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Maharashtra: आईएनएस विक्रांत फंड मामला, कोर्ट ने कहा- भाजपा नेता किरीट सोमैया के खिलाफ आगे जांच की जरूरत
Tue, 13 Aug 2024 12:27 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: नितिन गौतम
Updated Tue, 13 Aug 2024 12:27 PM IST
सार
आईएनएस विक्रांत को नीलामी से बचाने के लिए भाजपा नेता किरीट सोमैया ने एक अभियान चलाया था, जिसके तहत फंड इकट्ठा किया गया था। एक पूर्व सैनिक ने अप्रैल 2022 में मुंबई के ट्रांबे थाने में सोमैया और उनके बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
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भाजपा नेता किरीट सोमैया
- फोटो : ANI
विस्तार
मुंबई की एक अदालत ने भाजपा नेता किरीट सोमैया और उनके बेटे के खिलाफ धोखाधड़ी के एक मामले में 'क्लोजर रिपोर्ट' का निपटारा करते हुए मामले की और जांच करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने इस बात की जांच नहीं की है कि नौसेना के विमानवाहक पोत 'आईएनएस विक्रांत' को बचाने के लिए किरीट सोमैया द्वारा इकट्ठा किए गए धन का क्या किया गया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एस पी शिंदे ने पिछले सप्ताह जारी एक आदेश में पुलिस को निर्देश दिया था कि मामले में आगे और जांच की जाए तथा फिर रिपोर्ट जमा की जाए।
क्या है मामला
भारतीय नौसेना के मजेस्टिक श्रेणी के विमान वाहक पोत 'आईएनएस विक्रांत' को 1961 में नौसेना में शामिल किया गया था। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान पूर्वी पाकिस्तान (मौजूदा बांग्लादेश) की नौसैनिक नाकेबंदी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आईएनएस विक्रांत को साल 1997 में सेवामुक्त कर दिया गया था। जनवरी 2014 में आईएनएस विक्रांत को एक ऑनलाइन नीलामी में बेच दिया गया था। आईएनएस विक्रांत को नीलामी से बचाने के लिए भाजपा नेता किरीट सोमैया ने एक अभियान चलाया था, जिसके तहत फंड इकट्ठा किया गया था। एक पूर्व सैनिक ने अप्रैल 2022 में मुंबई के ट्रांबे थाने में सोमैया और उनके बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। पूर्व सैनिक ने दावा किया था कि किरीट सोमैया ने आईएनएस विक्रांत को बिक्री से बचाने के लिए अभियान चलाया था और उन्होंने इस अभियान के लिए 2013 में 2,000 रुपये का चंदा दिया था।
अदालत ने जांच को लेकर जताई नाराजगी
शिकायतकर्ता का आरोप था कि सोमैया ने जहाज को बचाने के अभियान में 57 करोड़ रुपये से ज्यादा इकट्ठा किए थे। उन्होंने दावा किया कि इस राशि को महाराष्ट्र के राज्यपाल के सचिव कार्यालय में जमा करने के बजाय उन्होंने इसका गबन किया। मामला बाद में मुंबई पुलिस के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को स्थानांतरित कर दिया गया। मामले के जांच अधिकारी ने अदालत के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा था कि जांच करने के बाद यह पता चला कि किरीट सोमैया पर लगे आरोप न तो सच हैं और न ही झूठ।
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मजिस्ट्रेट ने कहा, 'जांच अधिकारी ने कोई भी दस्तावेज रिकॉर्ड में नहीं रखा है जो दिखाता हो कि आरोपी ने राशि को महाराष्ट्र के राज्यपाल कार्यालय में या राज्य सरकार को जमा कर दिया है। इसलिए इस मामले में जांच अधिकारी ने यह जांच नहीं की है कि आरोपियों ने जमा किए गए पैसे का क्या किया।' अदालत ने यह भी कहा कि रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों ने अन्य कुछ स्थानों पर भी अभियान चलाए हैं, लेकिन जांच अधिकारी ने दूसरे स्थानों से गवाहों के बयान दर्ज करने की जहमत नहीं उठाई जिन्होंने भी चंदा देने का दावा किया है। मजिस्ट्रेट ने कहा, 'मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद मुझे ऐसा लगता है कि मामले में आगे और जांच जरूरी है।' इसके बाद अदालत ने जांच अधिकारी को आगे जांच करने तथा रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया।
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क्या है मामला
भारतीय नौसेना के मजेस्टिक श्रेणी के विमान वाहक पोत 'आईएनएस विक्रांत' को 1961 में नौसेना में शामिल किया गया था। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान पूर्वी पाकिस्तान (मौजूदा बांग्लादेश) की नौसैनिक नाकेबंदी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आईएनएस विक्रांत को साल 1997 में सेवामुक्त कर दिया गया था। जनवरी 2014 में आईएनएस विक्रांत को एक ऑनलाइन नीलामी में बेच दिया गया था। आईएनएस विक्रांत को नीलामी से बचाने के लिए भाजपा नेता किरीट सोमैया ने एक अभियान चलाया था, जिसके तहत फंड इकट्ठा किया गया था। एक पूर्व सैनिक ने अप्रैल 2022 में मुंबई के ट्रांबे थाने में सोमैया और उनके बेटे के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। पूर्व सैनिक ने दावा किया था कि किरीट सोमैया ने आईएनएस विक्रांत को बिक्री से बचाने के लिए अभियान चलाया था और उन्होंने इस अभियान के लिए 2013 में 2,000 रुपये का चंदा दिया था।
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अदालत ने जांच को लेकर जताई नाराजगी
शिकायतकर्ता का आरोप था कि सोमैया ने जहाज को बचाने के अभियान में 57 करोड़ रुपये से ज्यादा इकट्ठा किए थे। उन्होंने दावा किया कि इस राशि को महाराष्ट्र के राज्यपाल के सचिव कार्यालय में जमा करने के बजाय उन्होंने इसका गबन किया। मामला बाद में मुंबई पुलिस के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को स्थानांतरित कर दिया गया। मामले के जांच अधिकारी ने अदालत के समक्ष क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा था कि जांच करने के बाद यह पता चला कि किरीट सोमैया पर लगे आरोप न तो सच हैं और न ही झूठ।
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मजिस्ट्रेट ने कहा, 'जांच अधिकारी ने कोई भी दस्तावेज रिकॉर्ड में नहीं रखा है जो दिखाता हो कि आरोपी ने राशि को महाराष्ट्र के राज्यपाल कार्यालय में या राज्य सरकार को जमा कर दिया है। इसलिए इस मामले में जांच अधिकारी ने यह जांच नहीं की है कि आरोपियों ने जमा किए गए पैसे का क्या किया।' अदालत ने यह भी कहा कि रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों ने अन्य कुछ स्थानों पर भी अभियान चलाए हैं, लेकिन जांच अधिकारी ने दूसरे स्थानों से गवाहों के बयान दर्ज करने की जहमत नहीं उठाई जिन्होंने भी चंदा देने का दावा किया है। मजिस्ट्रेट ने कहा, 'मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद मुझे ऐसा लगता है कि मामले में आगे और जांच जरूरी है।' इसके बाद अदालत ने जांच अधिकारी को आगे जांच करने तथा रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया।