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महाराष्ट्र: गरबा में मुस्लिमों की एंट्री पर बवाल क्यों? संजय राउत ने उठाए सवाल, बोले- मोहन भागवत से पूछिए

Sun, 06 Sep 2026 02:10 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Sun, 06 Sep 2026 02:10 PM IST
सार

महाराष्ट्र में नवरात्रि से पहले गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। विश्व हिंदू परिषद ने आयोजकों से प्रतिभागियों की पहचान जांचने और मुसलमानों को गरबा-डांडिया में शामिल नहीं करने की बात कही है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने इस रुख पर सवाल उठाते हुए मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता वाले बयान का हवाला दिया है। आखिर वीएचपी ने ऐसे नियम क्यों बनाए और अब विवाद कितना बढ़ेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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Maharashtra Garba Controversy: Sanjay Raut Slams VHP Guidelines, Seeks Mohan Bhagwat’s Statement on Muslim Ent
संजय राउत, शिवसेना यूबीटी के नेता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

महाराष्ट्र में अगले महीने होने वाले नवरात्रि उत्सव से पहले गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर विवाद तेज हो गया है। विश्व हिंदू परिषद ने मुसलमानों को गरबा और डांडिया कार्यक्रमों से दूर रखने की बात कही है। संगठन ने आयोजकों के लिए कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इनमें कार्यक्रम में आने वाले लोगों की पहचान जांचने और आधार कार्ड देखने जैसी बातें शामिल हैं। इस साल नवरात्रि 11 अक्तूबर से शुरू होगी।

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वीएचपी ने आयोजकों से क्या करने को कहा?

विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता और संयुक्त सचिव श्रीराज नायर ने कहा कि संगठन ने नवरात्रि के दौरान गरबा-डांडिया में मुस्लिम समुदाय के लोगों की भागीदारी नहीं होने देने का फैसला किया है। उनका तर्क है कि नवरात्रि देवी की पूजा का पर्व है और इसमें धार्मिक मान्यताओं से जुड़े नियमों का पालन होना चाहिए। वीएचपी ने इसे किसी समुदाय के खिलाफ कदम नहीं, बल्कि हिंदू त्योहारों के सांस्कृतिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए एहतियाती उपाय बताया है। संगठन ने प्रतिभागियों की पहचान की जांच और माथे पर तिलक लगाने का सुझाव भी दिया है।

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संजय राउत ने मोहन भागवत का जिक्र क्यों किया?

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने वीएचपी के रुख पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने भी भारत की आजादी और सांस्कृतिक संघर्ष में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राउत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के हालिया विदेश दौरे के दौरान दिए गए हिंदू-मुस्लिम संबंधों से जुड़े बयान का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि एक तरफ ऐसी बातें कही जाती हैं और दूसरी तरफ उनके संगठन से जुड़े लोग इस तरह के नियम बना रहे हैं। राउत ने कहा कि मोहन भागवत को इस मामले पर बयान देना चाहिए।

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वीएचपी ने भागवत के बयान पर क्या कहा?

मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम में कहा था कि अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा। उन्होंने सभी इंसानों की गरिमा और सभी रास्तों के एक ही लक्ष्य तक पहुंचने की बात कही थी। वीएचपी के श्रीराज नायर से जब उनके बयान पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कहा कि संगठन इस पर टिप्पणी नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि जिन लोगों की धार्मिक मान्यताएं नवरात्रि की पूजा पद्धति से अलग हैं, उनके लिए वीएचपी अपने दिशा-निर्देशों में बदलाव क्यों करे।

विपक्ष ने वीएचपी के नियमों पर क्या सवाल उठाए?

  • कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने वीएचपी के कदम को असंवैधानिक बताया और कहा कि त्योहार सामाजिक मेल-जोल और सांप्रदायिक सद्भाव के अवसर होते हैं।
  • उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को भी सद्भावना के तहत गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में बुलाया जाता है और दूसरी ओर ईद तथा रमजान के मौकों पर दूसरे समुदायों के लोगों को आमंत्रित किया जाता है।
  • एनसीपी (एसपी) के प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने भी दिशा-निर्देशों की आलोचना की और भाजपा के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि क्या वह वीएचपी को कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में निर्देश देने देगी।

अल्पसंख्यक आयोग ने क्या कहा?

महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने धर्म का त्योहार मनाने का अधिकार है, लेकिन सार्वजनिक आयोजनों में मुसलमानों को सामूहिक रूप से बाहर करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कई संगठन मुसलमानों को भी ऐसे कार्यक्रमों में बुलाते हैं और त्योहार लोगों को जोड़ने का काम करते हैं, बांटने का नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को कार्यक्रम में बुलाना या नहीं बुलाना आयोजक की इच्छा हो सकती है, लेकिन कोई व्यक्ति बिना बुलाए जबरन ऐसे कार्यक्रम में नहीं जाता। इस पूरे विवाद ने महाराष्ट्र में धार्मिक आयोजनों में भागीदारी, पहचान की जांच और सामाजिक सद्भाव को लेकर बहस तेज कर दी है।

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