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Doctor Suicide Case: रिश्तेदारों की मांग- आरोपियों को दी जाए फांसी; टीएमसी ने भाजपा की चुप्पी पर उठाए सवाल
Sat, 25 Oct 2025 03:04 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 25 Oct 2025 03:04 PM IST
सार
रिश्तेदारों ने दावा किया कि, 'फलटण में राजनीतिक लोग अक्सर उस पर मेडिकल रिपोर्ट बदलने के लिए दबाव डालते थे, क्योंकि वह नियमित रूप से पोस्टमार्टम ड्यूटी पर रहती थी। उसने पुलिस सब-इंस्पेक्टर (जिसका नाम नोट में है) के खिलाफ कई बार शिकायत की थी, लेकिन उसकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया।'
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डॉक्टर सुसाइड केस की जांच जारी
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
महाराष्ट्र के सतारा जिले में कथित तौर पर दुष्कर्म और उत्पीड़न से परेशान होकर आत्महत्या करने वाली महिला डॉक्टर के रिश्तेदारों ने मांग की है कि सुसाइड नोट में जिन लोगों के नाम का जिक्र है, उन्हें फांसी की सजा दी जाए। सतारा के फलटण शहर में एक सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल में तैनात 28 साल की डॉक्टर ने गुरुवार को एक होटल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। महिला डॉक्टर ने अपनी हथेली पर एक नोट छोड़ा, जिसमें उसने एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर पर दुष्कर्म करने और एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर पर मानसिक रूप से उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था।
'अस्पताल में डॉक्टर पर मेडिकल रिपोर्ट बदलने का डाला जाता था दबाव'
एक रिश्तेदार ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि उसने उत्पीड़न के बारे में कई बार शिकायत की थी, लेकिन उसकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया। एक अन्य रिश्तेदार ने कहा, 'पुलिस ने हमें घटना (आत्महत्या) के बारे में बताया और हम अस्पताल गए (जहां शव लाया गया था)। एक डॉक्टर होने के नाते, मैंने उनसे कहा कि मैं पोस्टमार्टम के समय मौजूद रहूंगा। उस समय मैंने उसकी हथेली पर सुसाइड नोट देखा और यह बात पुलिस को बताई। मैंने सुझाव दिया कि फोरेंसिक विशेषज्ञों को पोस्टमार्टम करना चाहिए।' एक तीसरे रिश्तेदार ने दावा किया कि पीड़िता पर अस्पताल में मेडिकल रिपोर्ट बदलने का दबाव डाला जा रहा था जहां वह काम करती थी।
मेडिकल अफसर पर भी प्रताड़ित करने के आरोप
रिश्तेदारों ने दावा किया कि, 'फलटण में राजनीतिक लोग अक्सर उस पर मेडिकल रिपोर्ट बदलने के लिए दबाव डालते थे, क्योंकि वह नियमित रूप से पोस्टमार्टम ड्यूटी पर रहती थी। उसने पुलिस सब-इंस्पेक्टर (जिसका नाम नोट में है) के खिलाफ कई बार शिकायत की थी, लेकिन उसकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया।' रिश्तेदारों ने एक मेडिकल अफसर पर भी डॉक्टर को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। दावा किया कि मेडिकल अफसर द्वारा बार-बार महिला डॉक्टर को पोस्टमार्टम ड्यूटी पर लगाया जाता था। रिश्तेदार ने कहा, 'सिर्फ आरोपियों को गिरफ्तार करना ही काफी नहीं है। डॉक्टर और उसके परिवार को न्याय दिलाने के लिए उन्हें फांसी दी जानी चाहिए।'
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महिला डॉक्टर को सांसद से मिलवाने वाले पीए की पहचान का खुलासा करने की मांग
शिवसेना (UBT) नेता अंबादास दानवे ने डॉक्टर की आत्महत्या मामले को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा। दानवे ने एक्स पर साझा एक पोस्ट में लिखा, 'लाडकी बहिन' से ज्यादा महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। अगर फडणवीस के संरक्षण में पले-बढ़े लोग इस तरह से महिलाओं को परेशान कर रहे हैं, तो फडणवीस गृह मंत्री के तौर पर फेल हो गए हैं और उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।'
विधान परिषद में पूर्व नेता प्रतिपक्ष दानवे ने उन दो PA की पहचान के बारे में भी पूछा, जिनके बारे में उन्होंने दावा किया कि उन्होंने महिला डॉक्टर को फोन पर एक सांसद से मिलवाया था। उन्होंने यह पूछा, 'डीन या सुपरिटेंडेंट (अस्पताल के) ने महिला डॉक्टर की शिकायत पर क्या कार्रवाई की?' दानवे ने राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन विजया राहटकर से इस मामले में दखल देने की अपील की।
ये भी पढ़ें- Maharashtra: महिला डॉक्टर की आत्महत्या मामले का आरोपी गिरफ्तार, पुलिस अधिकारी के शोषण से परेशान होकर दी थी जान
टीएमसी ने भाजपा की चुप्पी पर उठाए सवाल
