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Maharashtra: घर में जबरन घुसने, शील भंग करने के दोषी पाए गए युवक; मकोका के आरोपों से हुए बरी
Wed, 14 May 2025 12:28 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: नितिन गौतम
Updated Wed, 14 May 2025 12:28 PM IST
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महाराष्ट्र अपडेट
- फोटो : Amar Ujala
महाराष्ट्र के ठाणे की एक अदालत ने दो लोगों को घर में जबरन घुसने और घर की महिलाओं का शीलभंग करने का दोषी मानते हुए सजा सुनाई है। हालांकि अदालत ने दोनों दोषियों को थोड़ी राहत देते हुए उन्हें मकोका के आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने 9 मई के अपने आदेश में गणेश रंगनाथ शिंदे उर्फ काला गानया और अंकुश सूर्यकांत गायकवाड़ को दोषी ठहराया। गणेश बीते छह साल से जेल में बंद है, वहीं अंकुश बीते करीब दो साल से जेल में बंद है।
मकोका अदालत के विशेष न्यायाधीश अमित एम शेते ने दोषियों पर दो-दो हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही जुर्माने के अतिरिक्त पांच हजार रुपये पीड़ित की पत्नी को बतौर मुआवजे देने का आदेश दिया है। गणेश शिंदे और उसका साथी 9 सितंबर 2016 को शिकायतकर्ता के घर में जबरन घुसे और पीड़ित की पत्नी और उसकी बहनों का शीलभंग किया। हालांकि अदालत ने कहा कि दोनों के खिलाफ मकोका के तहत लगे आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत न होने के चलते दोनों को मकोका के आरोपों से रिहा कर दिया।
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मकोका अदालत के विशेष न्यायाधीश अमित एम शेते ने दोषियों पर दो-दो हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही जुर्माने के अतिरिक्त पांच हजार रुपये पीड़ित की पत्नी को बतौर मुआवजे देने का आदेश दिया है। गणेश शिंदे और उसका साथी 9 सितंबर 2016 को शिकायतकर्ता के घर में जबरन घुसे और पीड़ित की पत्नी और उसकी बहनों का शीलभंग किया। हालांकि अदालत ने कहा कि दोनों के खिलाफ मकोका के तहत लगे आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत न होने के चलते दोनों को मकोका के आरोपों से रिहा कर दिया।
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