर्चा सियासी गलियारों में है उसकी जानकारी कद्दावर नेता शरद पवार को न हो इसकी संभावना ही नहीं है। यही वजह है कि शरद पवार एक नैरेटिव सेट करने और विपक्षी गठबंधन को संदेश देने के लिहाज से न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी पर हमलावर हुए बल्कि आने वाले चुनावों में अपनी लड़ाई विपक्ष के बने नए गठबंधन के साथ मिलकर लड़ने की बात कही।
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शरद पवार चाहते तो मानसून सत्र में तय कर लेते कौन सांसद उनके साथ कौन अजीत के साथ....
शितोले कहते हैं कि या तो चुनाव आयोग ने शरद पवार को अगले कुछ दिनों का वक्त देकर उनका पक्ष रखने की मोहलत दी है। लेकिन महाराष्ट्र की सियासत में लोगों को पहले से अंदाजा है कि वहां पर क्या होने वाला है। हालांकि शरद पवार ने भी इस बात को लेकर चर्चा की है कि जो हाल शिवसेना का हुआ है वहीं उनके साथ भी हो सकता है। हिमांशु शितोले कहते हैं कि अगर शरद पवार को इस बात का अंदाजा है कि उनकी पार्टी सिंबल और पार्टी उनके हाथ से जा सकती है तो वह अजित पवार को लेकर हमलावर क्यों नहीं हो रहे हैं। उनका कहना है कि मानसून सत्र के दौरान भी शरद पवार की पार्टी या चुनाव करा सकती थी कि कौन से सांसद उनके साथ हैं और कौन से अजीत पवार के साथ। बावजूद इसके शरद पवार ने ऐसा कुछ नहीं किया। महाराष्ट्र के राजनीतिक जानकारों का कहना है दरअसल शरद पवार बहुत ही सधी हुई सियासी पारी को आगे बढ़ा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि शरद पवार कि इसी सधी हुई सियासी पारी के चलते ही कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना अगले लोकसभा चुनावों को लेकर अपने प्लान बी की नई रणनीति को भी बना रही है।
इस तरह चल रहा है प्लान बी पर काम...
उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कांग्रेस पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों मैं यह दोनों पार्टियों अपने-अपने प्रभुत्व वाले इलाकों में न सर्फ बड़ी रैलियां, जनसभाएं और जनसम्मेलन करने वाले हैं बल्कि लोगों से डोर टू डोर मुलाकात का अभियान भी शुरू करने जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि प्लान बी के मुताबिक दोनों पार्टियां उन इलाकों में भी बड़ी दस्तक देने वाली है जहां पर शरद पवार का और अजीत पवार का बड़ा आधिपत्य माना जाता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ऐसा सिर्फ उद्धव ठाकरे की शिवसेना और कांग्रेस ही नहीं करने वाली है बल्कि शरद पवार और अजीत पवार भी अपने-अपने इलाकों में मजबूती के साथ डोर टू डोर कैंपेन शुरू कर चुके हैं। अब कांग्रेस और शिवसेना उसी मजबूती और तेजी के साथ समूचे महाराष्ट्र में इस तरह के अभियान को बढ़ाने वाली है।
राज ठाकरे ने ऐसा क्या कहा कि गर्म हो गई सियासत...
सियासी जानकारी का मानना है कि महाराष्ट्र की राजनीति वैसे ही पिछले एक साल से लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। ऐसे में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे ने भी उसी सियासी आग को और प्रचंड कर दिया है। दरअसल मनसे के नेता राज ठाकरे ने खुलकर कहा कि शरद पवार भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलने वाले हैं। राज ठाकरे के मुताबिक उनको इस बात की पुख्ता जानकारी मिली है कि महाराष्ट्र में जो अभी सियासत का बड़ा घटनाक्रम हुआ है वह शरद पवार की राजी और सहमति से ही हुआ है। अभी शरद पवार ने अपने भतीजे को भारतीय जनता पार्टी के खेमे में भेजा है बाद में शरद पवार और उनके साथ जुड़े नेता देर सवेर या लोकसभा चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी के साथ मिल जाएंगे।
लोकसभा चुनावों के बाद तय होगी शरद पवार की दिशा...
राज ठाकरे की बात को लेकर महाराष्ट्र के सियासी जानकार बताते हैं कि यहां के राजनीतिक गलियारों में भी कुछ इस तरह की चर्चाएं तो हो ही रही हैं। राजनीतिक विश्लेषक आरएन तांबे कहते हैं कि यह भी संभव है कि शरद पवार लगातार विपक्षी दल के साथ मौजूद रहे और अजीत पवार भारतीय जनता पार्टी के साथ में। लोकसभा के चुनाव इसी परिस्थितियों के बीच में हो जाएंगे। उसके बाद जो परिणाम होंगे उसी के मुताबिक शरद पवार का अगला कदम होगा। यानी अगर भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आती है तो शरद पवार उनके साथ शामिल हो जाएंगे।
कांग्रेस ने कहा लोगों के मन में भ्रम...
वहीं महाराष्ट्र में बुधवार और गुरुवार को हुई कांग्रेस पार्टी की एक बड़ी बैठक में महाराष्ट्र कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा कि अजीत पवार और शरद पवार की मीटिंग को लेकर कांग्रेस के मन में तो कोई भी शंका नहीं है। लेकिन पटोले कहते हैं कि लोगों के मन नहीं इसको लेकर जरूर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। हालांकि कांग्रेस की इस बैठक में महाराष्ट्र में होने वाली विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA की तैयारियों को लेकर की गई थी।