Maharashtra: भूस्खलन से मरने वालों की संख्या 27 हुई, सर्च ऑपरेशन रुका; यवतमाल में दीवार गिरने से दो की मौत
अधिकारियों ने बताया कि इस आपदा में एक ही परिवार के नौ सदस्यों की मौत हो गई। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा खोज और बचाव अभियान शनिवार सुबह तीसरे दिन फिर से शुरू किया गया था।
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महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के इरशालवाड़ी गांव में खोज और बचाव अभियान शनिवार को तीसरे दिन भी जारी है। यहां भारी भूस्खलन की वजह मरने वालों की संख्या शनिवार को 27 तक पहुंच गई, जबकि 81 ग्रामीणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है और उनके लिए खोज एवं बचाव अभियान जारी है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। मुंबई से लगभग 80 किमी दूर स्थित खालापुर तहसील के अंतर्गत एक पहाड़ी ढलान पर स्थित आदिवासी गांव में बुधवार रात को भूस्खलन हुआ था।
सौ लोगों को हेलिकॉप्टर की मदद से निकाला
महाराष्ट्र के कई जिलों में मूसलाधार बारिश आफत बनी हुई है। विदर्भ के यवतमाल जिले में शनिवार को रिकॉर्ड 231 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इससे महागांव तालुका के एक दर्जन से अधिक गांवों में पानी भर गया। यहां बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए वायुसेना के दो मिराज-17वी हेलिकॉप्टर की मदद ली गई।
यवतमाल जिले के वाघाड़ी गांव में दीवार गिरने से एक महिला की मौत हो गई। जिले में शुक्रवार रात से भारी वर्षा हो रही है। कई जगहों पर मकान एवं सड़कें जलमग्न हो गई है और मकानों में पानी भर गया है। एसडीआरएफ की पांच टीमों ने जिले में राहत एवं बचाव अभियान चलाया।
पूर्वी महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में भी दर्जनों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इस बीच, क्षेत्रीय मौसम विभाग ने पालघर, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों में रविवार को भारी बारिश का अनुमान जताया है। मौसम विभाग ने रविवार को मुंबई में भी कुछ जगहों पर बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है।
इससे पहले, यवतमाल के जिलाधिकारी अमोल येदगे (Amol Yedge) ने बताया था कि यवतमाल के महागांव में बाढ़ में फंसे लोगों को वायुसेना के हेलीकॉप्टर से निकाला जाएगा। मौसम में सुधार के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जाएगा। यवतमाल जिले में एक घर की दीवार गिरने से दो लोगों की मौत हो गई है। एसडीआरएफ द्वारा पांच अलग-अलग स्थानों पर बचाव अभियान जारी है।
#WATCH | Maharashtra: Houses, roads in Yavatmal submerged in water due to incessant rain in the region. pic.twitter.com/9Hus9bezuB
— ANI (@ANI) July 22, 2023
एक ही परिवार के नौ सदस्यों की मौत
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के इरशालवाड़ी गांव से खोज और बचाव दल ने शनिवार को मलबे से पांच और शव बरामद किए। जिसके बाद भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है। एनडीआरएफ के एक अधिकारी ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खराब रोशनी और खराब मौसम के कारण खोज एवं बचाव अभियान दिन भर के लिए रोक दिया गया है। रविवार सुबह इसके फिर से शुरू होने की संभावना है।
अधिकारी ने कहा कि आज बरामद किए गए पांच शवों में से चार की पहचान कर ली गई है। बाद में बरामद किए गए शव की पहचान और लिंग का अभी पता नहीं चला है। उन्होंने बताया कि इससे पहले दिन में, जिन चार लोगों के शव मलबे से निकाले गए थे, उनकी पहचान माही मधु तिरकड़ (32), आशी पांडुरंग (50), भारती मधु भुताबरा (18) और किशन तिरकड़ (27) के रूप में हुई है। अधिकारियों ने बताया कि अब तक बरामद किए गए 27 शवों में से 12 महिलाएं, 10 पुरुष और चार बच्चे हैं, जबकि एक व्यक्ति अज्ञात है।
अधिकारियों ने बताया कि इस आपदा में एक ही परिवार के नौ सदस्यों की मौत हो गई। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, एनडीआरएफ और अन्य सरकारी एजेंसियों द्वारा खोज और बचाव अभियान शनिवार सुबह तीसरे दिन फिर से शुरू किया गया।
एनडीआरएफ के एक अधिकारी ने बताया कि भारी बारिश के कारण शुक्रवार शाम करीब छह बजे तलाशी अभियान रोक दिया गया था। उन्होंने कहा, एनडीआरएफ की चार टीमों और अन्य एजेंसियों ने शनिवार सुबह ऑपरेशन फिर से शुरू किया। पहाड़ी ढलान पर स्थित गांव के 48 में से कम से कम 17 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से भूस्खलन के मलबे के नीचे दब गए हैं।
रायगढ़ जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय के अनुसार, गांव के 229 निवासियों में से 27 की मृत्यु हो गई, 10 घायल हैं और 111 सुरक्षित हैं, जबकि 81 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है और उनके लिए खोज एवं बचाव अभियान जारी है। हालांकि, बताया जा रहा है कि उनमें से कुछ लोग एक शादी में शामिल होने के लिए गांव से बाहर गए थे, जबकि कुछ घटना के समय धान की रोपाई के काम से बाहर थे।
शुक्रवार को जिन छह पीड़ितों के शव निकाले गए थे, उनमें से तीन पुरुष और तीन महिलाएं थीं। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में चार बच्चे शामिल हैं, जिनकी उम्र छह महीने से चार साल के बीच है। उन्होंने बताया कि इस घटना में मरने वाले एक परिवार के नौ सदस्यों में एक तीन साल का लड़का और उसकी छह महीने की बहन भी शामिल है।
घटना में तीन पशुओं की भी मौत हुई है, जबकि 21 पशुओं को बचा लिया गया है। पहाड़ी के निचले इलाके से इरशालवाड़ी गांव तक पहुंचने में लगभग डेढ़ घंटे का समय लगता है। अधिकारियों ने कहा कि लोकप्रिय ट्रैकिंग स्थल इरशालगढ़ किले की अनदेखी की वजह से इस गांव में पक्की सड़क नहीं है, इसलिए अर्थ मूवर्स और खुदाई करने वाली वाली मशीनों को आसानी से नहीं ले जाया जा सकता है। इसलिए बचाव अभियान मैन्युअल रूप से चलाया जा रहा है।
कोंकण डिवीजन के सूचना उप निदेशक के कार्यालय द्वारा शुक्रवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया, जीवित बचे लोगों के लिए पारगमन शिविरों के रूप में उपयोग करने के लिए 60 कंटेनरों की मांग की गई है और उनमें से 40 पहले ही स्थान पर पहुंच चुके हैं। इसके अलावा, साइट पर 20 अस्थायी शौचालय और इतनी ही संख्या में बाथरूम तैयार किए गए हैं।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा को बताया कि भूस्खलन की घटना के मद्देनजर महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों के निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, इरशालवाड़ी गांव भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की सूची में नहीं था। बता दें कि इससे पहले 22 जुलाई, 2021 को रायगढ़ जिले की महाड तहसील के तलिये गांव में भीषण भूस्खलन में 87 लोगों की जान चली गई थी।
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