सुप्रीम कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार: परमबीर सिंह कोई 'व्हिसलब्लोअर' नहीं, ट्रांसफर के बाद उठाए भ्रष्टाचार के मामले
महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाने वाले मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है। वहीं, इसके खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि सिंह को कानून के अनुसार व्हिसलब्लोअर नहीं माना जा सकता है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट...
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महाराष्ट्र सरकार ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह को कानूनन एक व्हिसलब्लोअर नहीं माना जा सकता है। सरकार ने सिंह की याचिका को खारिज करने की मांग उठाते हुए कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि सिंह ने पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार के बारे में अपने ट्रांसफर के बाद जानकारी दी।
न्यायाधीश एसके कौल की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने 22 नवंबर को महाराष्ट्र पुलिस को परमबीर सिंह को उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों में गिरफ्तार न करने का निर्देश देते हुए बड़ी राहत दी थी। पीठ ने हैरानी जताई थी कि क्या पुलिस अधिकारियों और वसूली करने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करने के लिए उनका पीछा किया जा रहा है।
परमबीर सिंह अपनी याचिका में इस पूरे मामले की जांच सीबीआई से करवाने और राज्य सरकार की ओर से किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है। इसे लेकर महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दायर किया है। इस हलफनामे में कहा गया है कि सिंह के खिलाफ आपराधिक मामलों में हो रही जांच में बाधा नहीं पहुंचानी चाहिए।
सिंह को इसलिए नहीं माना जा सकता ब्लिसलब्लोअर
हलफनामे में महाराष्ट्र गृह विभाग के संयुक्त सचिव वेंकटेश माधव ने कहा है कि याचिकाकर्ता (परमबीर सिंह) को व्हिसलब्लोअर नहीं माना जा सकता है। याचिकाकर्ता के 20 मार्च 2021 के पत्र से साफ होता है कि उन्होंने कथित भ्रष्टाचार के जो मामले बताए वह मार्च से कुछ महीने पहले हुए थे। लेकिन उन्होंने ये आरोप 20 मार्च को लगाए, अपने ट्रांसफर के तीन दिन बाद।
माधव ने आगे कहा कि ऐसे में उनका पत्र जनहित या वास्तविक उद्देश्य के लिए नहीं था। इसलिए इस बात से इनकार किया जाता है कि याचिकाकर्ता एक व्हिलसब्लोअर है। 83 पन्नों के अपने जवाब में महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि हाल ही में निलंबित किए गए परमबीर सिंह इस याचिका के जरिए अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की जांच को रोकना चाहते हैं।
प्रवर्तन निदेशालय ने दर्ज किया परमबीर सिंह का बयान
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महाराष्ट्र पुलिस से जुड़े धनशोधन मामले की जांच में मुंबई के निलंबित पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह का बयान दर्ज किया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सिंह का बयान तीन दिसंबर को ईडी के दक्षिण मुंबई स्थित कार्यालय में दर्ज किया गया था। इस दौरान सिंह से करीब पांच घंटे तक इस मामले के जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ की गई थी।
ईडी की ओर से सिंह को तीन बार समन भेजा जा चुका था, लेकिन वह पेश नहीं हुए थे। सूत्रों के अनुसार एजेंसी उन्हें फिर समन भेज सकती है। 1988 बैच के आईपीएसअधिकारी सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद कुछ दिन पहले महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। वसूली के आरोप में सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर हुई है।