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Maharashtra: 38 साल पुरानी किताब पर बवाल, शिवसेना विधायक ने दी प्रकाशक की जीभ काटने की धमकी; ऑडियो क्लिप वायरल
Thu, 23 Apr 2026 08:00 PM IST
Himanshu Singh Chandel
आईएएनएस, कोलकाता
आईएएनएस, कोलकाता
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Thu, 23 Apr 2026 08:00 PM IST
सार
महाराष्ट्र में शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ के एक ऑडियो से विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने शिवाजी कोण होता किताब के प्रकाशक को धमकी दी। किताब लेखक गोविंद पानसरे की है। गायकवाड़ ने अपनी आवाज होने की पुष्टि करते हुए बयान का बचाव किया।
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विधायक संजय गायकवाड
- फोटो : X- @sanjaygaikwad34
विस्तार
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बवाल मच गया है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के विधायक संजय गायकवाड़ ने एक विवादित बयान देकर हंगामा खड़ा कर दिया है। उन्होंने 38 साल पुरानी एक किताब को लेकर कोल्हापुर के एक प्रकाशक को जान से मारने और उसकी जीभ काटने की धमकी दी है। इस घटना का एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। इसके बाद महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई है और कांग्रेस ने भाजपा सरकार से इस मामले में तुरंत जांच और कार्रवाई की मांग की है।
विधायक संजय गायकवाड़ ने जिस किताब को लेकर धमकी दी है, उसका नाम 'शिवाजी कोण होता' है। यह किताब 1988 में सीपीआई के दिवंगत नेता गोविंद पानसरे ने लिखी थी। लोकवांग्मय गृह द्वारा प्रकाशित इस किताब में छत्रपति शिवाजी महाराज को सिर्फ एक हिंदू राजा की बजाय एक धर्मनिरपेक्ष और जनता के राजा के रूप में दिखाया गया है। प्रकाशक प्रशांत अम्बी का आरोप है कि विधायक ने आधी रात को फोन किया और 9 मिनट तक गालियां दीं। विधायक ने किताब के नाम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रकाशक का भी वही हाल होगा जो गोविंद पानसरे का हुआ था। आपको बता दें कि पानसरे की 2015 में कोल्हापुर में हत्या कर दी गई थी।
विधायक संजय गायकवाड़ ने अपनी सफाई में क्या कहा?
इस पूरे विवाद पर बुलढाणा से विधायक संजय गायकवाड़ ने भी अपना पक्ष रखा है। उन्होंने पत्रकारों के सामने यह माना कि वायरल ऑडियो में उन्हीं की आवाज है। गायकवाड़ ने दावा किया कि प्रकाशक अम्बी ने उनके साथ घमंड से बात की और अपशब्द कहे। विधायक ने कहा कि ऐसी किताबें जो शिवाजी महाराज का अपमान करती हैं, उन्हें नष्ट कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की जीभ काट लेनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पत्नी मंगलवार को यह किताब लेकर आई थीं, जिसे पढ़ने के बाद उन्होंने फोन किया था। विधायक का कहना है कि वायरल क्लिप के साथ छेड़छाड़ की गई है।
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कांग्रेस और भाजपा नेताओं की क्या प्रतिक्रिया है?
विधायक की इस धमकी के बाद विपक्षी पार्टी कांग्रेस हमलावर हो गई है। कांग्रेस ने इस घटना को खुली गुंडागर्दी करार दिया है। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता हर्षवर्धन सपकाल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि गायकवाड़ की भाषा एक जनप्रतिनिधि के लायक नहीं है। उन्होंने कहा कि विधायक को शिवाजी महाराज का नाम लेने का कोई हक नहीं है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मांग की है कि वह मामले की जांच कराएं और प्रकाशक अम्बी को तुरंत सुरक्षा दें। वहीं, महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने गायकवाड़ को नसीहत दी है कि उन्हें पुराने विवादों को नहीं उखाड़ना चाहिए।
विधायक संजय गायकवाड़ का विवादो से रहा नाता
संजय गायकवाड़ का विवादों से बहुत पुराना नाता रहा है। इसी साल उन्होंने कांग्रेस नेता के आरक्षण वाले बयान पर उनकी जीभ काटने वाले को 11 लाख रुपये का इनाम देने का ऐलान किया था, हालांकि बाद में उन्होंने माफी मांग ली थी। 2024 में उन्होंने बाघ का दांत पहनकर दावा किया था कि उन्होंने 1987 में बाघ का शिकार किया था। पिछले साल बासी खाना देने पर उन्होंने कैंटीन कर्मचारी को थप्पड़ मार दिया था। एक पुलिसकर्मी से अपनी गाड़ी धुलवाने और महाराष्ट्र पुलिस को सबसे भ्रष्ट व अयोग्य विभाग बताने के कारण भी वह काफी चर्चा में रहे थे।
