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Maharashtra: 512 KG प्याज बेचने के बाद फायदा हुआ सिर्फ दो रुपये, किसान का दर्द- ऐसे कैसे जिंदा रहेंगे हम?

Fri, 24 Feb 2023 04:58 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 24 Feb 2023 04:58 PM IST
सार

किसान ने कहा, मैंने सोलापुर के एक प्याज व्यापारी को बिक्री के लिए पांच क्विंटल से ज्यादा वजन के प्याज के दस बोरे भेजे थे। लेकिन लोडिंग, परिवहन, श्रम और अन्य शुल्क के कटने के बाद मुझे सिर्फ 2.49 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।

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Maharashtra news updates Farmer in Solapur earns only Rs 2.49 net profit on sale of 512 kg onions
महाराष्ट्र के प्याज किसान (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महाराष्ट्र के सोलापुर के एक किसान को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसे पता चला कि उसने जिले के एक व्यापारी को अपने 512 किलोग्राम प्याज की बिक्री से केवल 2.49 रुपये का लाभ कमाया है।

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सोलापुर की बार्शी तहसील में रहने वाले किसान राजेंद्र चव्हाण (63 वर्षीय) ने बताया कि सोलापुर मार्केट यार्ड में उनकी प्याज की पैदावार की कीमत एक रुपये प्रति किलोग्राम थी और सभी कटौतियों के बाद उन्हें पिछले हफ्ते अपने शुद्ध लाभ के रूप में यह मामूली राशि मिली।
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किसान ने कहा, मैंने सोलापुर के एक प्याज व्यापारी को बिक्री के लिए पांच क्विंटल से ज्यादा वजन के प्याज के दस बोरे भेजे थे। लेकिन लोडिंग, परिवहन, श्रम और अन्य शुल्क के कटने के बाद मुझे सिर्फ 2.49 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया, व्यापारी ने मुझे जिस दर की पेशकश की थी, वह सौ रुपये प्रति क्विंटल थी। उन्होंने बताया कि फसल का वजन 512 किलोग्राम था और उपज के लिए उन्हें कुल कीमत 512 रुपये मिली। 
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राजेंद्र पूछते हैं, श्रम, वजन, परिवहन और अन्य शुल्कों में 509.51 रुपये की कटौती के बाद मुझे 2.49 रुपये का शुद्ध लाभ मिला। यह मेरा और राज्य के अन्य प्याज उत्पादकों का अपमान है। अगर हमें इस तरह का रिटर्न मिलता है, तो हम कैसे जिंदा रहेंगे? उन्होंने कहा, प्याजा किसानों को फसल का अच्छा मूल्य मिलना चाहिए और प्रभावित किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए। 

किसान ने दावा किया कि उपज अच्छी गुणवत्ता की थी, लेकिन व्यापारी ने कहा कि यह निम्न श्रेणी का है। वहीं व्यापारी ने कहा, किसान केवल 10 बोरे लाया था और उपज भी निम्न श्रेणी की थी। यही कारण है कि उन्हें 100 रुपये प्रति क्विंटल की दर मिली। इसलिए सभी कटौतियों के बाद उन्हें शुद्ध लाभ के रूप में 2 रुपये मिले। उन्होंने यह भी कहा कि उसी किसान ने हाल के दिनों में मुझे चार सौ से ज्यादा (प्याज के) बोरे बेचकर अच्छा रिटर्न प्राप्त किया था। इस बार वह शेष उपज लाए, जो मुश्किल से दस बोरे थे। चूंकि कीमत कम हो गई, इसलिए उन्हें यह दर मिली। 

किसान नेता और पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने कहा कि बाजार में प्याज की आवक अब 'खरीफ' उत्पाद है और इसे लंबे समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता है। यही कारण है कि उत्पाद की 'शेल्फ लाइफ' कम है।


उन्होंने कहा, इस प्याज को तुरंत बाजार में बेचने और निर्यात करने की जरूरत है। लेकिन प्याज की अधिकता के कारण बाजार में प्याज की कीमतों में गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि यह प्याज भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड) द्वारा नहीं खरीदा जाता है। इसलिए एक मात्र विकल्प यह है कि सरकार इस 'खरीफ' प्याज के लिए बाजार उपलब्ध कराए। 

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