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Maharashtra: 'पार्टियों को आत्मनिरीक्षण की आवश्यकता'; निम्न स्तर की राजनीति पर धनखड़ ने जताई चिंता
Thu, 11 Jul 2024 07:21 PM IST
मेघा झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: मेघा झा
Updated Thu, 11 Jul 2024 07:21 PM IST
सार
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिन पर दिन निम्न स्रत पर पहुंचती जा रही राजनीति पर दुख जताया। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आत्मनिरीक्षण करने का आह्वान किया।
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
देश की राजनीति दिन पर दिन नीचे गिरती जा रही है। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस बात दुख व्यक्त करते हुए सभी राजनीतिक दलों से आत्मनिरीक्षण करने का आह्वान किया। वहीं राज्य विधान परिषद के शताब्दी समारोह के अवसर पर महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद जरूरी है जो कि इन दिनों राजनीतिक पार्टियों के बीच गायब हो चुका है।
राज्य विधान परिषद के शताब्दी समारोह के अवसर पर महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को गुरुवार को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने दिन पर दिन निम्न स्रत पर पहुंचती जा रही राजनीति पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बहस और संवाद से पनपता है, लेकिन वर्तमान में राजनीतिक दलों के बीच संवाद गायब है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आत्मनिरीक्षण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "संसदीय लोकतंत्र में सब कुछ ठीक नहीं है। हम व्यवधान का अपवित्रीकरण झेल रहे हैं। राजनीतिक दलों के बीच संवाद गायब है।"
राज्यसभा के सभापति धनखड़ ने कहा कि नारेबाजी करना और सदन के वेल में मार्च करना किसी भी पीठासीन अधिकारी के लिए दर्दनाक स्थिति है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने सभापति और स्पीकर को सुविधाजनक पंचिंग बैग बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि शिष्टाचार और अनुशासन लोकतंत्र का दिल है। पीठासीन अधिकारी का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम दूसरे दृष्टिकोण के प्रति भी उदार नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियां अक्सर सौहार्दपूर्ण दृष्टिकोण के बजाय टकराववादी और विरोधात्मक दृष्टिकोण अपनाती हैं। उन्होंने कहा कि नैतिकता और सदाचार भारत में सार्वजनिक जीवन की पहचान रहे हैं।
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उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि राज्य विधानसभाएं और संसद लोकतंत्र का उत्तरी ध्रुव हैं, जबकि विधायक और सांसद इसके प्रकाश स्तंभ हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि सत्ता पक्ष की बेंच कुर्सी के दाईं ओर होती है, लेकिन मानव शरीर में हृदय बाईं ओर होता है और इसी से कुर्सी का कामकाज परिभाषित होना चाहिए। वहीं उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि महाराष्ट्र विधान परिषद का शताब्दी समारोह एक उल्लेखनीय मील का पत्थर था। साथ ही उन्होंने 17वीं शताब्दी के प्रतिष्ठित शासक छत्रपति शिवाजी महाराज का भी स्मरण किया।
वहीं महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने आज महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों को संबोधित करने से पहले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का स्वागत किया। सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा, "आपने हमेशा भारतीय संविधान को मजबूत करने में भूमिका निभाई है। आज हमारे पास आपको सुनने का यह सुनहरा अवसर है। आपने हमेशा संविधान और इसकी गरिमा बनाए रखने की बात कही है।"
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राज्य विधान परिषद के शताब्दी समारोह के अवसर पर महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को गुरुवार को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने दिन पर दिन निम्न स्रत पर पहुंचती जा रही राजनीति पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र बहस और संवाद से पनपता है, लेकिन वर्तमान में राजनीतिक दलों के बीच संवाद गायब है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आत्मनिरीक्षण करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "संसदीय लोकतंत्र में सब कुछ ठीक नहीं है। हम व्यवधान का अपवित्रीकरण झेल रहे हैं। राजनीतिक दलों के बीच संवाद गायब है।"
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राज्यसभा के सभापति धनखड़ ने कहा कि नारेबाजी करना और सदन के वेल में मार्च करना किसी भी पीठासीन अधिकारी के लिए दर्दनाक स्थिति है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने सभापति और स्पीकर को सुविधाजनक पंचिंग बैग बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि शिष्टाचार और अनुशासन लोकतंत्र का दिल है। पीठासीन अधिकारी का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हम दूसरे दृष्टिकोण के प्रति भी उदार नहीं हैं।" उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियां अक्सर सौहार्दपूर्ण दृष्टिकोण के बजाय टकराववादी और विरोधात्मक दृष्टिकोण अपनाती हैं। उन्होंने कहा कि नैतिकता और सदाचार भारत में सार्वजनिक जीवन की पहचान रहे हैं।
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उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि राज्य विधानसभाएं और संसद लोकतंत्र का उत्तरी ध्रुव हैं, जबकि विधायक और सांसद इसके प्रकाश स्तंभ हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि सत्ता पक्ष की बेंच कुर्सी के दाईं ओर होती है, लेकिन मानव शरीर में हृदय बाईं ओर होता है और इसी से कुर्सी का कामकाज परिभाषित होना चाहिए। वहीं उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि महाराष्ट्र विधान परिषद का शताब्दी समारोह एक उल्लेखनीय मील का पत्थर था। साथ ही उन्होंने 17वीं शताब्दी के प्रतिष्ठित शासक छत्रपति शिवाजी महाराज का भी स्मरण किया।
वहीं महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे ने आज महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों को संबोधित करने से पहले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का स्वागत किया। सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा, "आपने हमेशा भारतीय संविधान को मजबूत करने में भूमिका निभाई है। आज हमारे पास आपको सुनने का यह सुनहरा अवसर है। आपने हमेशा संविधान और इसकी गरिमा बनाए रखने की बात कही है।"