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महाराष्ट्रः स्नातक और शिक्षक क्षेत्र के विधान परिषद की पांच सीटों पर चुनाव की बजी दुंदुभि
Mon, 02 Nov 2020 10:01 PM IST
गौरव पाण्डेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, मुंबई
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Mon, 02 Nov 2020 10:01 PM IST
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भाजपा-शिवसेना (सांकेतिक)
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महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी सरकार और विपक्षी दल भाजपा के बीच पहली बार कांटे का चुनावी मुकाबला होगा। निर्वाचन आयोग ने राज्य में स्नातक और शिक्षक क्षेत्र की पांच सीटों पर चुनाव की घोषणा कर दी है। विधान परिषद की इन पांच सीटों पर एक दिसंबर को मतदान होगा।
निर्वाचन आयोग ने सोमवार को नागपुर, पुणे और औरंगाबाद स्नातक क्षेत्र और अमरावती पुणे शिक्षक क्षेत्र सीट पर चुनाव की घोषणा की है। देश में कोरोना संकट के चलते पांच महीने के लंबे अंतराल के बाद विधान परिषद की इन सीटों पर चुनाव की घोषणा की गई है। दीपावली के ठीक बाद होने वाले इस चुनाव में कई दिलचस्प नजारे भी सामने आएंगे।
उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के बाद से अब तक ऐसा कोई चुनाव नहीं हुआ जिसमें सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली हो। लेकिन राज्य में स्नातक और शिक्षक क्षेत्र की इन सीटों पर चुनाव में महाविकास आघाड़ी सरकार और भाजपा के बीच न सिर्फ कांटे का मुकाबला होगा बल्कि नया चुनावी समीकरण भी देखने को मिलेगा।
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पांच में तीन सीटों पर है भाजपा का कब्जा
चुनाव आयोग ने जिन पांच विधान परिषद सीटों के चुनाव की घोषणा की है उनमें से स्नातक क्षेत्र की तीन सीटों पर भाजपा का कब्जा है। जिसमें से दो सीटें बरकरार रखना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। यदि महाविकास आघाड़ी के तीनों दल शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी ने मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा के लिए अपनी सीटों को बचा पाना काफी मुश्किल होगा। वहीं, दूसरा पेच यह है कि यदि तीनों दल साथ लड़ते हैं तो सीटों का बंटवारा कैसे होगा? यह सबसे अहम पहलू है।
राज्यपाल द्वारा मनोनीत होने वाले विधान परिषद सदस्यों को सूची फिर लटकी
महाराष्ट्र में विधान परिषद के 12 सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाने हैं। बीते सप्ताह राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार की ओर से 12 सदस्यों की सूची को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के पास भेजने का प्रस्ताव मंजूर किया गया था। सोमवार को सदस्यों की सूची राजभवन भेजी जानी थी लेकिन, फिर लटक गई। बताया गया है कि कांग्रेस और एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष के मुंबई से बाहर होने के नाते सोमवार को राज्यपाल के पास सूची नहीं भेजी गई।
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निर्वाचन आयोग ने सोमवार को नागपुर, पुणे और औरंगाबाद स्नातक क्षेत्र और अमरावती पुणे शिक्षक क्षेत्र सीट पर चुनाव की घोषणा की है। देश में कोरोना संकट के चलते पांच महीने के लंबे अंतराल के बाद विधान परिषद की इन सीटों पर चुनाव की घोषणा की गई है। दीपावली के ठीक बाद होने वाले इस चुनाव में कई दिलचस्प नजारे भी सामने आएंगे।
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उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने के बाद से अब तक ऐसा कोई चुनाव नहीं हुआ जिसमें सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली हो। लेकिन राज्य में स्नातक और शिक्षक क्षेत्र की इन सीटों पर चुनाव में महाविकास आघाड़ी सरकार और भाजपा के बीच न सिर्फ कांटे का मुकाबला होगा बल्कि नया चुनावी समीकरण भी देखने को मिलेगा।
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पांच में तीन सीटों पर है भाजपा का कब्जा
चुनाव आयोग ने जिन पांच विधान परिषद सीटों के चुनाव की घोषणा की है उनमें से स्नातक क्षेत्र की तीन सीटों पर भाजपा का कब्जा है। जिसमें से दो सीटें बरकरार रखना भाजपा के लिए बड़ी चुनौती है। यदि महाविकास आघाड़ी के तीनों दल शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी ने मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा के लिए अपनी सीटों को बचा पाना काफी मुश्किल होगा। वहीं, दूसरा पेच यह है कि यदि तीनों दल साथ लड़ते हैं तो सीटों का बंटवारा कैसे होगा? यह सबसे अहम पहलू है।
राज्यपाल द्वारा मनोनीत होने वाले विधान परिषद सदस्यों को सूची फिर लटकी
महाराष्ट्र में विधान परिषद के 12 सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाने हैं। बीते सप्ताह राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार की ओर से 12 सदस्यों की सूची को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के पास भेजने का प्रस्ताव मंजूर किया गया था। सोमवार को सदस्यों की सूची राजभवन भेजी जानी थी लेकिन, फिर लटक गई। बताया गया है कि कांग्रेस और एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष के मुंबई से बाहर होने के नाते सोमवार को राज्यपाल के पास सूची नहीं भेजी गई।