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महाराष्ट्र: रिश्वत मामले में सहकारी विभाग का आधिकारी बरी, जानिए क्या था मामला
Fri, 22 Sep 2023 06:05 PM IST
यशोधन शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Fri, 22 Sep 2023 06:05 PM IST
सार
महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक विशेष अदालत ने 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोपी सहकारी विभाग के एक अधिकारी को बरी कर दिया है। अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा, इसलिए उसे बरी कर दिया।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक विशेष अदालत ने 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोपी सहकारी विभाग के एक अधिकारी को बरी कर दिया है। विशेष न्यायाधीश अमित एम शेटे ने 16 सितंबर के एक आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष कथित आरोपी हौसेराव रामचंद्र गावड़े के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा, इसलिए उसे बरी कर दिया।
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विशेष लोक अभियोजक संजय बी मोरे ने अदालत को सूचित किया कि मामले में शिकायतकर्ता एक ट्रैवल एजेंसी में काम करती थी और मीरा रोड में एक हाउसिंग सोसाइटी में रहती थी।
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क्यों सील था फ्लैट
शिकायतकर्ता उच्च अध्ययन के लिए विदेश गई हुई थी, लेकिन 2009 में जब घर लौटी तो पाया कि उसका फ्लैट सील कर दिया गया था। उन्होंने बताया कि पूछताछ करने पर उसने पाया कि उसके खिलाफ मैंटेनेंस बकाया को लेकर वसूली की कार्यवाही शुरू की गई है।
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अभियोजन पक्ष ने कहा, शिकायतकर्ता ने विशेष रिकवरी अधिकारी गावडे से संपर्क किया, जिन्होंने उसे बताया कि कुछ अतिरिक्त शुल्क के अलावा 12 प्रतिशत की ब्याज दर के साथ उस पर 56,695 रुपये की धन राशि बकाया है।
नहीं साबित हो सका गुनाह
उन्होंने कहा कि रिकवरी ऑफिसर ने फ्लैट की सील खोलने के लिए कथित तौर पर 10 हजार रुपये की भी मांग की। ऐसे में रिश्वत ने देने पर शिकायतकर्ता ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से संपर्क किया, जिसने मांग का सत्यापन किया और कथित तौर पर अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। हालांकि, अदालत ने माना कि रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत रिश्वत की मांग को साबित नहीं करते हैं, जिसके चलते आरोपी बरी हो गया।