गोविंद पानसरे की यह किताब कोई नई नहीं है, बल्कि यह पिछले 38 वर्षों से पढ़ी जा रही है। अब तक इसकी लाखों प्रतियां बिक चुकी हैं और इसके 75 से ज्यादा संस्करण छप चुके हैं। यह किताब मराठी भाषा की बहुत ही मशहूर किताब मानी जाती है। दशकों पुरानी किताब को लेकर अचानक विधायक द्वारा इस तरह की धमकी देने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रकाशक को दी गई धमकी ने महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था पर एक नई बहस छेड़ दी है।
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विधायक संजय गायकवाड़ ने जिस किताब को लेकर धमकी दी है, उसका नाम 'शिवाजी कोण होता' है। यह किताब 1988 में सीपीआई के दिवंगत नेता गोविंद पानसरे ने लिखी थी। लोकवांग्मय गृह द्वारा प्रकाशित इस किताब में छत्रपति शिवाजी महाराज को सिर्फ एक हिंदू राजा की बजाय एक धर्मनिरपेक्ष और जनता के राजा के रूप में दिखाया गया है। प्रकाशक प्रशांत अम्बी का आरोप है कि विधायक ने आधी रात को फोन किया और 9 मिनट तक गालियां दीं। विधायक ने किताब के नाम पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रकाशक का भी वही हाल होगा जो गोविंद पानसरे का हुआ था। आपको बता दें कि पानसरे की 2015 में कोल्हापुर में हत्या कर दी गई थी।
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विधायक संजय गायकवाड़ ने अपनी सफाई में क्या कहा?
इस पूरे विवाद पर बुलढाणा से विधायक संजय गायकवाड़ ने भी अपना पक्ष रखा है। उन्होंने पत्रकारों के सामने यह माना कि वायरल ऑडियो में उन्हीं की आवाज है। गायकवाड़ ने दावा किया कि प्रकाशक अम्बी ने उनके साथ घमंड से बात की और अपशब्द कहे। विधायक ने कहा कि ऐसी किताबें जो शिवाजी महाराज का अपमान करती हैं, उन्हें नष्ट कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की जीभ काट लेनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी पत्नी मंगलवार को यह किताब लेकर आई थीं, जिसे पढ़ने के बाद उन्होंने फोन किया था। विधायक का कहना है कि वायरल क्लिप के साथ छेड़छाड़ की गई है।
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कांग्रेस और भाजपा नेताओं की क्या प्रतिक्रिया है?
विधायक की इस धमकी के बाद विपक्षी पार्टी कांग्रेस हमलावर हो गई है। कांग्रेस ने इस घटना को खुली गुंडागर्दी करार दिया है। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता हर्षवर्धन सपकाल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि गायकवाड़ की भाषा एक जनप्रतिनिधि के लायक नहीं है। उन्होंने कहा कि विधायक को शिवाजी महाराज का नाम लेने का कोई हक नहीं है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मांग की है कि वह मामले की जांच कराएं और प्रकाशक अम्बी को तुरंत सुरक्षा दें। वहीं, महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने गायकवाड़ को नसीहत दी है कि उन्हें पुराने विवादों को नहीं उखाड़ना चाहिए।
विधायक संजय गायकवाड़ का विवादो से रहा नाता
संजय गायकवाड़ का विवादों से बहुत पुराना नाता रहा है। इसी साल उन्होंने कांग्रेस नेता के आरक्षण वाले बयान पर उनकी जीभ काटने वाले को 11 लाख रुपये का इनाम देने का ऐलान किया था, हालांकि बाद में उन्होंने माफी मांग ली थी। 2024 में उन्होंने बाघ का दांत पहनकर दावा किया था कि उन्होंने 1987 में बाघ का शिकार किया था। पिछले साल बासी खाना देने पर उन्होंने कैंटीन कर्मचारी को थप्पड़ मार दिया था। एक पुलिसकर्मी से अपनी गाड़ी धुलवाने और महाराष्ट्र पुलिस को सबसे भ्रष्ट व अयोग्य विभाग बताने के कारण भी वह काफी चर्चा में रहे थे।
गोविंद पानसरे की यह किताब कोई नई नहीं है, बल्कि यह पिछले 38 वर्षों से पढ़ी जा रही है। अब तक इसकी लाखों प्रतियां बिक चुकी हैं और इसके 75 से ज्यादा संस्करण छप चुके हैं। यह किताब मराठी भाषा की बहुत ही मशहूर किताब मानी जाती है। दशकों पुरानी किताब को लेकर अचानक विधायक द्वारा इस तरह की धमकी देने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रकाशक को दी गई धमकी ने महाराष्ट्र में कानून-व्यवस्था पर एक नई बहस छेड़ दी है।
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