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देवेंद्र फडणवीस ने छोड़ी महाराष्ट्र में सत्ता की आस!
Mon, 04 Jan 2021 10:11 PM IST
सुरेंद्र जोशी
अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो , मुंबई
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 04 Jan 2021 10:11 PM IST
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- फोटो : social media
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महाराष्ट्र में तीन दलों की महाविकास आघाड़ी सरकार के बीच आए दिन शुरू खींचतान के बावजूद लगता है कि उद्धव ठाकरे की सरकार कायम रहेगी। पूर्व मुख्यमंत्री व विपक्ष के नेता देवेन्द्र फडणवीस ने सूबे के सभी जिला मीडिया प्रभारियों से कहा है कि वे विपक्ष की भूमिका में आने का मन बना लें। उनके इस निर्देश से अंदाजा लगाया जा रहा है कि फडणवीस ने फिलहाल सत्ता में वापसी की आस छोड़ दी है।
फडणवीस भाजपा के चिंतन शिविर कहे जाने वाले मुंबई से सटे उत्तन स्थित रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी में रविवार को राज्य के सभी जिला मीडिया प्रभारियों से मुखातिब थे। मीडिया प्रभारियों की इस दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन प्रदेश भाजपा प्रवक्ता विश्वास पाठक ने आयोजित किया। भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने इसकी शुरूआत की जबकि समापन देवेन्द्र फडणवीस ने किया।
कार्यकर्ताओं से यह कहा फडणवीस ने
फडणवीस ने मीडिया सेल के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें विपक्ष में आए एक साल हो गया है, लेकिन कार्यकर्ता अब भी विपक्ष की भूमिका में नहीं आ पाए हैं। कार्यकर्ता अब पूरी तरह से विपक्ष की भूमिका में आने के लिए कमर कस लें। उनके इस संबोधन से कयास लगाया जाने लगा है कि फिलहाल, फडणवीस को महाराष्ट्र की सत्ता में फेरबदल की गुंजाइश नहीं दिखाई दे रही है।
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चुनाव के बाद छिन गई थी फडणवीस की कुर्सी
बीते वर्ष विधानसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा था। राज्य की कुल 288 सीटों में से भाजपा को सबसे ज्यादा 105 सीटें मिली थी जबकि शिवसेना ने 56 सीटें जीती थी। वहीं, एनसीपी के 54 और कांग्रेस के 44 विधायक चुने गए थे। शेष अन्य व निर्दलीय थे। संख्या के लिहाज से राज्य में भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार बननी तय थी। लेकिन, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद पर दावा कर दिया। जिससे चुनाव के उपरांत राजनीतिक समीकरण बदल गया। इसके बाद शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस से हाथ मिला लिया। हालांकि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के भतीजे अजीत पवार के साथ फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी लेकिन 20 घंटे के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। तब से लेकर अब तक राज्य में सत्तापरिवर्तन की सुगबुगाहट सुनाई देती रही है।
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फडणवीस भाजपा के चिंतन शिविर कहे जाने वाले मुंबई से सटे उत्तन स्थित रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी में रविवार को राज्य के सभी जिला मीडिया प्रभारियों से मुखातिब थे। मीडिया प्रभारियों की इस दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन प्रदेश भाजपा प्रवक्ता विश्वास पाठक ने आयोजित किया। भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने इसकी शुरूआत की जबकि समापन देवेन्द्र फडणवीस ने किया।
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कार्यकर्ताओं से यह कहा फडणवीस ने
फडणवीस ने मीडिया सेल के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें विपक्ष में आए एक साल हो गया है, लेकिन कार्यकर्ता अब भी विपक्ष की भूमिका में नहीं आ पाए हैं। कार्यकर्ता अब पूरी तरह से विपक्ष की भूमिका में आने के लिए कमर कस लें। उनके इस संबोधन से कयास लगाया जाने लगा है कि फिलहाल, फडणवीस को महाराष्ट्र की सत्ता में फेरबदल की गुंजाइश नहीं दिखाई दे रही है।
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चुनाव के बाद छिन गई थी फडणवीस की कुर्सी
बीते वर्ष विधानसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा था। राज्य की कुल 288 सीटों में से भाजपा को सबसे ज्यादा 105 सीटें मिली थी जबकि शिवसेना ने 56 सीटें जीती थी। वहीं, एनसीपी के 54 और कांग्रेस के 44 विधायक चुने गए थे। शेष अन्य व निर्दलीय थे। संख्या के लिहाज से राज्य में भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार बननी तय थी। लेकिन, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद पर दावा कर दिया। जिससे चुनाव के उपरांत राजनीतिक समीकरण बदल गया। इसके बाद शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस से हाथ मिला लिया। हालांकि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के भतीजे अजीत पवार के साथ फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी लेकिन 20 घंटे के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। तब से लेकर अब तक राज्य में सत्तापरिवर्तन की सुगबुगाहट सुनाई देती रही है।