महाराष्ट्र में महिला डॉक्टर की आत्महत्या के मामले को लेकर टीएमसी ने भाजपा पर निशाना साधा है। टीएमसी ने सतारा की घटना पर भाजपा की चुप्पी पर सवाल उठाए। तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को हैरानी जताई कि क्या भगवा पार्टी अब भावनात्मक रूप से कंगाल हो गई है? पश्चिम बंगाल की मंत्री और टीएमसी की राष्ट्रीय प्रवक्ता शशि पांजा ने कहा कि अगर ऐसी घटना पश्चिम बंगाल में हुई होती तो बहुत हंगामा होता।
टीएमसी नेता ने कहा, 'हम जानते थे कि भाजपा अब तक राजनीतिक रूप से कंगाल थी। लेकिन क्या अब पार्टी भावनात्मक रूप से भी कंगाल हो गई है? उसने सतारा की दुखद घटना पर एक शब्द भी नहीं कहा। अब मीडिया की आवाज कहां है? राष्ट्रीय मीडिया चुप क्यों हैं? अगर यह घटना पश्चिम बंगाल में हुई होती, तो महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग के सदस्य राज्य का दौरा करते और हंगामा मच जाता।'
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'अस्पताल में डॉक्टर पर मेडिकल रिपोर्ट बदलने का डाला जाता था दबाव'
एक रिश्तेदार ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि उसने उत्पीड़न के बारे में कई बार शिकायत की थी, लेकिन उसकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया। एक अन्य रिश्तेदार ने कहा, 'पुलिस ने हमें घटना (आत्महत्या) के बारे में बताया और हम अस्पताल गए (जहां शव लाया गया था)। एक डॉक्टर होने के नाते, मैंने उनसे कहा कि मैं पोस्टमार्टम के समय मौजूद रहूंगा। उस समय मैंने उसकी हथेली पर सुसाइड नोट देखा और यह बात पुलिस को बताई। मैंने सुझाव दिया कि फोरेंसिक विशेषज्ञों को पोस्टमार्टम करना चाहिए।' एक तीसरे रिश्तेदार ने दावा किया कि पीड़िता पर अस्पताल में मेडिकल रिपोर्ट बदलने का दबाव डाला जा रहा था जहां वह काम करती थी।
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मेडिकल अफसर पर भी प्रताड़ित करने के आरोप
रिश्तेदारों ने दावा किया कि, 'फलटण में राजनीतिक लोग अक्सर उस पर मेडिकल रिपोर्ट बदलने के लिए दबाव डालते थे, क्योंकि वह नियमित रूप से पोस्टमार्टम ड्यूटी पर रहती थी। उसने पुलिस सब-इंस्पेक्टर (जिसका नाम नोट में है) के खिलाफ कई बार शिकायत की थी, लेकिन उसकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया।' रिश्तेदारों ने एक मेडिकल अफसर पर भी डॉक्टर को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। दावा किया कि मेडिकल अफसर द्वारा बार-बार महिला डॉक्टर को पोस्टमार्टम ड्यूटी पर लगाया जाता था। रिश्तेदार ने कहा, 'सिर्फ आरोपियों को गिरफ्तार करना ही काफी नहीं है। डॉक्टर और उसके परिवार को न्याय दिलाने के लिए उन्हें फांसी दी जानी चाहिए।'
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महिला डॉक्टर को सांसद से मिलवाने वाले पीए की पहचान का खुलासा करने की मांग
शिवसेना (UBT) नेता अंबादास दानवे ने डॉक्टर की आत्महत्या मामले को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधा। दानवे ने एक्स पर साझा एक पोस्ट में लिखा, 'लाडकी बहिन' से ज्यादा महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत है। अगर फडणवीस के संरक्षण में पले-बढ़े लोग इस तरह से महिलाओं को परेशान कर रहे हैं, तो फडणवीस गृह मंत्री के तौर पर फेल हो गए हैं और उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।'
विधान परिषद में पूर्व नेता प्रतिपक्ष दानवे ने उन दो PA की पहचान के बारे में भी पूछा, जिनके बारे में उन्होंने दावा किया कि उन्होंने महिला डॉक्टर को फोन पर एक सांसद से मिलवाया था। उन्होंने यह पूछा, 'डीन या सुपरिटेंडेंट (अस्पताल के) ने महिला डॉक्टर की शिकायत पर क्या कार्रवाई की?' दानवे ने राष्ट्रीय महिला आयोग की चेयरपर्सन विजया राहटकर से इस मामले में दखल देने की अपील की।
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टीएमसी ने भाजपा की चुप्पी पर उठाए सवाल
महाराष्ट्र में महिला डॉक्टर की आत्महत्या के मामले को लेकर टीएमसी ने भाजपा पर निशाना साधा है। टीएमसी ने सतारा की घटना पर भाजपा की चुप्पी पर सवाल उठाए। तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को हैरानी जताई कि क्या भगवा पार्टी अब भावनात्मक रूप से कंगाल हो गई है? पश्चिम बंगाल की मंत्री और टीएमसी की राष्ट्रीय प्रवक्ता शशि पांजा ने कहा कि अगर ऐसी घटना पश्चिम बंगाल में हुई होती तो बहुत हंगामा होता।
टीएमसी नेता ने कहा, 'हम जानते थे कि भाजपा अब तक राजनीतिक रूप से कंगाल थी। लेकिन क्या अब पार्टी भावनात्मक रूप से भी कंगाल हो गई है? उसने सतारा की दुखद घटना पर एक शब्द भी नहीं कहा। अब मीडिया की आवाज कहां है? राष्ट्रीय मीडिया चुप क्यों हैं? अगर यह घटना पश्चिम बंगाल में हुई होती, तो महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग के सदस्य राज्य का दौरा करते और हंगामा मच जाता।'