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Maharashtra Politics: फडणवीस को छोड़ना पड़ सकता है महाराष्ट्र, अब दिल्ली में कर सकते हैं सरकार का हाथ मजबूत

Thu, 06 Jun 2024 06:56 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Thu, 06 Jun 2024 06:56 PM IST
सार

पार्टी का मुख्य जोर महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा समेत सभी राज्यों में तालमेल पर जोर देने पर है। पश्चिम बंगाल से भी एक बड़े नेता को दिल्ली बुलाया जा सकता है। फिलहाल फडणवीस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिल रहे हैं। उन्हें कोई बड़ा संदेश दिए जाने की तैयारी है।

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Maharashtra Politics Devendra Fadnavis resignation sparks leaving State Politics may serve in Delhi Centre
देवेंद्र फडणवीस - फोटो : X @Dev_Fadnavis

विस्तार

भाजपा ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाने की तैयारी तेज कर दी है। अमित शाह और जेपी नड्डा काफी सक्रिय हैं। 9 जून को शाम छह बजे शपथ ग्रहण समारोह होगा। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस इसी सिलसिले में दिल्ली में हैं। सूत्र बताते हैं कि फडणवीस को महाराष्ट्र से स्थायी तौर पर दिल्ली लाया जाएगा। उन्हें मोदी मंत्रिमंडल या संगठन में कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री की टीम में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी होंगे।
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पार्टी का मुख्य जोर महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा समेत सभी राज्यों में तालमेल पर जोर देने पर है। पश्चिम बंगाल से भी एक बड़े नेता को दिल्ली बुलाया जा सकता है। फिलहाल फडणवीस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिल रहे हैं। उन्हें कोई बड़ा संदेश दिए जाने की तैयारी है।
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उद्धव को मनाने की एक नाकाम पहल हो चुकी है, दूसरी जारी
यह खबर महाराष्ट्र के सूत्रों के हवाले से है। उद्धव ठाकरे परिवार का मुंबई के एक उद्योगपति परिवार से गहरा रिश्ता है। बताते हैं कि इस उद्योगपति परिवार ने राष्ट्रीय नेता के संकेत पर ठाकरे परिवार को अपने घर आमंत्रित किया था। इसमें ठाकरे परिवार के सामने प्रस्ताव रखा गया। उन्हें मनाने की कोशिश के तौर पर मजबूत संकेत दिए गए, लेकिन बताया जाता है कि उद्धव ठाकरे के मन में कोई भ्रम नहीं रहता। विनम्रता से सीधी बात रखते हैं। उन्होंने अपनी चिंताएं जाहिर करते हुए संबंधित व्यक्ति को बड़ी सहजता से फिलहाल मना कर दिया। हालांकि, सरकार और नागपुर का संघ मुख्यालय, दोनों चाहते हैं कि शिवसेना (उद्धव) से रिश्ते ठीक किए जाएं। देखना है कि आगे राजनीति किस करवट बैठती है।
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दिल्ली क्यों आ सकते हैं देवेंद्र फडणवीस?
महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन काफी खराब रहा है। फडणवीस ने पहले ही इसकी जिम्मेदारी लेकर इस्तीफे की पेशकश की है, लेकिन उनकी भूमिका को लेकर महाराष्ट्र में काफी अंदरूनी घमासान है। फडणवीस से ही अब मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को भी तमाम शिकायतें हैं। 

शिवसेना (उद्धव) के प्रमुख उद्धव ठाकरे को भी फडणवीस की भूमिका को लेकर बड़ी शिकायतें रही हैं। फडणवीस से नितिन गडकरी का रिश्ता भी अलग केमिस्ट्री बनाता है। भाजपा के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत पाटील समेत तमाम नेता भी अंदरुनी तालमेल पर बड़ा जोर दे रहे हैं। चंद्रशेखर बावनकुले का भी जोर महाराष्ट्र में भाजपा को मजबूत बनाने का है। इसी तरह से पार्टी के भीतर तमाम नेता हैं, जिन्हें फडणवीस की भूमिका को लेकर काफी दिक्कतें हैं। हालांकि, देवेन्द्र फडणवीस मोदी और अमित शाह के काफी प्रिय माने जाते हैं। पार्टी ने इससे पहले अंदरूनी हालात को संभालने के लिए ही विनोद तावड़े को महाराष्ट्र से दिल्ली लाकर संगठन में जगह दी है। हालांकि यह भी माना जाता है कि बिना दिल्ली के इशारे के महाराष्ट्र में फडणवीस कोई पत्ता नहीं हिलाते। इसलिए फडणवीस का ध्यान रखने की जिम्मेदारी दिल्ली भी समझती है।

क्षत्रप दिल्ली में बनाएंगे नया समीकरण
भाजपा के एक बड़े नेता ने भी इसका संकेत दिया है। मनोहर लाल खट्टर और शिवराज सिंह चौहान के अलावा दो अन्य बड़े नेता भी 18वीं लोकसभा के सदस्य होंगे। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं को प्रधानमंत्री अपने मंत्रिमंडल में स्थान दे सकते हैं। प्रधानमंत्री, अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को पता है कि तीसरे कार्यकाल में चुनौतियां काफी बढ़ी हैं। इसे ध्यान में रखकर दिल्ली में अनुभवी नेताओं की जरूरत बढ़ गई है। वैसे भी लोकसभा चुनाव 2024 में मोदी सरकार के दूसरे मंत्रिमंडल के दो दर्जन से अधिक मंत्री चुनाव हार गए हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री को अपनी कैबिनेट के लिए योग्य और अनुभवी नेताओं की जरूरत है।


विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा तय करेगी अपना भविष्य
लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे ने भाजपा को काफी अचंभित किया है। इसी साल महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली, झारखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की नजर केंद्र में सरकार के गठन के साथ-साथ इन राज्यों पर भी है। पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के कुर्सी छोड़ने के बाद से वहां लगातार हालात बिगड़ रहे हैं। महाराष्ट्र के चुनाव नतीजे ने भी चौंकाया है। ऐसे में माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में भाजपा अपने सभी कील-कांटे दुरुस्त करने का प्रयास करेगी। इसके लिए उसे राह के अपने कुछ कांटों को दूसरी जगह स्थान देना होगा।
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