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महाराष्ट्र पंचायत चुनाव: सरपंच पद की हो रही नीलामी, राज्य चुनाव आयुक्त ने मांगी रिपोर्ट
Mon, 04 Jan 2021 09:51 PM IST
सुरेंद्र जोशी
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई
सुरेन्द्र मिश्र, मुंबई
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 04 Jan 2021 09:51 PM IST
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panchayat election graphic
- फोटो : अमर उजाला
महाराष्ट्र में इन दिनों ग्राम पंचायत चुनाव हो रहे हैं। इसमें हैरानी की बात यह है कि राज्य के कुछ जिलों की ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए बोली लगाई जा रही है। सरपंच पद की नीलामी का मामला संज्ञान में आने के बाद राज्य चुनाव आयुक्त ने सोमवार को सभी जिलाधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है।
नासिक में लगी दो करोड़ से ज्यादा की बोली
सरपंच पद की नीलामी का यह मामला तब सामने आया जब नासिक के उमराणे गांव में सरपंच पद के लिए दो करोड़ पांच लाख रुपए तक बोली लगाई गई। सरपंच की नीलामी यह प्रक्रिया गुप्त नहीं बल्कि श्री रामेश्वर महाराज मंदिर प्रांगण में संपन्न हुई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उमराणे गांव में सरपंच पद की नीलामी एक करोड़ 11 लाख से शुरू हुई और 2 करोड़ 5 लाख में पूरी हुई। पूर्व जिला परिषद सदस्य प्रशांत देवरे के पैनल के सुनील दत्तू देवरे को सरपंच पद पर जीत तय हुई। दरअसल, उमराणे गांव में प्याज बाजार समिति भी है।
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मंत्री ने खुद की शिकायत
इसी तरह उत्तर महाराष्ट्र के नंदूरबार जिले के खोड़ामली गांव में भी सरपंच पद की नीलामी का मामला सुर्खियों में रहा। राज्य में सरपंच पद की नीलामी की शिकायत खुद ग्राम विकास मंत्री हसन मुश्रिफ ने की है।
नीलामी गंभीर मामला
मंत्री मुश्रिफ द्वारा मामले की शिकायत के बाद राज्य चुनाव आयुक्त यूपीएस मदान ने सोमवार को राज्य के सभी जिलाधिकारियों को ग्राम पंचायत चुनाव के संदर्भ में रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। यूपीएस मदान ने कहा कि ग्राम पंचायत के चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होने चाहिए। सरपंच की नीलामी गंभीर मामला है।
15 जनवरी को मतदान, 18 को नतीजे
महाराष्ट्र के 34 जिलों में 14 हजार 234 ग्राम पंचायतों के चुनाव हो रहे है। आगामी 15 जनवरी को पंचायत चुनावों के लिए मतदान होगा। जबकि 18 जनवरी को मतगणना होगी। हालांकि ये चुनाव 31 मार्च 2020 से पहले सम्पन्न कराए जाने थे लेकिन कोरोना महामारी के चलते चुनाव टल गया था।
इन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार ने प्रशासक नियुक्त करने का फैसला किया था। भाजपा ने शिकायत की थी कि पैसे लेकर कार्यकर्ताओं को ग्राम पंचायत का प्रशासक नियुक्त किया जा रहा है।
वहीं, समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी प्रशासक नियुक्त करने के खिलाफ आंदोलन की धमकी दी थी। प्रशासक की नियुक्ति विवादों में आने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारी को प्रशासक नियुक्त करने का आदेश दिया था।
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नासिक में लगी दो करोड़ से ज्यादा की बोली
सरपंच पद की नीलामी का यह मामला तब सामने आया जब नासिक के उमराणे गांव में सरपंच पद के लिए दो करोड़ पांच लाख रुपए तक बोली लगाई गई। सरपंच की नीलामी यह प्रक्रिया गुप्त नहीं बल्कि श्री रामेश्वर महाराज मंदिर प्रांगण में संपन्न हुई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उमराणे गांव में सरपंच पद की नीलामी एक करोड़ 11 लाख से शुरू हुई और 2 करोड़ 5 लाख में पूरी हुई। पूर्व जिला परिषद सदस्य प्रशांत देवरे के पैनल के सुनील दत्तू देवरे को सरपंच पद पर जीत तय हुई। दरअसल, उमराणे गांव में प्याज बाजार समिति भी है।
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मंत्री ने खुद की शिकायत
इसी तरह उत्तर महाराष्ट्र के नंदूरबार जिले के खोड़ामली गांव में भी सरपंच पद की नीलामी का मामला सुर्खियों में रहा। राज्य में सरपंच पद की नीलामी की शिकायत खुद ग्राम विकास मंत्री हसन मुश्रिफ ने की है।
नीलामी गंभीर मामला
मंत्री मुश्रिफ द्वारा मामले की शिकायत के बाद राज्य चुनाव आयुक्त यूपीएस मदान ने सोमवार को राज्य के सभी जिलाधिकारियों को ग्राम पंचायत चुनाव के संदर्भ में रिपोर्ट देने का आदेश दिया है। यूपीएस मदान ने कहा कि ग्राम पंचायत के चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होने चाहिए। सरपंच की नीलामी गंभीर मामला है।
15 जनवरी को मतदान, 18 को नतीजे
महाराष्ट्र के 34 जिलों में 14 हजार 234 ग्राम पंचायतों के चुनाव हो रहे है। आगामी 15 जनवरी को पंचायत चुनावों के लिए मतदान होगा। जबकि 18 जनवरी को मतगणना होगी। हालांकि ये चुनाव 31 मार्च 2020 से पहले सम्पन्न कराए जाने थे लेकिन कोरोना महामारी के चलते चुनाव टल गया था।
इन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार ने प्रशासक नियुक्त करने का फैसला किया था। भाजपा ने शिकायत की थी कि पैसे लेकर कार्यकर्ताओं को ग्राम पंचायत का प्रशासक नियुक्त किया जा रहा है।
वहीं, समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी प्रशासक नियुक्त करने के खिलाफ आंदोलन की धमकी दी थी। प्रशासक की नियुक्ति विवादों में आने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारी को प्रशासक नियुक्त करने का आदेश दिया था।