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बॉम्बे हाईकोर्ट: गौतम नवलखा की चिकित्सकीय जांच करवाएगी महाराष्ट्र सरकार, एनआईए से नजरबंदी की याचिका पर मांगा जवाब
Fri, 03 Sep 2021 09:30 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 03 Sep 2021 09:30 PM IST
सार
महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि वह जेल में बंद कार्यकर्ता गौतम नवलखा का चिकित्सकीय परीक्षण करवाएगी। यह परीक्षण शुक्रवार को नवी मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल अस्पताल में करवाया जाएगा। बता दें कि नवलखा, एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी हैं और इस समय तलोजा जेल में बंद हैं।
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बॉम्बे हाईकोर्ट
- फोटो : पीटीआई (फाइल)
विस्तार
न्यायाधीश एसएस शिंदे और एनजे जामदार की पीठ ने मामले की सुनवाई की। नवलखा को इस साल मार्च में जेल में बंद रहने के दौरान सीने में गांठ की समस्या हुई थी। इसकी जांच के लिए उसने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। 69 वर्षीय गौतम नवलखा ने अपनी याचिका में कहा है कि मुझे मेरी न्यायिक हिरासत के हिस्से के रूप में घर में नजरबंद रखा जाए क्योंकि मेरी उम्र अधिक हो चुकी है और कई बीमारियों से पीड़ित हूं।
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इस दौरान नवलखा ने मई में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उल्लेख किया। जब शीर्ष अदालत ने नवलखा की डिफॉल्ट जमानत याचिका खारिज कर दी थी लेकिन नजरबंद करने पर सहमति जताई थी। नवलखा ने कहा कि मैंने जांच में हमेशा सहयोग किया है और घर में नजरबंदी के लिए मैं पूरी तरह से उपयुक्त हूं। नवलखा के वकील ने कहा कि जेल में रहने के दौरान नवलखा को तनाव की समस्या भी हो गई है।
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अपनी याचिका में, नवलखा ने यह भी कहा कि मामले में 15 लोग आरोपी हैं और 30 हजार पन्नों से अधिक की चार्जशीट है। इसके साथ ही 150 से अधिक गवाहों की जांच की जानी है। ऐसे में इस मुकदमे के पूरा होने तक मुझे जेल में रखना बेहद अन्यायपूर्ण और कठोर होगा।
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हालांकि, एनआईए की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि आरोपी व्यक्ति को अपनी मर्जी के अस्पताल जाने की जिद नहीं करनी चाहिए और सुझाव दिया कि जेल अधिकारियों को नवलखा को सरकारी अस्पताल में ले जाना चाहिए। इसके बाद राज्य सरकार ने दौतम नवलखा को टाटा मेमोरियल अस्पताल ले जाने का प्रस्ताव दिया, जो तलोजा जेल के पास है।
उच्च न्यायालय ने एनआईए से नवलखा की घर में नजरबंद करने की याचिका पर एनआईए से जवाब दाखिल करने को कहा। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की सुनवाई 27 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी। बता दें कि नवलखा को पुणे पुलिस ने 28 अगस्त 2018 को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। शुरुआत में उन्हें घर में ही नजरबंद रखा गया था लेकिन बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
एनआईए को मिला दो हफ्ते का समय
इस मामले में आरोपी सामाजिक कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा की याचिकाओं पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को जवाब दाखिल करने के लिए शुक्रवार को और दो हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि एजेंसी ने उनसे जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं उनकी क्लोन कॉपी उन्हें मुहैया कराई जाए।
भारद्वाज और नवलखा ने इन प्रतियों के लिए पिछले महीने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने 20 अगस्त को एनआईए को इस याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया था। अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल अनिल सिंह ने शुक्रवार को जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस एनजे जामदार की पीठ को सूचित किया कि एनआईए का जवाब ‘लगभग तैयार’ है, लेकिन इसे दाखिल करने के लिए उन्हें दो हफ्ते का और समय चाहिए। सिंह के इस अनुरोध को पीठ ने स्वीकार कर लिया।