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महाराष्ट्र: स्टैंडिंग कमेटी से भाजपा पार्षद को बाहर करने के लिए बीएमसी ने खर्च किए एक करोड़, खजाने पर पड़ा अतिरिक्त भार
Wed, 17 Nov 2021 10:01 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Wed, 17 Nov 2021 10:01 PM IST
सार
गलगली के मुताबिक, पहले और फिर बाद में शिरसाट की नियुक्ति रद्द करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। राजनीतिक लड़ाई कोर्ट में जाने से बीएमसी के खजाने पर हमेशा बोझ पड़ता है।
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विस्तार
देश की समृद्धिशाली नगर निकाय बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने भाजपा पार्षद भालचंद्र शिरसाट की स्थायी समिति से बाहर रखने के लिए एक करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए। शिरसाट स्थाई समिति के सदस्य न बन सके इसके लिए बीएमसी ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया था लेकिन कानूनी लड़ाई हार गई। कोर्ट ने उनकी सदस्यता बरकरार रखी। लेकिन इस राजनीतिक लड़ाई में बीएमसी की तिजोरी से 1.4 करोड़ का खर्च हो गए।
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आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने बीएमसी के कानूनी विभाग से भाजपा के भालचंद्र शिरसाट की स्थायी समिति की सदस्यता के खिलाफ कोर्ट की लड़ाई में हुए खर्च का ब्योरा मांगा था। अनिल गलगली को उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में नियुक्त वकीलों और परिषद और उन्हें दी जाने वाली राशि से अवगत कराया गया।
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गलगली के मुताबिक, पहले और फिर बाद में शिरसाट की नियुक्ति रद्द करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। राजनीतिक लड़ाई कोर्ट में जाने से बीएमसी के खजाने पर हमेशा बोझ पड़ता है। बीएमसी ने सार्वजनिक कर से 1 करोड़ 4 लाख रूपए सार्वजनिक कर से एकत्रित राशि खर्च की है। इसलिए इसकी जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए।
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हाईकोर्ट में 76.60 लाख और सुप्रीम कोर्ट में 27.38 लाख का खर्च
- भालचंद शिरसाट की सदस्यता के खिलाफ कानूनी लड़ाई में बीएमसी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में 76.60 लाख और सुप्रीम कोर्ट में 27.38 लाख रुपए खर्च किए। सुप्रीम कोर्ट में देश के जाने माने काउंसिल एड. मुकुल रोहितगी को 17.50 लाख रुपए दिए गए। इनमें सम्मेलन के लिए 6.50 लाख रुपये और 2 सुनवाई के लिए 11 लाख रुपये दिए गए।
- वहीं, एड ध्रुव मेहता को 5.50 लाख रुपये, सुकुमारन को ड्राफ्ट, कॉन्फ्रेंस, याचिका के लिए 1 लाख रुपये और अन्य सम्मेलन और सुनवाई के लिए 2.26 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। ड्राफ्ट और सम्मेलनों के लिए अतिरिक्त 1.10 लाख रुपये प्रदान किए गए हैं। इससे पहले बांबे हाईकोर्ट में मुकदमें की सुनवाई में 76.60 लाख खर्च हुए थे।